Girls Job Problem India back from Foreign Studies: भारत से बाहर पढ़ाई या काम करने वाले कई प्रोफेशनल्स यह मानते हैं कि ग्लोबल एक्सपीरियंस उन्हें देश लौटते ही बेहतर मौके दिलाएगा, लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर वायरल हुई दो पोस्ट्स ने इस सोच को झकझोर कर रख दिया है. कनाडा और यूके से भारत लौटी दो युवा महिला प्रोफेशनल्स ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि भारत में नौकरी ढूंढना उनके लिए अब तक की सबसे कठिन चुनौती बन गया है. इन पोस्ट्स ने भारत के जॉब मार्केट (India Job Market Reality) को लेकर नई बहस छेड़ दी है, जहां विदेशी अनुभव होने के बावजूद उम्मीदवारों को बेहद कम रिस्पॉन्स मिल रहा है.
600 आवेदन, सिर्फ 4 इंटरव्यू कॉल (600 Job Applications, Only 4 Interviews)
कनाडा से हाल ही में भारत लौटी एक महिला प्रोफेशनल ने बताया कि वह मार्केटिंग और कम्युनिकेशन फील्ड में काम कर चुकी हैं. भारत लौटने के बाद उन्होंने करीब 600 से ज्यादा नौकरियों के लिए आवेदन किया, लेकिन इसके बदले उन्हें केवल 4 इंटरव्यू कॉल मिले. उन्होंने अपनी Reddit पोस्ट में लिखा कि कनाडा में 50 से 100 आवेदन करने पर ही 10 से 15 इंटरव्यू मिल जाते थे, लेकिन भारत में यह अनुभव बिल्कुल उल्टा है. दो महीने की जॉब हंट ने उन्हें एक 'रियलिटी चेक' दे दिया.
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सैलरी और वैल्यू को लेकर निराशा (NRI job search)
इस महिला का कहना है कि भारत में उन्हें उनके अनुभव और प्रोफाइल के मुकाबले बेहद कम सैलरी ऑफर की जा रही है. उन्होंने पहले बड़ी कंपनियों के साथ काम किया है, इसके बावजूद भारतीय कंपनियों में उनका इंटरनेशनल एक्सपीरियंस कोई खास बढ़त नहीं दिला पा रहा. उनका सवाल साफ है कि, क्या भारत में वाकई ग्लोबल एक्सपीरियंस को महत्व दिया जाता है या फिर उसे नजरअंदाज कर दिया जाता है?
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यूके से लौटी युवती की कहानी भी कुछ ऐसी ही (UK Returnee Shares Similar Struggle)
इसी तरह, 25 साल की एक अन्य महिला (जिन्होंने यूके की एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और वहां करीब दो साल काम भी किया) ने भी अपनी परेशानी साझा की. उनका कहना है कि ग्रेजुएट वीजा खत्म होने और टॉक्सिक वर्क एनवायरनमेंट के चलते उन्हें भारत लौटना पड़ा. भारत आने के बाद उन्हें लगा कि यहां मौके मिलेंगे, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग निकली. उन्होंने कहा कि LinkedIn और जॉब पोर्टल्स पर आवेदन करने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिलता और कई बार एप्लिकेशन 'गायब' हो जाती हैं.
सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रियाएं (Mixed Reactions on Social Media)
इन पोस्ट्स के सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई. कुछ यूजर्स ने सहानुभूति जताई, तो कुछ ने कड़वी लेकिन व्यावहारिक सलाह दी. एक यूजर ने लिखा, 'भारत में विदेशी डिग्री अपने आप में कोई बड़ा प्लस नहीं है, इस सोच से बाहर निकलना होगा.' वहीं, कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि अगर भारत में मौके नहीं मिल रहे हैं, तो खाड़ी देशों (Gulf Countries Jobs) में करियर विकल्प तलाशे जा सकते हैं.
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जॉब सर्च सिस्टम पर उठे सवाल (Questions on Indian Hiring System)
इन महिलाओं ने भारत के हायरिंग प्रोसेस पर भी सवाल उठाए. उन्होंने जानना चाहा कि क्या यहां हायरिंग मैनेजर्स से सीधे संपर्क करना सही माना जाता है और कौन से ऐसे जॉब पोर्टल्स हैं जहां वाकई एक्टिव भर्ती होती है. यह चर्चा इसलिए अहम है क्योंकि यह हजारों एनआरआई प्रोफेशनल्स की उस उलझन को सामने लाती है, जो विदेश से लौटकर भारत में करियर दोबारा शुरू करना चाहते हैं. विदेश से लौटने के बाद भारत में नौकरी पाना आसान होगा...यह सोच अब सवालों के घेरे में है.
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