latest viral video : एक मशहूर फिल्मी डायलोग है कि किसी चीज को शिद्दत से चाहो तो पूरी कायनात उसे मिलाने की कोशिश करती है. 11 साल के मुकुंद की ख्वाहिश भी ऐसी ही थी. जो सोशल मीडिया की कायनात तक जा पहुंची. और, बेतार की इस दुनिया में ऐसे तार जुड़ते चले गए कि मुकुंद की मासूम सी ख्वाहिश पूरी हो गई. मेटास्टेटिक बोन कैंसर से जूझ रहे मुकुंद के लिए ये किसी सरप्राइज से कम नहीं था. अस्पताल की चारदीवारी में दिन गुजार रहे मुकुंद की ख्वाहिश थी उस कार में बस एक बार बैठने की. जो अब तक वो सोशल मीडिया पर ही देखता रहा है. उसका ये मासूम सपना बेहद खूबसूरती के साथ सच में बदल गया.
सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुई पूरी कहानी
इलाज के दौरान मुकुंद ने अपनी ये ख्वाहिश साझा की कि वो एक बार बस लैम्बॉर्गिनी में बैठना चाहते हैं. बात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X तक पहुंची. जहां एक पोस्ट में उनके सपने का जिक्र हुआ. ये पोस्ट सोशल मीडिया पर री पोस्ट होते होते ImPaCCT फाउंडेशन तक पहुंची. उन्होंने इस पर एक कदम और आगे बढ़ाया और पोस्ट को लैम्बोर्गिनी तक पहुंचा दिया. फाउंडेशन के अनिरुद्ध करंजेकर ने लैम्बॉर्गिनी से कॉन्टेक्ट भी किया. आमतौर पर बड़ी कंपनियों से जवाब आने में वक्त लगता है. लेकिन इस बार तुरंत जवाब मिला. कंपनी ने सारी फॉर्मेलिटीज को दरकिनार किया और कहा कि मुकुंद की इच्चा पूरी होगी. कुछ ही दिन बात एक लैम्बॉर्गिनी टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के बाहर पहुंच गई. जहां मुकुंद का इलाज चल रहा है.
इलाज से दूर, मुस्कान के करीब
मुकुंद सिर्फ इस कार में बैठना चाहता था. लेकन लैम्बोर्गिनी ने उसे मुंबई की सड़कों की सैर भी करवाई. मुकुंद और उनकी मां को कार में बैठाकर मुंबई की सड़कों पर लंबी ड्राइव कराई गई. अस्पताल की मशीनों की आवाज और सफेद गलियारों से दूर. मुकुंद कुछ घंटों के लिए एक आम बच्चा बन गया. कार की राइड एक्सपीरियंस कराने के बाद मुकुंद को लैम्बोर्गिनी ने शो रूप में भी इनवाइट किया. वहां टीम ने कार को पास से दिखाया, उनके सवालों के जवाब दिए और गर्मजोशी से स्वागत किया.














