संक्रांति या गिनीज़ रिकॉर्ड? पहली संक्रांति पर दामाद को परोसे 158 पकवान, Video वायरल

आंध्र प्रदेश के तेनाली में एक परिवार ने दामाद की पहली संक्रांति पर 158 व्यंजन बनाकर ऐसा जश्न मनाया कि वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.

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संक्रांति या गिनीज़ रिकॉर्ड?

संक्रांति सिर्फ फसल का त्योहार नहीं, बल्कि रिश्तों और परंपराओं का उत्सव भी है. आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के तेनाली से सामने आई एक कहानी ने यही बात साबित कर दी, जहां एक परिवार ने अपने दामाद की पहली संक्रांति को इतना खास बना दिया कि पूरा देश हैरान रह गया. 

आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के तेनाली कस्बे का एक परिवार इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है. वजह है, संक्रांति के मौके पर अपने दामाद के लिए तैयार किया गया 158 व्यंजनों का भव्य भोज.

पहली संक्रांति बनी यादगार

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, वंदनापु मुरलीकृष्ण और उनकी पत्नी ने यह खास आयोजन अपनी बेटी मौनिका और दामाद श्रीदत्त के लिए किया. श्रीदत्त मूल रूप से गोदावरी जिले के राजामहेंद्रवरम से हैं. यह उनकी शादी के बाद पहली संक्रांति थी, जिसे परिवार ने बेहद खास अंदाज़ में मनाने का फैसला किया. आंध्र प्रदेश में पहली संक्रांति का विशेष महत्व होता है, खासकर जब दामाद पहली बार ससुराल आता है. इसे सम्मान, अपनापन और प्रेम दिखाने का अवसर माना जाता है.

देखें Video:

158 व्यंजनों से सजी थाली

इस भव्य भोज में पारंपरिक संक्रांति व्यंजनों की भरमार थी. इसमें मुरुक्कू, चेक्कलु और गारेलु जैसे नमकीन शामिल थे. वहीं गुड़ से बनी मिठाइयों में अरिसेलु, बोब्बटलु, सुन्नुंडलु और कज्जिकायालु परोसे गए. इसके अलावा शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह के व्यंजन भी तैयार किए गए, चावल की कई किस्में, मसालेदार करी और तरह-तरह के साइड डिशेज़ ने इस दावत को और भी खास बना दिया.

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वीडियो वायरल, मंत्री की भी प्रतिक्रिया

इस आयोजन का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर सामने आया, देखते ही देखते वायरल हो गया. वीडियो ने परंपरा, प्यार और भव्यता को लेकर बहस भी छेड़ दी. आंध्र प्रदेश के कैबिनेट मंत्री लोकेश नारा ने भी इस वीडियो पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने सोशल मीडिया मंच पर लिखा कि संक्रांति सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि आंध्र के घरों में एक भावना है. दामाद के लिए 158 व्यंजन हमारी परंपरा, प्रेम और मेहमाननवाज़ी को दर्शाते हैं.

सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं

जहां कई लोग इस प्यार और मेहनत से प्रभावित हुए, वहीं कुछ ने हल्के-फुल्के अंदाज़ में कमेंट किया. एक यूज़र ने मज़ाक में लिखा, कि दामाद को यह सब खाने के लिए दो दिन पहले से भूखा रहना पड़ा होगा. एक अन्य यूज़र ने लिखा, कि लोग कहते हैं प्यार नापा नहीं जा सकता, लेकिन आंध्र के माता-पिता ने उसे व्यंजनों में नापकर दिखा दिया. हालांकि, कुछ लोगों ने इसे फिजूलखर्ची भी बताया और खाने की बर्बादी पर सवाल उठाए. यह कहानी दिखाती है कि भारत में त्योहार सिर्फ रस्म नहीं, बल्कि रिश्तों को मनाने का तरीका हैं, चाहे वो सादगी से हो या भव्यता से.

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