24 साल के लड़के ने 4 महीने में खड़ी की 1 करोड़ की कंपनी! अब 10 करोड़ का टारगेट, कहानी कर देगी हैरान

24 साल के उज्ज्वल नरगोत्रा ने दावा किया है कि उन्होंने सिर्फ 4 महीनों में 1 करोड़ रुपये का स्टार्टअप खड़ा कर लिया. जानिए कैसे एक साधारण आइडिया से बना LinkPlease प्लेटफॉर्म, क्या है इसकी खासियत, और क्यों कुछ लोग इस दावे पर सवाल भी उठा रहे हैं.

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नौकरी छोड़ी, 4 महीने में खड़ा किया 1 करोड़ का स्टार्टअप, कहानी कर देगी मोटिवेट

आज के समय में जहां स्टार्टअप शुरू करना आसान नहीं माना जाता, वहीं 24 साल के एक लड़के ने महज 4 महीनों में 1 करोड़ रुपये का स्टार्टअप खड़ा करने का दावा किया है. यह कहानी सिर्फ तेजी से सफलता पाने की नहीं, बल्कि सही समस्या पहचानने और उस पर तुरंत काम करने की भी है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस कहानी ने लोगों को हैरान भी किया है और प्रेरित भी.

कैसे आया आइडिया?

24 वर्षीय उद्यमी उज्ज्वल नरगोत्रा ने बताया कि उन्हें यह आइडिया क्रिएटर इकोनॉमी की एक बड़ी समस्या को देखकर आया. उन्होंने देखा कि कंटेंट क्रिएटर्स अच्छे वीडियो और पोस्ट तो बना रहे हैं, लेकिन उन्हें मिलने वाले हजारों DM और कमेंट्स को संभाल नहीं पाते. यहीं से उन्हें लगा कि अगर इस प्रोसेस को ऑटोमेट किया जाए, तो क्रिएटर्स के लिए बड़े मौके बन सकते हैं.

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4 महीने में 1 करोड़ का सफर

उज्ज्वल ने ज्यादा सोचने के बजाय तेजी से काम करने का फैसला किया. उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और एक बेसिक प्रोडक्ट तैयार किया. यह परफेक्ट नहीं था, लेकिन इतना अच्छा जरूर था कि यूजर्स इसे इस्तेमाल कर सकें. उनका प्लेटफॉर्म LinkPlease क्रिएटर्स के ऑडियंस एंगेजमेंट को ऑटोमेट करने में मदद करता है, जिससे वे मिस हुए मैसेज और मौके को कैच कर सकें. धीरे-धीरे इस प्लेटफॉर्म से 10,000 से ज्यादा क्रिएटर्स जुड़ गए और यूजर फीडबैक के आधार पर प्रोडक्ट को बेहतर बनाया गया. उज्ज्वल का दावा है कि उनकी कंपनी ने बिना किसी बाहरी फंडिंग के 1 करोड़ रुपये का आंकड़ा छू लिया.

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आगे का टारगेट क्या है?

अब उज्ज्वल का अगला लक्ष्य अपने स्टार्टअप को 1 करोड़ से 10 करोड़ रुपये तक ले जाना है. उनका मानना है कि अगर सही समस्या को जल्दी सॉल्व किया जाए, तो ग्रोथ अपने आप आती है.

लोगों के सवाल 

जहां कई लोग उनकी सफलता की तारीफ कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग सवाल भी उठा रहे हैं. कई यूजर्स ने पूछा कि 1 करोड़ का आंकड़ा आखिर है क्या. क्या यह रेवेन्यू है या सिर्फ कुल वैल्यू? कुछ ने इसे ManyChat और SuperBio जैसे प्लेटफॉर्म से तुलना करते हुए पूछा कि इसमें नया क्या है. एक यूजर ने लिखा कि असली सफलता रिटेंशन और वेरिफाइड रेवेन्यू से तय होती है, जबकि दूसरे ने कहा कि तेजी से एक्सीक्यूशन ही असली गेम चेंजर है.

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(Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.)

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