पीरियड्स की वजह से 19 साल की लड़की की मौत, दिल तोड़ देगी ये कहानी, दुनिया के लिए सबक

Menstrual Pain: वो दर्द जिसे अक्सर 'नॉर्मल' कहकर टाल दिया जाता है, किसी के लिए जिंदगी से भी भारी पड़ सकता है. हाल ही में आई यह खबर एक 19 साल की लड़की की उस खामोश जंग की कहानी है, जिसे न वक्त पर समझा गया, न सुना गया.

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जिस दर्द को 'नॉर्मल' कहा गया, वही बन गया मौत की वजह

Menstrual Pain Death: कभी-कभी दर्द सिर्फ जिस्म को नहीं, बल्कि रूह को भी थका देता है. एक ऐसी ही दर्द भरी दास्तां सामने आई है...जो दिल को भारी कर देने वाली है, जहां नौकरी और बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर आई एक 19 साल की लड़की, असहनीय माहवारी और पेट के दर्द के आगे हार गई. उसकी जान जाना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि उस सच्चाई का आईना है, जिस पर समाज आज भी खुलकर बात करने से कतराता है. एक नौजवान लड़की, सपनों और जिम्मेदारियों के बोझ के बीच, ऐसे दर्द से जूझ रही थी जिसे कोई समझ ही नहीं पाया.

गांव में पसरा सन्नाटा, परिवार सदमे में (Byatha village incident)

कर्नाटक के तुमकुरु से आई यह खबर उस खामोश तकलीफ की कहानी है, जिस पर आज भी खुलकर बात नहीं होती. तुमकुरु जिले के ब्याठा गांव (उरडीगेरे होबली) में 19 साल की कीर्तना की जान जाने की खबर ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है. मूल रूप से कलाबुरगी के सलहल्लि की रहने वाली कीर्तना दो महीने पहले नौकरी की तलाश में अपने मामा के घर आई थी. काम नहीं मिलने पर वह वहीं रह रही थी. किसी को अंदाजा नहीं था कि उसकी अंदरूनी जंग इतनी खामोश और खतरनाक है.

दर्द जो शब्दों से परे था... (Karnataka youth mental health)

परिजनों के मुताबिक, कीर्तना लंबे समय से गंभीर पेट और माहवारी (menstrual pain) के दर्द से परेशान थी. यह दर्द इतना शदीद था कि वह कई बार सामान्य दिनचर्या भी नहीं निभा पाती थी. जिस दिन यह हादसा हुआ, घर पर कोई मौजूद नहीं था. अकेलेपन और असहनीय तकलीफ के बीच उसने अपनी जान ले ली. यह खबर सामने आते ही परिवार पर गम का पहाड़ टूट पड़ा.

पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया (Police Investigation Underway)

सूचना मिलने पर क्याथासंद्रा पुलिस मौके पर पहुंची. शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है और अप्राकृतिक डेथ (unnatural death case) का मामला दर्ज किया गया है. पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है, ताकि सच्चाई सामने आ सके. यह घटना सिर्फ एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि एक बड़ा सवाल भी खड़ा करती है कि, क्या हम महिलाओं के स्वास्थ्य, खासकर menstrual health और chronic pain को गंभीरता से लेते हैं? अक्सर इस दर्द को 'सामान्य' कहकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि यह जानलेवा साबित हो सकता है.

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