हिटलर की नाजी सेना ने जिस 300 साल पुराने वायलिन को लूटा, अचानक फ्रांस में कैसे हुआ 'प्रकट', कीमत 95 करोड़!

300 साल पुराने 'लाउटरबाख' नाम के एक स्ट्राडिवेरियस वायलिन को दूसरे विश्व युद्ध के दौरान नाजियों ने चुरा लिया था. एक्सपर्ट मान रहे हैं कि अब यह संभवतः फ्रांस में मिल गया है.

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सबसे महंगा स्ट्राडिवेरियस होने का रिकॉर्ड “लेडी ब्लंट” के नाम है, जो 2011 में 15.9 मिलियन डॉलर में बिका था.

300 साल पुराना एक बहुत कीमती वायलिन, जिसकी कीमत करीब 95 करोड़ रुपए हो और जो तकरीबन 3 दशक पहले खो गया था... वो अचानक फिर से मिल जाए तो क्या होगा! यह वही स्ट्राडिवेरियस वायलिन हो सकता है जिसे दूसरे विश्व युद्ध के समय हिटलर की नाजी सेना ने चुरा लिया था. अब फ्रांस में एक संगीत कार्यक्रम के दौरान दिखा एक वायलिन इस पुराने रहस्य को फिर से जगा रहा है. एक्सपर्ट मान रहे हैं कि यह वही खोया हुआ वायलिन हो सकता है. अगर यह सच हुआ, तो यह संगीत इतिहास की बहुत बड़ी खोज होगी. यह कहानी रहस्य, इतिहास और संगीत से जुड़ी एक दिलचस्प घटना है.

300 साल पुराना स्ट्राडिवेरियस वायलिन

300 साल पुराने 'लाउटरबाख' नाम के एक स्ट्राडिवेरियस वायलिन को दूसरे विश्व युद्ध के दौरान नाजियों ने चुरा लिया था और अब यह फ्रांस में मिल गया है? लूटे गए संगीत वाद्ययंत्रों की एक्सपर्स्ट पास्कल बर्नहाइम ऐसा मानती हैं. एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार इसका पहला संकेत उन्हें एक स्थानीय अखबार की खबर से मिला. उस खबर में बताया गया कि वायलिन वादक इमैनुएल कॉप्पे ने जर्मनी की सीमा के पास एलसास क्षेत्र के कोलमार शहर में वाइन और संगीत की एक शाम के दौरान कई पुराने वायलिन बजाकर अपनी कला दिखाई.

अखबार ले डेर्नियेर नूवेल द'अलसास के अनुसार, पहला स्ट्राडिवेरियस वायलिन 1624 में लुथियर निकोलो अमाती ने बनाया था, और दूसरा 1735 में एंटोनियो ग्वारनेरी ने बनाया था. तीसरा वायलिन इटली के लुथियर एंटोनियो स्ट्राडिवारी ने 1719 में बनाया था. जिस लाउटरबाख वायलिन को नाजियों ने चुराया था, उसे लुथियर एंटोनियो स्ट्राडिवारी ने ही बनाया था. बर्नहाइम ने एएफपी से कहा है, “मुझे पूरा विश्वास है कि यह ‘लाउटरबाख' है,” जिसका नाम इसके शुरुआती मालिकों में से एक के नाम पर रखा गया था.

जब नाजी सैनिकों ने चुराई थी वायलिन

फ्रांस के अखबार ले पेरिसियन के अनुसार, 1944 में नाजी सैनिकों ने इस वायलिन को पोलैंड की राजधानी वारसॉ के एक संग्रहालय से चुरा लिया था. यह वायलिन शीत युद्ध के दौरान कई साल तक पूर्वी जर्मनी में रहा, और आखिरी बार 1990 के शुरुआती सालों में फ्रांस में देखा गया था. स्ट्राडिवारी ने 1719 में सिर्फ 9 वायलिन बनाए थे, जिनमें से 2 अभी भी गायब हैं- “लाउटरबाख” और “लाउटेंशलागर”.

“लाउटेंशलागर” के पीछे का हिस्सा दो लकड़ी के टुकड़ों से बना है, जबकि “लाउटरबाख” एक ही टुकड़े से बना है. इमैनुएल जैगर नाम के एक क्लासिकल कॉन्सर्ट प्रोड्यूसर ने 31 मार्च को कोलमार में वाइन और संगीत का कार्यक्रम आयोजित किया था. बर्नहाइम ने बताया कि 2017 में जैगर ने उनसे स्ट्रासबर्ग के लुथियर जीन-क्रिस्टोफ ग्राफ के पास मौजूद एक वायलिन की असली पहचान जानने के लिए संपर्क किया था.

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बर्नहाइम ने बताया कि पिछले साल अपनी मौत से पहले ब्रिटिश लुथियर चार्ल्स बियर ने इसे देखा और कहा कि यह स्ट्राडिवेरियस है, जो उसके “गोल्डन पीरियड” का है. उन्होंने यह भी कहा कि बियर को चिंता थी कि शायद यह चुराया गया वायलिन हो सकता है.

‘यह कौन सा है?' 

फ्रांसीसी विशेषज्ञ ने और जांच की और पाया कि दूसरे विश्व युद्ध से पहले यह वायलिन पोलैंड के उद्योगपति हेनरिक ग्रोहमन के पास था, और उनकी मौत से पहले इसे पोलिश संग्रहालय को दे दिया गया था. उन्होंने यह भी पता लगाया कि उनके परिवार के लोग ऑस्ट्रिया और अर्जेंटीना में रहते हैं. लेकिन अभी भी यह पूरी तरह साबित नहीं हुआ है कि यह वही वायलिन है.

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बता दें कि फरवरी में न्यूयॉर्क में हुई नीलामी में एक दुर्लभ स्ट्राडिवेरियस वायलिन “जोआखिम-मा स्ट्राडिवेरियस” 11.3 मिलियन डॉलर में बिका था. सबसे महंगा रिकॉर्ड एक और स्ट्राडिवेरियस “लेडी ब्लंट” के नाम है, जो 2011 में 15.9 मिलियन डॉलर में बिका था.

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