- अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला किया जिसमें सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हुई है
- इजरायली सेना ने दावा किया कि इस हमले में ईरान के 40 शीर्ष कमांडर भी मारे गए हैं
- इजरायल ने ईरान पर खतरनाक बैलिस्टिक मिसाइलें बनाने का आरोप लगाया जो उसके अस्तित्व के लिए खतरा थीं
ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला हुआ है. ये हमला अमेरिका और इजरायल ने मिलकर किया. इसे इसलिए अब तक का सबसे बड़ा हमला माना जा सकता है, क्योंकि इसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई है. सिर्फ खामेनेई ही नहीं, बल्कि इजरायली सेना ने 40 टॉप कमांडरों के मारे जाने का दावा भी किया है. अमेरिका और इजरायल ने ये हमला ऐसे समय किया, जब ईरान के न्यूक्लियर और मिसाइल प्रोग्राम को लेकर बातचीत चल रही थी. बातचीत के बीच में ही ही हमला करने की इजरायल ने अब वजह बता दी है. इजरायल का दावा है कि ईरान खतरनाक मिसाइलें बना रहा था, जिससे उसके अस्तित्व को खतरा था.
इजरायली वायुसेना ने X पर पोस्ट कर ईरान की सत्ता को आतंकी शासन बताया है. इजरायली वायुसेना ने बताया कि ईरान लगातार मिसाइल बना रहा था और 2027 तक लगभग 8 हजार मिसाइलें बना सकता था, जिससे इजरायल और मिडिल ईस्ट के अस्तित्व पर खतरा था.
मिसाइल प्रोडक्शन में लगा था ईरान: इजरायल का दावा
इजरायली वायुसेना ने बताया कि ईरान का आतंकी शासन इजरायल को खत्म करने के प्लान को आगे बढ़ा रहा था. 'ऑपरेशन विथ द लॉयन' की कामयाबी से ईरान में कम से कम 1,500 बैलिस्टिक मिसाइलों का प्रोडक्शन रुक गया, लेकिन IDF ने हाल में पाया कि ईरान की मिसाइल प्रोडक्शन कैपेबिलिटी फिर से ठीक हो रही है.
पिछले साल जून में ऑपरेशन 'विथ द लॉयन' शुरू होने से पहले मिलिट्री इंटेलिजेंस को पता चला था कि ईरान की मिसाइल प्रोडक्शन की रफ्तार में काफी तेजी आई है और 2027 तक लगभग 8 हजार मिसाइलें बनाने की कोशिश की जा रही है, जो इजरायल और मिडिल ईस्ट के लिए अस्तित्व पर सीधा खतरा है.
IDF के असेसमेंट से पता चला कि ऑपरेशन 'विथ द लॉयन' शुरू होने से पहले तक ईरान के पास लगभग 3 हजार बैलिस्टिक मिसाइलें थीं. इस ऑपरेशन से उसकी मिसाइल प्रोडक्शन कैपिबिलिटी पर असर पड़ा.
इस खतरे के कारण किया हमला!
वायुसेना ने दावा किया कि ईरान की आतंकी सरकार इजरायल को खत्म करने के प्लान को आगे बढ़ा रही थी और ऑपरेशन 'विथ द लॉयन' के बाद से उसने अपनी मिसाइल बनाने की काबिलियत को फिर से ठीक करने की कोशिशें तेज कर दी थीं.
उसने दावा किया है कि 28 फरवरी को ऑपरेशन 'रोर ऑफ द लॉयन' शुरू होने तक ईरानी सरकार हर महीने दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें बना रही थीं, लेकिन इसकी रफ्तार भी बढ़ रही थी. इसके अलावा, ईरान की आतंकी सरकार अंडरग्राउंड प्रोडक्शन इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए काफी कोशिशें कर रही है.
वायुसेना ने कहा कि 'इजरायल को खत्म करने की नीयत रखने वाली सरकार का मिसाइलों को बनाए रखना उसके वजूद के लिए खतरा है. IDF ईरानी आतंकी सरकार को अपनी मिलिट्री काबिलियत को फिर से ठीक नहीं करने देगी और इजरायल अपने नागरिकों के खिलाफ कहीं भी और कभी भी बनने वाले किसी भी खतरे को नाकाम करने के लिए काम करती रहेगी.'













