सीरिया में क्या कर रहे हैं मैक्रों? दमिश्क में जहां हुए धमाके, वहां फ्रांसीसी राष्ट्रपति के होने की पूरी कहानी

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सीरिया यात्रा के बीच दमिश्क में बम धमाके हुए हैं. मैक्रों के होटल के बाहर हुए धमाके में कम से कम 18 लोग घायल हैं.

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सीरिया के जिस होटल में थे इमैनुएल मैक्रों, उसके बाहर एक के बाद एक बम धमाके (फोटो- एएफपी)
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  • फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के सीरिया दौरे के बीच दमिश्क में बम धमाके हुए हैं, 18 घायल
  • 2024 में अल-शरा के सत्ता में आने के बाद सीरिया का दौरा करने वाले मैक्रों पहले बड़े पश्चिमी नेता हैं
  • मैक्रों ने यूरोप और अमेरिका को सीरिया पर लगे ज्यादातर प्रतिबंध हटाने के लिए मनाने में अहम भूमिका निभाई थी

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों एक अहम दौरे पर सीरिया पहुंचे हैं और इस बीच ही दमिश्क में कई धमाके हुए हैं. इमैनुएल मैक्रों जैसे ही सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा से मिलने के लिए राष्ट्रपति भवन में दाखिल हुए ही थे कि तभी 'फोर सीजन्स होटल' के पास धमाके हुए, जिसमें कम से कम 18 लोग घायल हो गए हैं. इसी होटल में मैक्रों ठहरे हुए थे. चलिए आपको बताते हैं कि इमैनुएल मैक्रों सीरिया क्यों गए हैं और उनका यह दौरा अहम क्यों है.

मैक्रों के अहम दौरे के बीच धमाका

सीरियाई मीडिया ने खबर दी कि मैक्रों 'फोर सीजन्स' होटल में ठहरे हुए थे. फ्रांसीसी राष्ट्रपति के ऑफिस का कहना है कि वे सुरक्षित हैं और राष्ट्रपति अल-शरा के साथ उनकी बैठक जारी है. 2024 में अल-शरा के सत्ता में आने के बाद सीरिया का दौरा करने वाले मैक्रों पहले बड़े पश्चिमी नेता हैं. उनका यह दौरा तुर्की की राजधानी अंकारा में होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन में जाने से पहले हो रहा है.

न्यूज एजेंसी एपी की रिपोर्ट के अनुसार मैक्रों ने यूरोप और अमेरिका को सीरिया पर लगे ज्यादातर प्रतिबंध हटाने के लिए मनाने में अहम भूमिका निभाई थी. वे सोमवार रात एक आर्थिक प्रतिनिधिमंडल के साथ सीरिया पहुंचे. वे सीरिया के राष्ट्रपति अल-शरा के साथ कई समझौतों (MoU) पर हस्ताक्षर करने वाले हैं, क्योंकि 14 साल के युद्ध के बाद यह जर्जर देश फिर से खुद को खड़ा करने के लिए निवेशकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है.

हालांकि ये धमाके अल-शरा के लिए एक बड़ा झटका हैं. अल-शरा 2024 में बशर असद को सत्ता से हटाने वाले विद्रोह का नेतृत्व करने के बाद सत्ता में आए थे. तब से उन्होंने युद्ध से तबाह सीरिया में पूरा नियंत्रण स्थापित करने और स्थिरता लाने की कोशिश की है. साथ ही, उन्होंने उन अल्पसंख्यकों का भरोसा जीतने की कोशिश की है जिन्हें उनके इस्लामी-नेतृत्व वाले शासन पर शक था. साथ ही अल-शरा ने पश्चिमी सरकारों का समर्थन हासिल करने की कोशिश की है क्योंकि अला-शरा का अतीत दागदार रहा है. अल-शरा अल-कायदा से जुड़े रहे 'हयात तहरीर अल-शाम' समूह का नेतृत्व करते थे. अब वे ही सरकार हैं और उनकी सरकार ने दशकों के तानाशाही शासन के बाद राजनीतिक और आर्थिक सुधार का वादा किया है.

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सीरिया के नए शासकों को नियंत्रण स्थापित करने की कोशिशों के दौरान देश में अलग-अलग समूहों से जुड़ी हिंसा का सामना करना पड़ा है. इसके बावजूद इस उथल-पुथल भरे दौर में अबतक राजधानी काफी हद तक शांत रही थी. बता दें कि सीरिया में संघर्ष के कारण लगभग पांच लाख लोग मारे गए और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं. सीरिया का बुनियादी ढांचा बर्बाद हो चुका है. 

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