अमेरिका को ग्रीनलैंड क्यों चाहिए? डोनाल्ड ट्रंप ने खुद बताई बड़ी वजह

तेल और गैस कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने डेनमार्क के दावे पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा, '500 साल पहले वहां नाव उतारने से जमीन की मालिकाना हक नहीं मिलता. हमने भी कई नावें भेजी थीं. लेकिन हमें यह जमीन चाहिए क्योंकि ग्रीनलैंड के आसपास आज रूसी और चीनी जहाज और पनडुब्बियां मौजूद हैं.'

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए कार्रवाई करने की बात कही.
  • ट्रंप ने कहा कि नाव भेजना जमीन का मालिकाना हक नहीं देता, इसलिए अमेरिका ग्रीनलैंड पर अधिकार चाहता है.
  • डेनमार्क ने ट्रंप के बयानों को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि किसी NATO देश पर हमला पूरे यूरोप के लिए खतरा होगा.
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार देर रात फिर ग्रीनलैंड पर कार्रवाई की बात कही. उन्होंने कहा कि अमेरिका को 'कुछ करना ही होगा', वरना रूस और चीन इस आर्कटिक क्षेत्र पर कब्जा कर लेंगे. ट्रंप ने साफ कहा, 'हम रूस या चीन को अपना पड़ोसी नहीं बनने देंगे.'

'नाव भेजने से जमीन पर कब्जा नहीं मिलता'

तेल और गैस कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने डेनमार्क के दावे पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा, '500 साल पहले वहां नाव उतारने से जमीन की मालिकाना हक नहीं मिलता. हमने भी कई नावें भेजी थीं. लेकिन हमें यह जमीन चाहिए क्योंकि ग्रीनलैंड के आसपास आज रूसी और चीनी जहाज और पनडुब्बियां मौजूद हैं.'

'हम ग्रीनलैंड पर कुछ करेंगे'

ट्रंप ने चेतावनी दी, 'हम ग्रीनलैंड पर कुछ करेंगे, चाहे आसान तरीके से या मुश्किल तरीके से. अगर हम नहीं करते, तो रूस या चीन कब्जा कर लेंगे. हम ऐसा नहीं होने देंगे. जब हम मालिक होते हैं, तब हम रक्षा करते हैं. लीज़ की रक्षा नहीं होती, मालिकाना हक की होती है.'

यह भी पढ़ें- शाह से खामेनेई तक: 47 साल बाद ईरान फिर उसी मोड़ पर, जानिए 1979 की सत्ता क्रांति की पूरी कहानी

डेनमार्क का कड़ा जवाब

ट्रंप के बयान पर डेनमार्क ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन ने कहा, 'अगर अमेरिका किसी NATO देश पर हमला करता है, सब कुछ रुक जाएगा. यूरोप की पूरी सहमति है कि सीमाओं का सम्मान होना चाहिए.' उन्होंने ट्रंप के दावे को अस्वीकार्य बताया.

बता दें कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है, दुर्लभ खनिजों, यूरेनियम और लोहे जैसे संसाधनों से भरपूर है. ट्रंप पहले भी 2019 में इसे खरीदने की पेशकश कर चुके हैं, लेकिन डेनमार्क ने साफ कहा था कि ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है.

Advertisement

रणनीतिक महत्व और ट्रंप की योजना

ग्रीनलैंड लंबे समय से अमेरिका की आर्कटिक रणनीति का केंद्र रहा है. ट्रंप ने कहा कि अगर अमेरिका ने वेनेजुएला में कार्रवाई नहीं की होती, तो चीन या रूस वहां कब्जा कर लेते. उन्होंने यूरोप की पवन ऊर्जा नीति पर भी हमला बोला, इसे सबसे महंगी और बेकार ऊर्जा बताया.

ट्रंप ने कहा, 'मैं विंडमिल का प्रशंसक नहीं हूं. हमने एक भी विंडमिल को मंजूरी नहीं दी है और आगे भी नहीं देंगे. ये पैसे का नुकसान है, परिदृश्य को खराब करते हैं, पक्षियों को मारते हैं और चीन में बनते हैं. चीन खुद इन्हें इस्तेमाल नहीं करता, सिर्फ यूरोप और अमेरिका को बेचता है.'

Advertisement

यह भी पढ़ें- ईरान में बगावत की आग… चौथे बड़े शहर कराज का सिटी हॉल खाक, अब तक 62 मौतें, खामेनेई के तख्तापलट की आहट?

अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अमेरिका की वापसी

गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत अमेरिका 35 गैर-UN संगठनों और 31 UN निकायों से बाहर होगा. इनमें भारत और फ्रांस की अगुवाई वाला इंटरनेशनल सोलर अलायंस, इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर और इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज जैसी संस्थाएं शामिल हैं.

Advertisement

ट्रंप के इन बयानों ने यूरोप में चिंता बढ़ा दी है. डेनमार्क ने चेतावनी दी है कि अगर ग्रीनलैंड पर हमला हुआ, तो उसकी सेना पहले गोली चलाएगी, बाद में सवाल पूछेगी.

Featured Video Of The Day
Sucherita Kukreti | Owaisi Hijab PM: PM इन हिजाब की डिमांड, ओवैसी का मजहबी ख्वाब? | Mic On Hai