भारत से निपाह वायरस फैलने के कोई संकेत नहीं: WHO

चमगादड़ों और सूअरों जैसे जानवरों द्वारा फैलाया जाने वाला यह वायरस बुखार और मस्तिष्क में सूजन पैदा कर सकता है. इसकी मृत्यु दर 40% से 75% तक है और इसका कोई इलाज नहीं है.

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  • WHO के अधिकारी ने बताया कि भारत में निपाह वायरस के संक्रमण का खतरा वर्तमान में कम आंका जा रहा है
  • भारत में संक्रमित दो मरीजों के संपर्क में आए 190 से अधिक लोगों में से किसी में भी संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई
  • कई एशियाई देशों ने भारत में संक्रमण की पुष्टि के बाद हवाई अड्डों पर जांच को और अधिक कड़ा कर दिया है
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के एक अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि निपाह वायरस के फैलने का खतरा कम है. उन्होंने बताया कि भारत में संक्रमित पाए गए दो लोगों के 190 से अधिक संपर्कों में आए लोगों में से किसी की भी जांच में संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है और न ही उनमें बीमारी के लक्षण विकसित हुए हैं.

भारत में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद हांगकांग, मलेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम सहित कई एशियाई देशों ने इस सप्ताह हवाई अड्डों पर जांच को और सख्त कर दिया है ताकि इस तरह के प्रसार को रोका जा सके.

WHO ने क्यों कहा ऐसा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के स्वास्थ्य आपातकालीन कार्यक्रम की अधिकारी अनाइस लेगैंड ने जिनेवा में एक प्रेस ब्रीफिंग में बताया, "राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर जोखिम कम माना जा रहा है." उन्होंने कहा कि दोनों पुष्ट रोगियों में से किसी ने भी लक्षण दिखने के बाद यात्रा नहीं की. उन्होंने आगे बताया कि संक्रमित दोनों मरीज अस्पताल में भर्ती हैं और जीवित हैं, जिनमें से एक की हालत में सुधार के संकेत दिख रहे हैं.

लेगैंड ने कहा कि डब्ल्यूएचओ वायरस के सिक्वेंस का आकलन करने के लिए भारत द्वारा जारी किए जाने का इंतजार कर रहा है, लेकिन उन्होंने कहा कि "फिलहाल ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है, जिससे हमें चिंता हो."

कैसे फैलता है वायरस

चमगादड़ों और सूअरों जैसे जानवरों द्वारा फैलाया जाने वाला यह वायरस बुखार और मस्तिष्क में सूजन पैदा कर सकता है. इसकी मृत्यु दर 40% से 75% तक है और इसका कोई इलाज नहीं है. विकास के चरण में मौजूद टीकों का अभी भी परीक्षण किया जा रहा है. इस संक्रमण का स्रोत अभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है. लेगैंड ने कहा कि ताड़ के रस के सेवन से संक्रमण या स्वास्थ्य सुविधाओं में संपर्क जैसे अनुमानों पर विचार किया जा रहा है.

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