कौन हैं कट्टरपंथी नेता मौलाना फजलुर रहमान? पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को ललकारा, वर्दी उतारने की दी चुनौती

मौलाना फजलुर रहमान कभी शहबाज सरकार की गठबंधन सरकार के हिस्सा थे. इस दौरान ही आसिम मुनीर को पाकिस्तान का आर्मी चीफ बनाया गया था.

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मौलाना रहमान ने कहा कि पाक सेना देश की सुरक्षा और रक्षा को छोड़कर सेना हर काम में लगी हुई है. 
NDTV
इस्लामाबाद:

पाकिस्तान में अमूमन फौज के खिलाफ बोलने की हिम्मत कोई नहीं करता, लेकिन एक कद्दावर नेता ने सीधे देश के आर्मी चीफ आसिम मुनीर खुली चुनौती दे डाली है. तालिबान समर्थक और कट्टर शरिया कानून के पैरोकार माने जाने वाले मौलाना फजलुर रहमान ने फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. 

मौलाना ने बेहद आक्रामक अंदाज में सीधे आसिम मुनीर को ललकारते हुए कहा है कि 'अगर राजनीति करने का इतना ही शौक है, तो पहले अपनी वर्दी उतारो और चुनाव के मैदान में उतरकर दिखाओ. तब पता चलेगा कि वर्दीवालों को जनता कितने वोट देती है.'

पाकिस्तान में सेना के वर्चस्व को इस तरह की सीधी और खुली चुनौती मिलना बेहद दुर्लभ माना जाता है. जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (JUI-F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान के इस बयान ने पूरे पाकिस्तान के सियासी और सैन्य गलियारों में खलबली मचा दी है.

कौन हैं मौलाना फजलुर रहमान?

मौलाना फजलुर रहमान पाकिस्तान के कद्दावर देवबंदी मौलवी और राजनेता मुफ्ती महमूद के बेटे हैं. उनके पिता मुफ्ती महमूद 1970 के दशक में खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री रह चुके थे. पिता की मौत के बाद 1980 के दशक में फजलुर रहमान ने जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (JUI) की कमान संभाली. बाद में यह पार्टी दो धड़ों में बंट गई और मौलाना के नेतृत्व वाले धड़े को JUI-F के नाम से जाना गया. मौलाना फजलुर रहमान अब तक सात बार पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सदस्य चुने जा चुके हैं. खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के पश्तून इलाकों में उनकी पार्टी का जबरदस्त जमीनी आधार और मदरसों का एक बड़ा नेटवर्क है.

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तालिबान का करते हैं खुला समर्थन

मौलाना फजलुर रहमान को हमेशा से कट्टरपंथी और अफगान तालिबान का करीबी माना जाता रहा है. 90 के दशक से ही उनकी पार्टी तालिबान को वैचारिक समर्थन देती आई है. तालिबान के कई शीर्ष नेताओं ने पाकिस्तान में मौलाना की पार्टी से जुड़े मदरसों से ही मजहबी तालीम हासिल की है. साल 2021 में जब अफगानिस्तान में दोबारा तालिबान की सत्ता आई, तो मौलाना ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तालिबान सरकार को मान्यता देने की खुलकर मांग की थी. 

वे तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा से भी कई बार मुलाकात कर चुके हैं. इसके साथ ही, वे पाकिस्तान में पूरी तरह से शरिया कानून लागू करने के प्रबल समर्थक रहे हैं, हालांकि वे शरिया लागू करने के लिए हथियार उठाने या हिंसा करने के खिलाफ हैं.

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कभी आसिम मुनीर की राह आसान की थी, आज बने सबसे बड़े दुश्मन

ये बेहद दिलचस्प है कि जिस आसिम मुनीर को आज मौलाना फजलुर रहमान चुनौती दे रहे हैं, कभी उनकी सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने की राह मौलाना ने ही तैयार की थी. साल 2022 में इमरान खान की सरकार गिराने के लिए जो 'पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट' (PDM) नाम का विपक्षी गठबंधन बना था, मौलाना फजलुर रहमान उसके सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुने गए थे. मौलाना की अगुवाई में ही इमरान खान को प्रधानमंत्री पद से हटाया गया था. इमरान खान के हटने के बाद जब शहबाज शरीफ की सरकार बनी, तो उन्होंने आसिम मुनीर को सेना प्रमुख नियुक्त किया.

बाद में शहबाज सरकार से मतभेदों के चलते मौलाना ने खुद को गठबंधन से अलग कर लिया और स्वतंत्र विपक्ष की भूमिका में आ गए. इधर, आसिम मुनीर का कार्यकाल साल 2027 तक के लिए बढ़ा दिया गया और उन्हें फील्ड मार्शल के पद पर प्रमोट कर चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज बना दिया गया.

फौज पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- बलूचिस्तान हाथ से निकला

एक जनसभा को संबोधित करते हुए मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तानी सेना पर देश के राजनीतिक मामलों में हद से ज्यादा दखल देने का आरोप लगाया. उन्होंने बेहद तीखे शब्दों में कहा कि देश की सुरक्षा और रक्षा को छोड़कर सेना हर काम में लगी हुई है. 

मौलाना ने देश के सुरक्षा हालात पर चिंता जताते हुए दावा किया कि बलूचिस्तान प्रांत पूरी तरह से सरकार के नियंत्रण से बाहर हो चुका है. वहां विद्रोह इस कदर बढ़ चुका है कि पाकिस्तानी हुकूमत और कानून का कोई वजूद ही नहीं बचा है. इसके अलावा, उन्होंने अफगानिस्तान के अंदर घुसकर सैन्य कार्रवाई करने की सैन्य नीति की भी कड़ी आलोचना की है.

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Topics mentioned in this article
Pak Army Chief
Pak Army Chief Asim Munir
Maulana Fazlur Rehman