- ईरानी संगीतकार अली घमसारी दमावंद पावर प्लांट में बैठकर तार बजाकर शांति का संदेश फैला रहे हैं
- दमावंद पावर प्लांट ईरान का सबसे बड़ा पावर प्लांट है और आधे से ज्यादा तेहरान को बिजली देता है
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी दी है कि पावर प्लांट और पुलों को नष्ट कर दिया जाएगा
बम के धमाके, मिसाइलों की गड़गड़ाहट और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के बीच एक शख्स ऐसा भी है, जो दरी बिछाकर बैठा है और तार बजा रहा है. वह शख्स कोई और नहीं, बल्कि ईरानी सिंगर अली घमसारी हैं. अली घमसारी तेहरान में बने दमावंद पावर प्लांट में बैठे हैं. वह अपने तार के सुरों के जरिए शांति का संदेश फैला रहे हैं. उनका कहना है कि वह यहां बैठकर संगीत रचना चाहते हैं, ताकि ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले हमलों को रोकने में मदद मिल सके.
अली घमसारी ईरान के मशहूर 'तार' वादक और संगीतकार हैं. घमसारी सोमवार से ही यहां बैठे हैं. वह जिस दमावंद पावर प्लांट में बैठे हैं, वह ईरान का सबसे बड़ा पावर प्लांट है. आधे से ज्यादा तेहरान को बिजली यहीं से मिलती है.
उन्होंने यह फैसला तब लिया, जब ट्रंप की दी हुए डेडलाइन खत्म होने वाली है. ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोलता है और कोई डील नहीं करता है तो उसके सारे पावर प्लांट और पुलों को उड़ा दिया जाएगा. ट्रंप ने जब 'आज रात एक पूरी सभ्यता खत्म करने' की धमकी दी थी, तब भी घमसारी यहां बैठकर तार बजा रहे थे.
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अली घमसारी ने एक वीडियो जारी कर कहा, 'मैं अभी दमावंद पावर प्लांट में हूं. मैं ये नहीं कह सकता कि काश आप भी मेरे साथ यहां होते. क्योंकि यह वही जगह है जिस पर हमले की धमकी दी गई है और मुझे उम्मीद है कि ऐसा नहीं होगा. मुझे उम्मीद है कि मेरे 'तार' की आवाज शांति लेकर आएगी और घरों की बत्तियां बुझने से रोकने में मदद कर सकेगी.'
उन्होंने आगे कहा कि वह इस जगह पर एक कलाकार की हैसियत से रह रहे हैं और किसी राजनीतिक समूह का हिस्सा नहीं हैं. उन्होंने कहा, 'युद्ध का मकसद कभी भी बचाव करना नहीं होता. काश कि ज्यादातर लोग इस बात को समझ पाते.'
कौन हैं अली घमसारी?
अली घमसारी की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, उनका जन्म 19 सितंबर 1983 को तेहरान में हुआ था. बचपन से ही उन्हें संगीत में रुचि थी. उनका परिवार भी यही चाहता था. तेहरान के एक म्यूजिक स्कूल में उन्होंने 'तार' सीखना शुरू किया.
जब वह 17 साल के थे, तब उन्होंने 'सरमद' नाम से एक आर्केस्ट्रा बनाया था. इस आर्केस्ट्रा के जरिए उन्होंने कम उम्र में ही म्यूजिक कंपोज करना शुरू कर दिया था. इसके बाद उन्होंने तेहरान यूनिवर्सिटी से ईरानी वाद्ययंत्रों की पढ़ाई की. यूनिवर्सिटी आने के बाद उन्होंने अपना पहला एल्बम 'नग्श खियाल' रिलीज किया, जिसे ईरान के मशहूर सिंगर होमायून शाजारियन ने गाया था. इसके बाद होमायून शाजारियन की आवाज में उन्होंने 2005 में 'अब नान आवाज' और 2009 में 'चे अताश्हा' एल्बम लॉन्च किया.
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दुनियाभर में कर चुके हैं शो
अली घमसारी ने अपने तीन दशकों के करियर में दर्जनों एल्बम लॉन्च किए हैं और कई मशहूर ईरानी गायकों के साथ काम किया है.
17 साल की उम्र से ही उन्होंने देश-विदेश में शो करना शुरू कर दिया था. उन्होने अमेरिका, यूरोप और अफ्रीकी देशों में शो किए हैं. इनमें से ज्यादातर में उनकी सोलो परफॉर्मेंस थी.
इसके अलावा, उन्होंने देश-विदेशों में कई मशहूर कलाकारों के साथ भी परफॉर्म किया है. उन्होंने अरब के ऊद वादक नासिर शम्माह, यूरोप में लुसिएन खाचत्रयान, तुर्की में आयताच डोगन, अमेरिका में करेन ब्रिग्स, यूक्रेन में स्टास ट्यून्स, नीदरलैंड में विंड आर्केस्ट्रा और ट्यूनीशिया में दरसेफ हमेदानी के साथ शो किए हैं.
अली घमसारी संगीत पर दो किताबें भी लिख चुके हैं. उनका मकसद ईरानी संगीत को दुनियाभर में फैलाना है. उनका मानना है कि 'सर्फिंग के बजाय डाइविंग करना' चाहिए.
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