भारत के रिसर्च और इनोवेशन को मिलेगी 'होराइजन' ताकत, जानिए कौन सी डील पर चल रही बात

फिलहाल, 22 गैर-यूरोपीय संघ देश होराइजन यूरोप से जुड़े हुए हैं, जिनमें, अल्बानिया, आर्मेनिया, बोस्निया और हर्जेगोविना, कनाडा, मिस्र, फैरो द्वीप समूह, जॉर्जिया, आइसलैंड, इजरायल, कोरिया, कोसोवो, मोल्दोवा, मोंटेनेग्रो, न्यूजीलैंड, उत्तरी मैसेडोनिया, नॉर्वे, सर्बिया, स्विट्ज़रलैंड, तुर्की, ट्यूनीशिया, यूक्रेन और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं.

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भारत होराइजन यूरोप में शामिल होता है तो इससे भारत के रिसर्चर्स को काफी फायदा होगा.
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  • अमेरिका और चीन ने रिसर्च और इनोवेशन में निवेश करके वैश्विक स्तर पर अपनी ताकत और प्रभाव को बढ़ाया है
  • यूरोपीय संघ का होराइजन यूरोप फंडिंग प्रोग्राम रिसर्च सहयोग के लिए 95.5 अरब यूरो का बजट रखता है
  • भारत होराइजन यूरोप से जुड़ने पर सीधे यूरोपीय आयोग से ग्रांट पाएगा और वैश्विक अनुसंधान में नेतृत्व कर सकेगा
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यूरोपीय संघ के रिसर्च और इनोवेशन का एक फंडिंग प्रोग्राम है. नाम है इसका होराइजन यूरोप. इसका 2021-2027 तक का बजट 95.5 अरब यूरो है. भारत अब इसी से जुड़ने के लिए यूरोपीय संघ से बातचीत शुरू कर चुका है. ANI के अनुसार, यूरोपीय संघ की स्टार्टअप, रिसर्च और इनोवेशन कमिश्नर एकातेरिना जाहारिएवा ने कहा, "साइंस तभी सबसे अच्छा काम करता है, जब सीमाएं विचारों के आड़े न आएं. होराइजन यूरोप के साथ भारत के सहयोग की संभावनाओं का पता लगाना प्रतिभा, महत्वाकांक्षा और विश्वास को जोड़ने और वैश्विक स्तर पर मिलकर समाधान विकसित करने के बारे में है."

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भारत को क्या फायदा होगा?

यह बातचीत 16वें यूरोपीय संघ-भारत शिखर सम्मेलन के बाद हो रही है. यूरोपीय संघ के 95.5 अरब यूरो के प्रमुख रिसर्च और इनोवेशन कार्यक्रम होराइजन यूरोप से जुड़ने के बाद भारत को सभी गैर-यूरोपीय संघ देशों से ज्यादा सहयोग मिलेगा. फिलहाल, भारत को-फंडिंग मैकेनिज्म (सीएफएम) के तहत काम करता है. इस व्यवस्था में, भारतीय रिसर्चर यूरोपीय संघ की परियोजनाओं में शामिल तो हो सकते हैं, लेकिन उन्हें अपनी फंडिंग के लिए भारतीय मंत्रालयों (जैसे पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय) से पैसे मांगने पड़ते हैं. कई बार रिसर्च करने वालों को फंड भी नहीं मिलता या उसमें काफी देर होती है. इससे कई रिसर्च और इनोवेशन कागजों में प्लान या एक सोच के रूप में रह जाते हैं.

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यदि नया "एसोसिएशन" समझौता अंतिम रूप ले लेता है, तो भारत में रिसर्च और इनोवेशन का माहौल एकदम से बदल जाएगा. भारतीय संस्थानों को यूरोपीय आयोग से सीधे ग्रांट मिलेंगे. भारतीय वैज्ञानिक अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान संघों का नेतृत्व और समन्वय कर सकेंगे, और भारत कार्यक्रम के बजट में उचित वित्तीय योगदान के बदले यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के समान शर्तों पर कार्यक्रम में भाग ले सकेगा.

2030 का एजेंडा और भारत

2030 की ओर यूरोपीय संघ-भारत के संयुक्त व्यापक रणनीतिक एजेंडा में रिसर्च और इनोवेशन को रणनीतिक साझेदारी के केंद्र में रखा गया है और इसमें होराइजन यूरोप एसोसिएशन पर प्रारंभिक वार्ता शुरू करना एक ठोस उपलब्धि के रूप में शामिल है. हाल के वर्षों में, यूरोपीय संघ-भारत व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी) के माध्यम से इस सहयोग को और भी मजबूती मिली है. कमिश्नर एकातेरिना जाहारिएवा की पिछले वर्ष की भारत यात्रा (जिसमें टीटीसी के संदर्भ में हुए आदान-प्रदान भी शामिल थे) ने साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और दोनों पक्षों के रिसर्च और इनोवेशन फ्रेमवर्क प्रोग्राम के बीच संबंधों को सुदृढ़ करने में मदद की.

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यूरोपीय संघ के रिसर्च और इनोवेशन के लिए फ्रेमवर्क कार्यक्रम से जुड़ाव, यूरोपीय संघ और किसी गैर-यूरोपीय संघ देश के बीच विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का सबसे करीबी रूप है. वर्तमान में, 22 गैर-यूरोपीय संघ देश होराइजन यूरोप से जुड़े हुए हैं: अल्बानिया, आर्मेनिया, बोस्निया और हर्जेगोविना, कनाडा, मिस्र, फैरो द्वीप समूह, जॉर्जिया, आइसलैंड, इजरायल, कोरिया, कोसोवो, मोल्दोवा, मोंटेनेग्रो, न्यूजीलैंड, उत्तरी मैसेडोनिया, नॉर्वे, सर्बिया, स्विट्ज़रलैंड, तुर्की, ट्यूनीशिया, यूक्रेन और यूनाइटेड किंगडम.

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