- चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मिडिल ईस्ट में शांति के लिए चार सूत्रीय योजना पेश की है
- इसमें देशों की संप्रभुता का सम्मान और संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया गया है
- होर्मुज की अमेरिकी नाकाबंदी की चीन ने निंदा करते हुए इसे खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना बताया है
एक तरफ अमेरिका और ईरान को फिर से वार्ता की मेज पर लाने के प्रयास चल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मिडिल ईस्ट में शांति के लिए 4 सूत्रीय प्लान पेश किया है. चीन की शिन्हुआ न्यूज एजेंसी के मुताबिक, शी जिनपिंग ने मंगलवार को अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ हुई बैठक के दौरान यह प्रस्ताव साझा किया.
क्या है चीन का 4 सूत्रीय प्लान?
- शांतिपूर्ण सह अस्तित्व: मिडिल ईस्ट और खाड़ी देशों के बीच आपसी संबंधों में सुधार और एक स्थायी सुरक्षा ढांचा तैयार करना.
- संप्रभुता का सम्मान: देशों की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान हो और सीमाई संप्रभुता का उल्लंघन न किया जाए.
- संयुक्त राष्ट्र की भूमिका: अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाए रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखा जाए ताकि दुनिया को अराजकता से बचाया जा सके.
- विकास और सुरक्षा: सभी देश सुरक्षा के साथ-साथ संयुक्त विकास पर भी फोकस करें, जिसमें चीन अपने अनुभव साझा करने को तैयार है.
अमेरिकी नाकाबंदी की निंदा की
चीन ने इसके अलावा अमेरिका द्वारा होर्मुज की नाकाबंदी करने के ऐलान की कड़ी निंदा की है. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों को डुबोने की अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की धमकी को खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना करार दिया है.
कहा, अमेरिकी कार्रवाई से तनाव बढ़ेगा
चीनी प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका की इस कार्रवाई से इलाके में तनाव और टकराव बढ़ेगा. अमेरिका ने सैन्य गतिविधियां बढ़ाकर टारगेटेड नाकेबंदी की है, जिससे सीजफायर समझौते पर असर पड़ सकता है. चीन ने आगाह किया कि इस कदम से होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है.
अमेरिका ने तैनात किए युद्धपोत
होर्मुज की नाकाबंदी को लेकर ट्रंप ने कहा था कि वहां से गुजरने वाले सभी जहाजों की ब्लॉक किया जाएगा. अमेरिका ने इसके लिए फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और अरब सागर के अहम हिस्सों में 16 से अधिक युद्धपोत तैनात किए हैं. इनमें विमान वाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और 11 अत्याधुनिक डिस्ट्रॉयर युद्धपोत शामिल हैं.
इससे पहले अमेरिका-इजरायल के 28 फरवरी को अचानक हमला किए जाने के बाद से ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही रोक रखी है. सिर्फ चीन जैसे कुछ चुनिंदा मित्र देशों के जहाजों को ही छूट दी है. भारत में ईरानी राजदूत मोहम्मद फथाली ने कहा है कि भारत उन 5 देशों में शामिल है जो हमारे सच्चे दोस्त हैं. होर्मुज से गुजरने वाले उसके टैंकरों से कोई टोल नहीं लिया जा रहा है.
देखें- क्यों विफल हुई अमेरिका-ईरान की बातचीत, अब पश्चिम एशिया की राजनीति किस दिशा में जाएगी














