- अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिकी नौसेना का जंगी बेड़ा ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिए खाड़ी की ओर बढ़ रहा है
- ट्रंप ने ईरान में विरोध प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया लेकिन बाद में सैन्य कार्रवाई की धमकी से पीछे हट गए
- ईरान ने अमेरिकी और इजरायली समर्थन वाले हमलों के जवाब में चेतावनी दी है कि उनकी फोर्स उंगली ट्रिगर पर है
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आखिर ईरान में करना क्या चाहते हैं? क्या वह ईरान पर हमला करके वहां सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की सरकार का तख्तापलट करेंगे या फिर वहां की जनता को उनकी हाल पर छोड़ देंगे, जैसा करने का आरोप उनपर लगा है. कुल मिलाकर ईरान को लेकर ट्रंप का एंडगेम क्या है? ट्रंप के बयानों में अगर इन सवालों का जवाब खोजने निकलेंगे तो एक भूलभुलैया के सिवा और कुछ न मिलेगा. ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की 'सनक' के आगे ईरान को लगभग भूल गए राष्ट्रपति ट्रंप ने अब गुरुवार, 22 जनवरी को कहा है कि अमेरिकी नौसेना अपने जंगी जहाजों के जखीरे के साथ (आर्मडा) ईरान पर दबाव बनाए रखते हुए खाड़ी की ओर बढ़ रहा है. वहीं दूसरी ओर ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि उसकी उंगली ट्रिगर पर ही है.
"ईरान की ओर बढ़ रहे अमेरिका के जंगी जहाज"- ट्रंप
पहले क्रोनोलॉजी समझिए. पहले ईरान के लोगों को ट्रंप ने कहा कि आप जमकर विरोध प्रदर्शन कीजिए, अगर ईरानी सरकार कोई हिंसा करती है तो हमारी सेना तैयार है. लोग सड़क पर उतर आए और हजारों की मौत हो गई. हालांकि पिछले हफ्ते व्हाइट हाउस ने कहा कि तेहरान में बैठी इस्लामी सरकार ने प्रदर्शनकारियों की होने जा रही फांसी को रोक दिया है. इसके बाद ट्रंप ने ईरान पर हमला करने की धमकी से कदम पीछे खींच लिए.
अब फिर ट्रंप ईरान पर स्टैंड बदलते दिख रहे हैं. अब रिपब्लिकन राष्ट्रपति ने गुरुवार को ईरान के आसपास अमेरिका की सैन्य तैयारी जारी रखने की पुष्टि की. अमेरिकी मीडिया ने पिछले हफ्ते ही रिपोर्ट दी है कि यूएसएस अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को दक्षिण चीन सागर से लेकर मिडिल ईस्ट तक युद्धाभ्यास का आदेश दिया गया था.
स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से वापस लौटते समय ट्रंप ने एयर फोर्स वन पर रिपोर्टरों से कहा, "हम ईरान पर नजर रख रहे हैं." राष्ट्रपति ने कहा, "आप जानते हैं कि हमारे पास उस दिशा में जाने वाले बहुत सारे जहाज हैं... हमारे पास ईरान की ओर जा रही एक बड़ी फोर्स है. मैं कुछ भी घटित होते हुए नहीं देखना चाहता लेकिन हम उन पर बहुत करीब से नजर रख रहे हैं." उन्होंने ईरान की ओर जा रही फोर्स को "एक आर्मडा" और "विशाल बेड़ा" के रूप में बताया है. लेकिन साथ ही कहा, "शायद हमें इसका उपयोग नहीं करना पड़ेगा."
न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार दो अमेरिकी अधिकारियों ने गुरुवार को कहा कि एक अमेरिकी सैन्य विमान वाहक स्ट्राइक ग्रुप और अन्य सैन्य ऐसेट आने वाले दिनों में मिडिल ईस्ट क्षेत्र में पहुंचेंगी.
ईरान की धमकी
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर ने गुरुवार को वाशिंगटन को चेतावनी दी कि बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर उसकी फोर्स की 'उंगली ट्रिगर पर' है. ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को कमजोर करने के उद्देश्य से जून में इजरायल के 12 दिवसीय युद्ध में वाशिंगटन के समर्थन दिया था. उनसे तीन परमाणु ठिकानों पर हमला किया था. और उसके बाद से ही ट्रंप ने बार-बार ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला रखा है.
अब गार्ड्स कमांडर जनरल मोहम्मद पाकपौर ने इजरायल और अमेरिका को चेतावनी दी कि "ऐतिहासिक अनुभवों और 12-दिवसीय थोपे गए युद्ध में उन्होंने जो सीखा, उससे सीख लेकर किसी भी गलत अनुमान से बचें, ताकि उन्हें अधिक दर्दनाक और अफसोसजनक भाग्य का सामना न करना पड़े". उन्होंने सुप्रीम लीडर खामेनेई के बारे में कहा, "इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स और प्रिय ईरान की उंगली ट्रिगर पर है, वे पहले से कहीं अधिक तैयार हैं, सुप्रीम कमांडर-इन-चीफ के आदेशों और उपायों को पूरा करने के लिए तैयार हैं - एक ऐसा नेता जो अपने जीवन से भी अधिक प्रिय है."
ईरान के लिए ट्रंप का एंडगेम क्या है?
विरोध प्रदर्शनों में हुई मौतों का अपना पहला आधिकारिक आंकड़ा देते हुए, ईरानी अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि इसमें 3,117 लोग मारे गए हैं. हालांकि कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार एजेंसियों ने कहा है कि प्रदर्शनों को दबाने के लिए सुप्रीम लीडर की इस्लामिक सरकार की तरफ से की गई कार्रवाई के कारण मरने वालों का सही आकंड़ा इससे कई गुना अधिक हो सकता है. मौतों का आंकड़ा 25 हजार तक जा सकता है.
ऐसे में एक बड़ी सच्चाई यह भी है कि ईरान की विद्रोही जनता को लग रहा है कि ट्रंप ने उन्हें धोखा दे दिया है. जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि ईरान में प्रदर्शनकारियों के लिए "मदद आने वाली है", तो उन्होंने इस पर विश्वास किया. उनकी उम्मीदें तब और बढ़ गईं जब खबर आई कि कुछ अमेरिकी सैनिकों को मिडिल के सैन्य ठिकानों को छोड़ने के लिए कहा गया था, इस कदम को लड़ाई की तैयारी के रूप में देखा गया था. लेकिन फिर अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपना रुख पलट दिया. अब जब विद्रोह पूरी तरह शांत हो गया है तब ट्रंप हिंट दे रहे हैं कि उन्होंने हमले का विकल्प अभी भी खुला रखा है.
ट्रंप ने दावोस में CNBC को इंटरव्यू दिया था. इसमें ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि ईरान में आगे अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की कोई आवश्यकता नहीं होगी क्योंकि ईरानी सरकार घरेलू विरोध का जवाब दे रही है. राष्ट्रपति ने ऐसी कार्रवाई से इंकार करते हुए कहा, "हमें उम्मीद है कि आगे कोई कार्रवाई नहीं होगी." तो अभी के लिए यही लगता है कि ट्रंप ने ईरान के लोगों को अपने हाल पर छोड़ दिया है.













