- ट्रंप की चीन यात्रा 9 सालों में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की पहली यात्रा थी, हालांकि इस बार इसे कमतर माना गया
- ट्रंप और शी जिनपिंग ने होर्मुज को खुला रखने पर सहमति व्यक्त की और शी को व्हाइट हाउस में आमंत्रण दिया
- ताइवान मुद्दे पर शी जिनपिंग ने अमेरिका को चेतावनी दी, जबकि ट्रंप ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शुक्रवार को चीन की अपनी तीन दिवसीय यात्रा पूरी कर बीजिंग से रवाना हो गए. इस दौरान उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ ईरान युद्ध और व्यापार सहित कई मुद्दों पर कई दौर की बातचीत की. हालांकि ईरान, ताइवान और अन्य मुद्दों पर दोनों नेताओं के बीच गहरे मतभेद बने हुए हैं. यह नौ सालों में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की चीन की पहली यात्रा थी. ट्रंप खुद 2017 में चीन की यात्रा करने वाले आखिरी अमेरिकी राष्ट्रपति थे. लेकिन कूटनीतिक हलकों में पिछली बार की तुलना में इस यात्रा को 'कमतर' माना जा रहा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास और कार्यालय ‘व्हाइट हाउस' द्वारा जारी दोनों नेताओं की बैठक के ब्योरे के अनुसार, दोनों देश इस बात पर सहमत हुए कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहना चाहिए. वहीं ट्रंप ने शी और उनकी पत्नी को 24 सितंबर को ‘व्हाइट हाउस' में आमंत्रित भी किया है.
डिप्लोमैटिक 'डाउनग्रेड'
ट्रंप की इस यात्रा को कूटनीतिक हलकों में 2017 की तुलना में 'कमतर' माना जा रहा है. उन्हें रिसीव करने के लिए चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग आए, जिनके पास नीति निर्धारण की कोई वास्तविक शक्ति नहीं है. यह संकेत है कि चीन अब अमेरिका को पहले जैसी तवज्जो नहीं दे रहा है.
दबदबे की जंग
जिनपिंग ने ट्रंप के सामने प्राचीन यूनानी दर्शन 'थ्यूसिडाइड्स ट्रैप' का जिक्र किया. इसके जरिए उन्होंने साफ संदेश दिया कि चीन अब एक स्थापित महाशक्ति (अमेरिका) को चुनौती देने वाली उभरती हुई ताकत है और अमेरिका को इस सच्चाई को स्वीकार करना होगा.
ताइवान पर 'आग और पानी' की धमकी
ताइवान मुद्दे पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का रुख बेहद कड़ा रहा. उन्होंने इसे 'शांति बनाम आजादी' की लड़ाई बताते हुए अमेरिका को स्पष्ट चेतावनी दी कि गलत कदम दोनों देशों को युद्ध (Collision) की ओर ले जा सकता है. इस मुद्दे पर ट्रंप की 'खामोशी' विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है.
डील मेकर का फीका पड़ता जादू
डोनाल्ड ट्रंप को 500 बोइंग विमानों के ऑर्डर की उम्मीद थी, लेकिन चीन ने केवल 200 जेट्स का सौदा किया. यह दर्शाता है कि व्यापारिक शर्तों पर अब चीन की पकड़ मजबूत है और वह अपनी मर्जी से सौदे की मात्रा तय कर रहा है.
बैकफुट पर अमेरिका
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप अब 'रिस्क मैनेजमेंट' मोड में हैं. अमेरिकी तकनीक और रक्षा उद्योग के लिए जरूरी 'रेयर अर्थ मिनरल्स' पर चीन का 90% कब्जा है, जिसके कारण ट्रंप को अपने कड़े तेवर ढीले करने पड़े हैं.
ईरान पर सीमित सहमति
ईरान मुद्दे पर कोई बड़ी या ठोस डील नहीं हो सकी. दोनों पक्ष केवल इस बात पर सहमत हुए कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए, लेकिन क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए कोई प्रभावी रोडमैप सामने नहीं आया.
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