अमेरिका पर भारी पड़ रहा ईरान? धड़ाधड़ गिर रहे विमान, नाटो से टकराव और सेना में बिखराव, जानें कैसे घिरते जा रहे ट्रंप

अमेरिका के कई वरिष्ठ अधिकारियों को पद से हटाया गया है, क्योंकि युद्ध रणनीति पर असंतोष बढ़ रहा है. नाटो के सहयोग से पीछे हटने के कारण अमेरिका कूटनीतिक रूप से कमजोर हुआ है.

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अमेरिका-इजरायल और ईरान जंग में अब पासा पलटता हुआ नजर आ रहा है. हालात ये हैं कि कल तक जो अमेरिका अपनी ताकत के मुगालते में था, आज उसके खेमे में खलबली मची है. ईरान की जिद और उसकी सामरिक घेराबंदी ने ट्रंप प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं. आसमान से गिरते जंगी विमान और पेंटागन में अफसरों की बर्खास्तगी इस बात की गवाही दे रही है कि मोर्चा अब ईरान के हक में झुकता जा रहा है. पिछले कुछ दिनों में जो खबरें आई हैं वह सुपरपावर अमेरिका की गिरती साख की ओर इशारा करती है.

नाटो जैसे पुराने सहयोगियों ने अमेरिका का साथ देने से लगभग पल्ला झाड़ लिया है. वहीं, अमेरिका के अंदरूनी सियासत में भी भूचाल आया हुआ है. अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब ईरान के साथ जंग पर नरम रुख अपनाते नजर आ रहे हैं. ट्रंप अब डील यानी ईरान के साथ समझौते की बात ज्यादा करते दिख रहे हैं. लेकिन ईरान ने किसी भी तरह के समझौते से साफ इनकार कर दिया है.

ईरान क्या अब भारी पड़ रहा है?

जंग में लगातार ईरान से रणनीतिक चोट खाने के बाद अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने अपनी एक गोपनीय रिपोर्ट में कहा है कि ईरान की होर्मुज स्ट्रेट पर पकड़ को कमजोर करना फिलहाल नामुमकिन है.

खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान ने इस इलाके को इतनी मजबूती से जकड़ रखा है कि उसे वहां से बेदखल करने की कोई भी कोशिश अमेरिका के लिए आत्मघाती साबित हो सकती है.

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने एक तरह से होर्मुज के मोर्चे पर अपने हथियार डाल दिए हैं. खुफिया विभाग की चेतावनी ने ट्रंप प्रशासन की नींद उड़ा दी है, क्योंकि इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि ईरान इस अहम समुद्री रास्ते पर अपनी पकड़ इतनी जल्द ढीली करने वाला नहीं है. 

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ईरान की सैन्य ताकत पूरी तरह खत्म करना मुश्किल

जंग के इन पांच हफ्तों ने एक बात साफ कर दी है कि ईरान की सैन्य ताकत को पूरी तरह नेस्तनाबूद करना बहुत टेढ़ी खीर है. खुफिया रिपोर्ट में यह भी माना गया है कि ईरान ने अपनी मिसाइल टेक्नोलॉजी और ड्रोन क्षमता को इस कदर बढ़ा लिया है कि उन्हें एक झटके में खत्म करना मुमकिन नहीं है.

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अमेरिकी अफसरों का मानना है कि ईरान ने अपने हथियारों का जखीरा पहाड़ों के नीचे और घनी आबादी वाले इलाकों में कुछ इस तरह छिपा रखा है कि भारी बमबारी के बावजूद उसकी मारक क्षमता बरकरार रहेगी.

कई आला अफसरों की हुई छुट्टी

यही वजह है कि अब अमेरिका भारी असंतोष देखा जा रहा है. कई आला अफसरों को उनके पदों से हटाया जा चुका है क्योंकि वे इस युद्ध की रणनीति पर सवाल उठा रहे थे. बीते दिनों ट्रंप प्रशासन ने जंग की इस नाजुक घड़ी में अमेरिकी आर्मी चीफ रैंडी जॉर्ज को जबरन रिटायर कर दिया.

विमानों का गिरना और तकनीकी नाकामियां ये बता रही हैं कि अमेरिकी इस युद्ध में पिछड़ता जा रहा है और ट्रंप के शुरुआती दावे अब पस्त पड़ रहे हैं. उधर, नाटो देशों का पीछे हटना अमेरिका के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका है. इस वजह से अमेरिका जंग के मैदान में अलग-थलग सा पड़ गया है.

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