US इंटेलिजेंस की चेतावनी: ईरान से ‘लगातार खतरा’, व्हाइट हाउस ने क्यों कम आंका?

20 मार्च की इंटेलिजेंस रिपोर्ट में FBI और अन्य एजेंसियों ने साफ कहा कि ईरान की सरकार अमेरिका के भीतर एक 'persistent threat' यानी लगातार बने रहने वाला खतरा है. एजेंसियों ने यह भी स्पष्ट किया कि आम अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ किसी बड़े पैमाने के खतरे के ठोस संकेत नहीं मिले हैं.

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नई दिल्ली:

अमेरिका और ईरान तनाव के बीच एक बड़ा खुलासा सामने आया है. Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, जहां एक तरफ अमेरिकी खुफिया एजेंसियां ईरान से 'लगातार खतरे' को लेकर अलर्ट जारी कर रही थीं, वहीं दूसरी तरफ व्हाइट हाउस सार्वजनिक तौर पर खतरे की आशंका को कम करके दिखा रहा था. यह विरोधाभास अब सुरक्षा और राजनीति, दोनों पर सवाल खड़े कर रहा है.

FBI की चेतावनी: ‘Persistent Threat' यानी लगातार खतरा

20 मार्च की इंटेलिजेंस रिपोर्ट में FBI और अन्य एजेंसियों ने साफ कहा कि ईरान की सरकार अमेरिका के भीतर एक 'persistent threat' यानी लगातार बने रहने वाला खतरा है. रिपोर्ट के अनुसार, संभावित निशाने में अमेरिकी सैन्य और सरकारी संस्थान, यहूदी और इजरायली संस्थाएं, और अमेरिका में रह रहे ईरानी असंतुष्ट शामिल हो सकते हैं. हालांकि, एजेंसियों ने यह भी स्पष्ट किया कि आम अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ किसी बड़े पैमाने के खतरे के ठोस संकेत नहीं मिले हैं.

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खतरे का पैटर्न: सीधे नहीं, ‘टारगेटेड' हमलों का डर

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जंग शुरू होने के बाद अमेरिका के भीतर 'physical threats' यानी सीधे हमलों की आशंका बढ़ सकती है, लेकिन ये हमले व्यापक नहीं बल्कि खास टारगेट्स पर केंद्रित हो सकते हैं. इसका मतलब है कि ईरान की रणनीति बड़े हमले की बजाय चुनिंदा ठिकानों या व्यक्तियों पर दबाव बनाने की हो सकती है.

व्हाइट हाउस का रुख: डर कम दिखाने की रणनीति?

इंटेलिजेंस अलर्ट के बावजूद व्हाइट हाउस ने सार्वजनिक तौर पर खतरे को ज्यादा तूल नहीं दिया. इसके पीछे वजह यह मानी जा रही है कि सरकार किसी तरह की घबराहट या पैनिक से बचना चाहती थी. अगर खतरे को खुलकर स्वीकार किया जाता, तो इसका असर न सिर्फ जनता पर, बल्कि बाजार और राजनीतिक माहौल पर भी पड़ सकता था.

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सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट: ‘विजिलेंट रहें'

रिपोर्ट में राज्य और स्थानीय कानून-व्यवस्था एजेंसियों को खास तौर पर सतर्क रहने की सलाह दी गई. उन्हें कहा गया कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या जानकारी को तुरंत फेडरल एजेंसियों के साथ साझा किया जाए. यानी भले ही खतरा 'बड़ा' न हो, लेकिन सुरक्षा ढांचे को हाई अलर्ट पर रखा गया था.

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खतरा अब भी मौजूद 

कुल मिलाकर तस्वीर यह बनती है कि अमेरिका के भीतर ईरान से खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, बल्कि वह एक नियंत्रित और टारगेटेड रूप में मौजूद है. एक तरफ इंटेलिजेंस एजेंसियां सतर्क हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार हालात को संतुलित तरीके से पेश कर रही है.