- अमेरिका ने भारत और EU के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर नाराजगी जताई है
- अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यूरोप इस तरह अपने ही खिलाफ रूसी जंग को फंड कर रहा है
- भारत और EU लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत पूरी कर आज उसकी औपचारिक घोषणा करने जा रहे हैं
भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) होने से पहले ही अमेरिका और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मिर्ची लग गई है. अमेरिका ने चेतावनी दी है कि भारत के साथ FTA पर हस्ताक्षर करके यूरोप अपने ही खिलाफ रूसी जंग को फंडिंग दे रहा है. अमेरिकी ट्रेजरी सचिव (वित्त मंत्री) स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यूरोप ने भले रूस के साथ अपने तेल खरीद को महत्वपूर्ण रूप से समाप्त कर दिया है, लेकिन अब वो भारत में रिफाइन हो रहे रूसी तेल उत्पादों को खरीदने की तैयारी में है और इस तरह अप्रत्यक्ष रूप से रूस-यूक्रेन युद्ध को वित्त पोषित (फंडिंग) कर रहे हैं.
बेसेंट की टिप्पणी तब आई जब भारत और यूरोपियन यूनियन ने अपने लंबे समय से पेंडिंग चल रहे मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत पूरी कर ली, और FTA डील की औपचारिक घोषणा मंगलवार को होने वाली है.
अमेरिका ने क्या कहा है?
अमेरिकी वित्त मंत्री बेसेंट ने इस मुद्दे को अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच बलिदान में असंतुलन के रूप में पेश किया है. उन्होंने तर्क दिया कि एक तरफ तो अमेरिका ने रूस के ऊर्जा व्यापार को अस्थिर करने के लिए दबाव डाला है, तो दूसरी तरफ यूरोप वैश्विक तेल व्यापार में खामियों से आर्थिक रूप से फायदा कमा रहा है. बता दें कि ट्रंप सरकार ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है, जिसमें दिल्ली की रूसी तेल खरीद पर 25 प्रतिशत टैरिफ भी शामिल है.
उन्होंने कहा, "और फिर से स्पष्ट होने के लिए, रूसी तेल भारत में जाता है, रिफाइन प्रोडक्ट बाहर आते हैं, और यूरोपीय यूनियन उस रिफाइन प्रोडक्ट को खरीदते हैं. वे अपने खिलाफ युद्ध को फंडिंग कर रहे हैं."













