वेनेजुएला पर आपदा भारत के लिए अवसर, 8300 करोड़ का बट्टा खाता हो सकता है सही

अधिकारियों का कहना है कि ओएनजीसी के पास गुजरात के तेल क्षेत्रों में काम करने वाले कई आधुनिक रिग और उपकरण मौजूद हैं. प्रतिबंध हटने के बाद, इन उपकरणों को तुरंत वेनेजुएला भेजा जा सकता है. आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन से इस क्षेत्र का उत्पादन बढ़कर 80,000 से 1,00,000 बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकता है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • वेनेजुएला में तेल क्षेत्र पर अमेरिका के नियंत्रण से भारत को लगभग एक अरब डॉलर के बकाये की वसूली में मदद मिलेगी
  • ओएनजीसी विदेश लिमिटेड के हिस्से वाले तेल क्षेत्र का उत्पादन प्रतिबंधों के कारण कम हो गया था
  • वेनेजुएला से तेल की आपूर्ति शुरू होने से भारत की रूस और मध्य-पूर्व देशों पर तेल निर्भरता कम होगी
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
नई दिल्ली:

वेनेजुएला में मचे बड़े उलटफेर और वहां के तेल क्षेत्र पर अमेरिका के नियंत्रण के बाद अब भारत के लिए बड़ी राहत की उम्मीद जगी है. विशेषज्ञों और उद्योग जगत के सूत्रों के अनुसार, इस बदलाव से न केवल भारत के लगभग 1 बिलियन डॉलर (करीब 8,300 करोड़ रुपये) के फंसे हुए बकाये की वसूली का रास्ता साफ होगा, बल्कि ठप पड़े तेल उत्पादन में भी तेजी आएगी.

भारत की प्रमुख विदेशी तेल उत्पादक कंपनी, ओएनजीसी विदेश लिमिटेड का वेनेजुएला के 'सैन क्रिस्टोबल' तेल क्षेत्र में 40% की हिस्सेदार है. अमेरिकी प्रतिबंधों और वेनेजुएला की खराब आर्थिक स्थिति के कारण ओवीएल (OVL) का लगभग 536 मिलियन डॉलर का लाभांश 2014 से अटका हुआ है. इसके बाद की अवधि के लिए भी इतनी ही राशि बकाया है, क्योंकि पूर्ववर्ती सरकार ने ऑडिट की अनुमति नहीं दी थी.

अब अमेरिकी देखरेख में तेल क्षेत्र का पुनर्गठन होने से भारत को यह बकाया राशि मिलने की प्रबल संभावना है.

गुजरात से वेनेजुएला जाएंगे तेल के कुएं खोदने वाले रिग

प्रतिबंधों के कारण सैन क्रिस्टोबल क्षेत्र का उत्पादन गिरकर महज 5,000-10,000 बैरल प्रतिदिन रह गया था. अधिकारियों का कहना है कि ओएनजीसी के पास गुजरात के तेल क्षेत्रों में काम करने वाले कई आधुनिक रिग और उपकरण मौजूद हैं. प्रतिबंध हटने के बाद, इन उपकरणों को तुरंत वेनेजुएला भेजा जा सकता है. आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन से इस क्षेत्र का उत्पादन बढ़कर 80,000 से 1,00,000 बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकता है.

भारतीय रिफाइनरियों को होगा सीधा फायदा

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है. रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंडियन ऑयल (IOC) और नायरा एनर्जी जैसी भारतीय रिफाइनरियां वेनेजुएला के 'भारी कच्चे तेल' को प्रोसेस करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई हैं.

  • रणनीतिक लाभ: वेनेजुएला से तेल की आपूर्ति शुरू होने से भारत की रूस और मध्य-पूर्व (Middle East) के देशों पर निर्भरता कम होगी.
  • चीन पर लगाम: अब तक वेनेजुएला के तेल पर चीन का दबदबा था, लेकिन अमेरिकी नियंत्रण के बाद भारत को बेहतर कीमतों और दीर्घकालिक अनुबंधों (Contracts) में प्राथमिकता मिल सकती है.

बाजार का नया समीकरण

विशेषज्ञों का मानना ​​है कि अमेरिका अब ओपेक (OPEC) देशों, विशेषकर सऊदी अरब पर अपनी निर्भरता खत्म करना चाहता है. वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार (303 बिलियन बैरल) है. यदि अमेरिका यहां उत्पादन बढ़ाने में सफल रहता है, तो वैश्विक तेल बाजार में कीमतों में स्थिरता आ सकती है, जिससे भारत जैसे उपभोक्ता देशों को महंगाई से राहत मिलेगी.

Advertisement

इसे भी पढ़ें: वेनेजुएला के बाद क्या अब कोलंबिया के राष्ट्रपति की है बारी? ट्रंप ने दे दी है खुली चेतावनी

Featured Video Of The Day
Bihar Politics: Tejashwi Yadav को मिली बड़ी जिम्मेदारी, बहन Rohini का तीखा हमला | Lalu Yadav | RJD