सीजफायर के बीच गाजा में मारे गए 10 फिलिस्तीनी, चेकपॉइंट को लेकर बहा खून; इजरायल क्या कह रहा?

इजरायल और हमास के बीच छह महीने पुराना युद्धविराम ट्रंप के कमजोर पीस प्लान की वजह से नाजुक बना हुआ है. इस वजह से कभी भी तनाव की लपटें उठ सकती हैं.

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गाजा में एक बार तबाही का मंजर छाया हुआ है. मध्य गाजा में हमास के सुरक्षाकर्मियों और इजरायल समर्थित एक स्थानीय फिलिस्तीनी मिलिशिया (सशस्त्र गुट) के बीच भीषण खूनी झड़प हुई है. इस हिंसा और उसके बाद हुए इजरायली हवाई हमलों में कम से कम 10 फिलिस्तीनियों की जान चली गई है.

यह घटना मगाजी शरणार्थी शिविर के पूर्वी इलाके में हुई. बीबीसी के अनुसार, मरने वालों में हमास के सुरक्षाकर्मी और मिलिशिया के सदस्य दोनों शामिल हो सकते हैं, हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि किसकी मौत ग्राउंड ऑपरेशन में हुई और किसकी इजरायली मिसाइलों से हुई है.

चेकपॉइंट को लेकर शुरू हुआ विवाद

मगाजी के पूर्व में उस समय तनाव फैल गया जब इजरायल समर्थित मिलिशिया के सदस्यों ने वहां अपना एक चेकपॉइंट (नाका) स्थापित कर दिया. इसे हमास ने चुनौती माना और उन्हें वहां से हटाने की कोशिश की. देखते ही देखते दोनों गुटों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई.

जैसे ही हमास के लड़ाकों ने मिलिशिया पर दबाव बनाया, इजरायली सेना इस संघर्ष में कूद पड़ी. बताया जा रहा है कि इजरायली ड्रोनों ने मिलिशिया की मदद के लिए तीन अलग-अलग स्थानों पर मौजूद हमास कर्मियों पर हवाई हमले किए. देइर अल-बला स्थित अल-अक्सा अस्पताल के प्रवक्ता ने पुष्टि की है कि अस्पताल में अब तक 10 शव लाए जा चुके हैं. जबकि दर्जनों घायल हैं. इनमें से कई की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है.

सीजफायर के बीच तनाव की उठती लपटें

इजरायल और हमास के बीच लगभग छह महीने पहले युद्धविराम पर सहमति बनी थी, लेकिन हकीकत में शांति कोसों दूर नजर आ रही है. दोनों ही पक्ष एक-दूसरे पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते रहे हैं.

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हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस युद्धविराम के बाद से अब तक इजरायली हमलों में कम से कम 723 फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं.

ट्रंप के पीस प्लान में क्या आ रही दिक्कत

वहीं, दूसरी ओर इजरायली सेना का कहना है कि इसी अवधि के दौरान फिलिस्तीनी समूहों के हमलों में उसके पांच सैनिकों की जान गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 20-सूत्रीय शांति प्लान के दूसरे चरण में पहुंचने के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा 'निहत्थे होने' की शर्त है.

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अमेरिका के नेतृत्व वाले 'बोर्ड ऑफ पीस' ने प्रस्ताव दिया है कि फिलिस्तीनी समूह अपने हथियार डाल दें, लेकिन हमास इसके लिए तैयार नहीं है.

पिछले हफ्ते काहिरा में हमास के एक प्रतिनिधिमंडल ने मिस्र, कतर और तुर्की के मध्यस्थों से मुलाकात की थी. इस बैठक में हथियारों को छोड़ने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई थी, लेकिन हमास के रुख ने साफ कर दिया है कि वह अपनी सैन्य ताकत कम करने के मूड में नहीं है.

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