क्या रूस का जासूस था एपस्टीन? नई फाइल्स में पुतिन का नाम 1,005 बार आया, जांच शुरू

दस्तावेजों से पता चलता है कि एपस्टीन की कुछ प्रमुख रूसी हस्तियों के साथ बातचीत अमेरिका-रूस संबंधों के एक संवेदनशील दौर में हुई थी.

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क्रेमलिन ने इस बात को खारिज कर दिया है कि एपस्टीन रूसी खुफिया एजेंसी का एजेंट था.
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  • एपस्टीन ने मॉस्को के साथ संबंध बनाए रखने और पुतिन तथा अन्य रूसी अधिकारियों से मिलने की इच्छा जताई थी
  • दस्तावेज़ों में रूस के राजदूत विटाली चुर्किन के साथ एपस्टीन के नियमित संपर्क और सहयोग के साक्ष्य मिले हैं
  • एपस्टीन के रूस के साथ संबंधों की जांच तेज हुई, जिससे उसके जासूसी करने की आशंका बढ़ी है
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अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी किए गए दिवंगत फाइनेंसर और यौन अपराध के दोषी जेफरी एपस्टीन से संबंधित 35 लाख पन्नों के पत्राचार में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का नाम 1,005 बार आया है. इस पत्राचार के जारी होने के बाद, एपस्टीन के मॉस्को के साथ कथित संबंधों की जांच फिर से तेज हो गई है. दस्तावेजों से पता चलता है कि एपस्टीन पुतिन से मुलाकात करना चाहता था. इसमें जासूसी एंगल भी है.

रूस से संबंध

2017 तक, संयुक्त राष्ट्र में रूस के राजदूत विटाली चुरकिन, मॉस्को से एपस्टीन के नियमित संपर्क सूत्र थे. न्याय विभाग द्वारा जारी दस्तावेजों से पता चलता है कि वे दोनों नियमित रूप से मिलते थे, और एपस्टीन ने चुरकिन के बेटे मैक्सिम को न्यूयॉर्क की एक वेल्थ मैनेजमेंट फर्म में नौकरी दिलाने में मदद करने की पेशकश भी की थी.

हालांकि, जून 2018 में उनकी मौत के लगभग एक साल बाद, एपस्टीन ने नॉर्वे के राजनेता थोरब्योर्न जगलैंड से संपर्क किया, जो उस समय यूरोप परिषद के महासचिव थे, और पुतिन के करीबी सहयोगी और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात का अनुरोध किया.

लावरोव और ट्रंप का जिक्र

24 जून, 2018 को एक ईमेल में, बदनाम फाइनेंसर ने लिखा, "मुझे लगता है कि आप पुतिन को सुझाव दे सकते हैं कि लावरोव मुझसे बात करके कुछ जानकारी हासिल कर सकते हैं. विटाली चुर्किन पहले ऐसा करते थे, लेकिन उनकी मौत हो गई?!"

जगलैंड ने जवाब दिया कि वह अगले सोमवार को लावरोव के सहायक से मिलेंगे और यह सुझाव देंगे.

एपस्टीन ने जवाब दिया, "चुर्किन बहुत अच्छे थे. हमारी बातचीत के बाद वह ट्रंप को समझ गए थे. यह मुश्किल नहीं है. उन्हें कुछ पाने के लिए मिलना होगा, बात इतनी ही सिंपल है."

जून 2018 में एक अन्य ईमेल में, जगलैंड ने एपस्टीन को बताया कि वह मॉस्को यात्रा के बाद पेरिस में उनके आवास पर रुकने की उम्मीद करते हैं, जहां उन्होंने पुतिन, लावरोव और तत्कालीन रूसी प्रधानमंत्री दिमित्री मेदवेदेव से मिलने की योजना बनाई थी.

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एपस्टीन ने जवाब दिया, “मुझे बस इस बात का अफसोस है कि मैं रूसियों से मिलने के लिए आपके साथ नहीं हूं.” 

दस्तावेजों से पता चलता है कि एपस्टीन की कुछ प्रमुख रूसी हस्तियों के साथ बातचीत अमेरिका-रूस संबंधों के एक संवेदनशील दौर में हुई थी—जब अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने रूस पर 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया था, जिसे डोनाल्ड ट्रंप ने जीता था.

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इजरायल के पीएम का जिक्र

उनकी पिछली बातचीत से पता चलता है कि 9 मई, 2013 को एपस्टीन ने इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री एहूद बराक को लिखा था कि जगलैंड 20 मई को “सोची में पुतिन से मिलने जा रहे हैं” और नॉर्वेजियन राजनेता ने पूछा था कि क्या एपस्टीन रूसी राष्ट्रपति से मिलने के लिए उपलब्ध होंगे ताकि यह समझाया जा सके कि रूस पश्चिमी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए किस प्रकार सौदे कर सकता है.

एपस्टीन ने बराक को भेजे अपने ईमेल में आगे लिखा, “मैं उनसे कभी नहीं मिला, मैं चाहता था कि आपको यह पता चले.”

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कुछ दिनों बाद, 14 मई 2013 को, जगलैंड ने एपस्टीन को बताया कि वह पुतिन को यह बताने की योजना बना रहे हैं कि एपस्टीन उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है. जगलैंड ने एपस्टीन को लिखा, “मेरा एक दोस्त है जो आपको आवश्यक कदम उठाने में मदद कर सकता है (और फिर आपको उनसे मिलवा सकता है) और यह पूछ सकता है कि क्या उन्हें आपसे मिलना अच्छा लगेगा.”

गेट्स का नाम

एपस्टीन ने जवाब दिया, “वह कुछ बड़ा करने की अनूठी स्थिति में हैं, जैसे स्पुतनिक ने स्पेस रेस के लिए किया था. आप उन्हें बता सकते हैं कि आप और मैं करीबी दोस्त हैं, और मैं गेट्स को सलाह देता हूं. यह गोपनीय है. मुझे उनसे मिलकर खुशी होगी, लेकिन कम से कम दो से तीन घंटे के लिए, इससे कम नहीं.”

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एक साल से अधिक समय बाद, जुलाई 2014 में, एपस्टीन ने एक ईमेल में संकेत दिया कि उनकी पुतिन के साथ एक बैठक तय है और उन्होंने लिंक्डइन के संस्थापक को भी इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है. उस समय एमआईटी मीडिया लैब के निदेशक जॉय इतो ने एपस्टीन को लिखा, “मैं रीड को अपना कार्यक्रम बदलने और आपके साथ पुतिन से मिलने के लिए राजी नहीं कर पाया. ;-)”

जासूस होने का शक

हालांकि एपस्टीन की रूस और पूर्वी यूरोप के अन्य हिस्सों से मॉडल खोजने में रुचि पहले से ही ज्ञात थी, लेकिन दस्तावेजों के नये खुलासे से पता चलता है कि इस बदनाम फाइनेंसर ने पुतिन सहित उच्च पदस्थ रूसी अधिकारियों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने की कोशिश की, जिससे इस सिद्धांत को बल मिला कि उसने मॉस्को के लिए जासूसी की होगी.

नये एपस्टीन फाइल्स देखने के बाद, पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने कहा कि उनका देश एपस्टीन के रूसी खुफिया एजेंसियों के साथ संभावित संबंधों की जांच शुरू करेगा. टस्क ने कहा, "वैश्विक प्रेस में मिल रहे लगातार सुराग, जानकारी और टिप्पणियां इस संदेह की ओर इशारा करती हैं कि बाल यौन शोषण का यह अभूतपूर्व घोटाला रूसी खुफिया सेवाओं द्वारा सह-आयोजित किया गया था."

रूस का जवाब

पिछले हफ्ते क्रेमलिन ने इस बात को खारिज कर दिया कि एपस्टीन रूसी खुफिया एजेंसी का एजेंट था. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा, "एपस्टीन के रूसी खुफिया सेवाओं के नियंत्रण में होने की बात को किसी भी तरह से लिया जा सकता है, लेकिन गंभीरता से नहीं." उन्होंने पत्रकारों से कहा, "मुझे इस बात पर कई चुटकुले सुनाने का मन कर रहा है, लेकिन आइए अपना समय बर्बाद न करें."

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