- अमेरिकी वायुसैनिक को ईरान में एफ-15ई स्ट्राइक ईगल जेट मार गिराए जाने के बाद पायलट को बचाया गया
- अमेरिकी पायलट ने दुश्मन इलाके में लगभग 48 घंटे केवल एक पिस्टल और SERE ट्रेनिंग का सहारा लेकर खुद को बचाया
- अमेरिकी सेना ने सीआईए की मदद से पायलट का स्थान पता लगा कर विशेष बल दल के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया
अमेरिका के हर सैनिक को ऐसी ट्रैनिंग दी जाती है, जो उन्हें मुश्किल से मुश्किल स्थिति के लिए तैयार करती है. दुश्मन के इलाके में अकेले, गोली लगने से घायल होना और पीछा किया जाना, इन सभी परिस्थितियों के लिए अमेरिकी सैनिकों को तैयार किया जाता है. ईरान में जंग के बीच शुक्रवार को एक अमेरिकी वायुसैनिक ने खुद को ठीक उसी स्थिति में पाया, जैसी उनको ट्रैनिंग दी जाती है. दिन 3 अप्रैल, दो इंजन और दो सीटों वाला एक इंटरडिक्शन फाइटर जेट, एफ-15ई स्ट्राइक ईगल, दक्षिण-पश्चिमी ईरान के ऊपर मार गिराया गया. विमान में सवार पायलट समय रहते एग्जिट हो गया. लेकिन वो जंग के बीच दुश्मन के इलाके में था और हाथ में थी सिर्फ एक पिस्टल. ईरानी सेना उसे तलाश रही थी. इधर, अमेरिका ने भी अपने वायुसैनिक को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया था.
रेस... फाइटर पायलट तक पहुंचने की
ईरानी और अमेरिकी दोनों सेना पायलट की तलाश कर रही थीं. ईरान ने तो अमेरिकी वायुसैनिक की गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी के लिए 60,000 डॉलर का इनाम भी घोषित किया और नागरिकों से रेस्क्यू ऑपरेशन में भाग लेने की अपील की. पायलट तक पहुंचने की जंग में जीत अमेरिका की हुई. दो दिन बाद अमेरिका ने अपने वायुसेना को ईरान से रेस्क्यू कर लिया. भारी गोलीबारी के बीच अमेरिकी सेना ईरान से अपने फाइटर पायलट को निकाल कर ले गई.
अमेरिका का सबसे डेरिंग रेस्क्यू ऑपरेशन
फाइटर पायलट, अमेरिकी वायुसेना के कर्नल को 48 घंटे बाद ईरान से सुरक्षित बचा लिया गया. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अमेरिकी इतिहास का सबसे डेरिंग रेस्क्यू ऑपरेशन बताया, जो भविष्य में एक बेहतरीन हॉलीवुड थ्रिलर फिल्म का प्लॉट बन सकता है. लेकिन दुश्मन के इलाके में लगभग 48 घंटे अकेले, पीछा किए जाने के बावजूद, हाथ में सिर्फ एक पिस्टल के साथ जिंदा रहना अपने आप में किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म की कहानी से कम नहीं है.
7000 फुट ऊंची पहाड़ी पर चढ़ा
ईरानी और अमेरिकी सेनाएं उस वायुसैनिक को खोजने में जुटी थीं. तभी वह एक पहाड़ के दर्रे में छिप गया, लगातार चलता रहा और एक समय तो वह अपने चारों ओर घेरा डाल रही सेनाओं से आगे रहने के लिए 7000 फुट ऊंची पहाड़ी पर चढ़ गया. एक हैंडगन और अपनी ट्रैनिंग के कारण 24 घंटे से अधिक समय तक उसका पता अमेरिका को भी नहीं चल पाया. फाइटर पायलट के पास एक कम्यूनिकेशन डिवाइस और एक ट्रैकिंग बीकन भी था. ट्रंप ने कहा, "यह बहादुर योद्धा ईरान के दुर्गम पहाड़ों में दुश्मन की सीमा के अंदर था और दुश्मन उसका पीछा कर रहे थे, जो हर घंटे उसके करीब आते जा रहे थे."
24 घंटे बाद अमेरिका को पता चला, कहां है- पायलट
अधिकारियों ने सीबीएस न्यूज़ को बताया कि पायलट ने पहाड़ों में अकेले 24 घंटे से अधिक समय बिताया. न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया कि सीआईए ने आखिरकार अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल करके पायलट के छिपने की जगह का पता लगा लिया. वह पहाड़ी इलाकों में घूम रहा था और स्थानीय लोगों से बच रहा था. जैसे ही उनके सटीक स्थान की पुष्टि हुई, सीआईए ने इसकी जानकारी व्हाइट हाउस, पेंटागन और अमेरिकी सेना के साथ साझा की और शनिवार रात को एक विशेष बल दल भेजा गया.
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रेस्क्यू किये गए फाइटर अधिकारी को चोटें आई थीं, लेकिन ट्रंप ने कहा कि वे "बिल्कुल ठीक हो जाएंगे." बचाव दल का कोई भी सदस्य मारा या घायल नहीं हुआ. ट्रंप ने इस अभियान को अमेरिकी सैन्य इतिहास को सबसे शानदार रेस्क्यू ऑपरेशन बताया, जिसमें पहली बार दो अमेरिकी पायलटों को दुश्मन के इलाके में अलग-अलग स्थानों से बचाया गया.
क्या है SERE ट्रैनिंग, जिससे बचा रहा पायलट
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, पायलट ने अपने सर्वाइवल, इवेज़न, रेजिस्टेंस और एस्केप प्रशिक्षण (SERE) का सहारा लिया और डेढ़ दिन तक पकड़े जाने से बचे रहे. यह ट्रैनिंग फाइटर पायलट को ठीक इसी तरह की स्थिति के लिए तैयार करने के लिए बनाया गया है. यह पायलटों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना, दुश्मन सेना से बचना, पकड़े जाने का विरोध करना और बचाव दल तक पहुंचने का प्रशिक्षण देता है. विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें केवल उपकरणों पर निर्भर रहने के बजाय अनुकूलन क्षमता और स्पष्ट निर्णय लेने पर जोर दिया जाता है. पायलटों को इजेक्शन सीट के नीचे एक सर्वाइवल किट और शरीर पर एक सर्वाइवल जैकेट दी जाती है, जिसमें रेडियो, हेलमेट और हथियार जैसी बेहद जरूरी चीजें होती हैं.
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