इधर कुआं उधर खाई, मिडिल ईस्ट के संकट में कैसे फंसी पाकिस्तान की गर्दन

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान इधर कुआं उधर खाई जैसी स्थिति में फंस गया है. सऊदी अरब से रक्षा समझौते और ईरान से रिश्तों के बीच संतुलन साधना इस्लामाबाद के लिए बड़ी चुनौती बन गया है.

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सऊदी रक्षा मंत्री से मुलाकात के दौरान मुनीर
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  • पाकिस्तान ईरान और अमेरिका दोनों को नाराज किए बिना सऊदी अरब के साथ अपने सैन्य समझौते को संभालने की कोशिश
  • सऊदी ने ईरान को तेल और गैस कुओं पर हमले के बाद कड़ी चेतावनी देते हुए जवाबी कार्रवाई की संभावना जताई है
  • खाड़ी देशों की बैठक में ईरान पर आम लोगों और तेल रिफाइनरी को निशाना बनाने का आरोप लगाया गया
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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान की गर्दन अजब तरह से फंस गई है. पाकिस्तान की हालत ये है कि वो न तो ईरान को नाराज करना चाहता और न ही अमेरिका की खिलाफत. सऊदी अरब से उसका सैन्य करार है और सऊदी अरब को बचाना उसकी जिम्मेदारी है. अब उसके सामने सवाल है कि वह इजरायल और ईरान में चल रहे टकराव में शामिल हो या नहीं? नतीजतन पाकिस्तान के लिए हालात इसलिए और गंभीर हो गए हैं, क्योंकि सऊदी अरब ने ईरान को कड़ी चेतावनी दे दी है.

ईरान को चेतावनी के बाद सऊदी अरब का सख्त रुख

सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान ने साफ कहा है कि अगर ईरान अपने हमले नहीं रोकता तो सऊदी अरब जवाबी कार्रवाई कर सकता है. दरअसल साउथ पार्स में अपने तेल और गैस कुओं पर हमले से बौखलाए ईरान ने सऊदी अरब और कतर सहित कई देशों के आर्थिक प्रतिष्ठानों पर हमले किए. इसके बाद रियाद में कई खाड़ी और इस्लामी देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई. इस बैठक में पाकिस्तान समेत कई देशों ने हिस्सा लिया. सभी देशों ने ईरान पर आरोप लगाया कि उसने मिसाइल और ड्रोन से सैन्य ठिकानों के बजाए आम लोगों और तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया.

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खाड़ी देशों की बैठक में ईरान पर हमलों का आरोप

बैठक में यह भी कहा गया कि हर देश को अपनी सुरक्षा का अधिकार है. साथ ही ईरान से अपील की गई कि वह तुरंत हमले रोके और बातचीत के जरिए समस्या का हल निकाले. सऊदी अरब ने बैठक के बाद और सख्त रुख दिखाया, उसने कहा कि अब वह किसी भी हमले को सहन नहीं करेगा. सऊदी ने जोर देकर कहा कि जरूरत पड़ने पर वह सेना का इस्तेमाल भी कर सकता सकता है. इसके अलावा ईरान पर यह आरोप भी लगाया गया कि वह अलग-अलग मिलिशिया समूहों को मदद देकर इलाके में अस्थिरता फैला रहा है.

सऊदी‑पाक रक्षा समझौते ने बढ़ाई इस्लामाबाद की मुश्किल

इस पूरे मामले में समुद्री सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई. खासतौर पर स्टेट ऑफ होर्मुज  जैसे अहम रास्ते  को लेकर जो दुनिया के तेल व्यापार के लिए बहुत जरूरी हैं. अब सबसे ज्यादा चर्चा पाकिस्तान की भूमिका को लेकर हो रही है. दरअसल सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच यह समझौता है कि अगर किसी एक देश पर हमला होता है, तो दूसरा देश उसकी मदद करेगा. यही वजह है कि पाकिस्तान के लिए स्थिति मुश्किल बन गई है. एक तरफ उसके सऊदी अरब से मजबूत रिश्ते हैं, तो दूसरी तरफ ईरान से भी उसके संबंध ठीक हैं.

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पाकिस्तान का रुख अब भी साफ नहीं, हालात नाजुक

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर हाल ही में सऊदी अरब गए थे. इन मुलाकातों के बाद अटकलें और तेज हो गई हैं कि पाकिस्तान किस तरफ जाएगा. हालांकि अभी तक पाकिस्तान ने कोई साफ सैन्य रुख नहीं अपनाया है. जानकारों का मानना है कि वह सीधे युद्ध में कूदने से बचना चाहेगा. कुल मिलाकर हालात काफी नाजुक बने हुए हैं. अगर सऊदी अरब और ईरान के बीच टकराव बढ़ता है, तो इसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ेगा और पाकिस्तान की भूमिका भी बेहद अहम हो सकती है.

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