ईरान के साथ सीजफायर में पाकिस्तान मध्यस्थ है या मोहरा? चीन-अमेरिका का एहसान चुका रहा पाक

अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम हुआ, जिसमें पाकिस्तान की मध्यस्थता विवादित मानी जा रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान चीन के दबाव में है और असली शांति चीन, ईरान और अमेरिका के बीच तय हुई.

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  • अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम में चीन की भूमिका अहम मानी जा रही.
  • पाकिस्तान ने मध्यस्थता की भूमिका निभाई, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि वह चीन के प्रभाव में है
  • पाकिस्तान चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव और कर्ज के कारण स्वतंत्र निर्णय लेने में असमर्थ है
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US Iran Ceasefire: अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है. इस शांति प्रक्रिया में पाकिस्तान जिस तरह से 'मध्यस्थ' बनकर उभरा है, उसने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं. पाकिस्तान अपनी इस भूमिका का जमकर क्रेडिट ले रहा है, लेकिन विशेषज्ञों की राय कुछ और ही है.

'फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज' (FDD) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और अमेरिकी ट्रेजरी के पूर्व एनालिस्ट जोनाथन श्नाइजर ने पाकिस्तान की इस भूमिका पर गंभीर संदेह जताते हुए पूछा है कि क्या पाकिस्तान वाकई शांति चाहता है या वह सिर्फ चीन के इशारों पर नाच रहा है?

चीन के कर्ज तले दबा पाकिस्तान

जोनाथन श्नाइजर का मानना है कि पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति उसे स्वतंत्र फैसले लेने की अनुमति नहीं देती है. पाकिस्तान, चीन के 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) और 'डेब्ट-ट्रैप डिप्लोमेसी' में बुरी तरह फंसा हुआ है.

श्नाइजर ने सवाल उठाया कि क्या पाकिस्तान अमेरिका के साथ नए गठबंधन बनाकर अपनी स्थिति सुधारना चाहता है या वह केवल चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के 'माउथपीस' के तौर पर काम कर रहा है.

ट्रंप ने आखिरकार चीन को ही दिया असली क्रेडिट

ट्रंप ने कहा है कि चीन ने आखिर वक्त में ईरान के पाकिस्तान की ओर से प्रस्तावित दो हफ्ते के सीजफायर प्रस्ताव मानने के लिए राजी किया. लेकिन श्नाइजर पाकिस्तान के इस रोल महज दिखावा मानते हैं. उनके मुताबिक, असली डील चीन, ईरान और अमेरिका ने करवाई है और पाकिस्तान बस चीन का माउथपीथ था.

क्या पर्दे के पीछे कोई और है?

इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की भूमिका भी चर्चा में है. रिपोर्टों के अनुसार, वेंस को इस मध्यस्थता प्रक्रिया की जानकारी काफी देरी से दी गई. श्नाइजर के मुताबिक, वेंस विदेशी हस्तक्षेप और सैन्य बल के इस्तेमाल के खिलाफ रहे हैं.

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भले ही दो हफ्ते के लिए बमबारी रुक गई हो, लेकिन श्नाइजर ने चेतावनी दी है कि युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि ईरान के भीतर सत्ता परिवर्तन की गुप्त कोशिशें जारी रह सकती हैं.

सबसे बड़ी चुनौती ईरान के 'प्रॉक्सी नेटवर्क' यानी हमास, हिजबुल्लाह और हूतियों की है. इन समूहों ने ही 2023 में संघर्ष शुरू किया था और जब तक इनका समाधान नहीं होता, शांति स्थायी नहीं हो सकती. अब गेंद इजरायल के पाले में है कि वह ईरान के इस नेटवर्क से कैसे निपटता है. 

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