- इमरान खान को जेल में उनकी बहनों और पार्टी नेताओं से मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही है.
- विपक्ष ने सरकार को चेतावनी दी है कि मुलाकात की अनुमति न देने पर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा.
- विपक्ष ने सरकार पर संसद को रबर स्टैंप बनाने और विपक्ष को गंभीर मुद्दों पर बोलने से रोकने का आरोप लगाया.
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के संस्थापक इमरान खान को लेकर चर्चा का बाजार गर्म है. परिवार का आरोप है कि उन्हें इमरान खान से मिलने नहीं दिया जा रहा है, यहां तक की कोर्ट के आदेश के बावजूद मुलाकात नहीं हो सकी है. ऐसे में इमरान खान की जेल में 'हत्या' किए जाने तक का अंदेशा जताया जा रहा है. अब विपक्षी गठबंधन ने सरकार को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है. साथ ही सरकार पर संसद को रबर स्टैंप की तरह चलाने का आरोप लगाया है.
विपक्षी गठबंधन ने सरकार से जेल में बंद इमरान खान को उनकी बहनों और पार्टी नेताओं से मिलने की अनुमति देने की मांग करते हुए अधिकारियों को चेतावनी दी कि अगर सरकार ने अपने तौर-तरीके नहीं बदले तो देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा.
विपक्ष के इमरान को लेकर सरकार से सवाल
उन्होंने सवाल किया कि इमरान खान को जेल में क्यों रखा गया है और उन्हें अपनी बहनों और पार्टी नेताओं से मिलने क्यों नहीं दिया जा रहा है. उन्होंने कहा, "खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री अदियाला जेल के बाहर बैठे हैं, लेकिन पीटीआई संस्थापक से मिलने के उनके अनुरोध पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है."
पाकिस्तानी अखबार डॉन की खबर के मुताबिक, पख्तूनख्वा मिल्ली अवामी पार्टी के अध्यक्ष महमूद अचकजई ने संसद भवन के बाहर अन्य विपक्षी नेताओं के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हमने सिंधियों, बलूचों, पश्तूनों और पंजाबियों को सरकार और उसकी नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरने से रोक दिया है, अन्यथा वे बाहर आकर शासकों के लिए समस्याएं खड़ी कर देते.
विपक्ष को बोलने की अनुमति नहीं देने का आरोप
साथ ही उन्होंने सरकार पर संसद को रबर स्टैंप बनाने का आरोप लगाया और कहा कि नेशनल असेंबली के स्पीकर अयाज सादिक कहीं और से हुक्म चला रहे हैं. उन्होंने कहा कि कबायली इलाकों में लोग मारे जा रहे हैं, फिर भी नेशनल असेंबली के स्पीकर विपक्ष को इस गंभीर मुद्दे पर बोलने की अनुमति नहीं दे रहे हैं.
पीटीआई नेता असद कैसर ने कहा कि हाल के उपचुनावों में लोकतंत्र को दफना दिया गया है. उन्होंने हरिपुर उपचुनाव के नतीजे बदलने का आरोप लगाया, जहां पूर्व विपक्षी नेता उमर अयूब की पत्नी चुनाव लड़ रही थीं. उन्होंने कहा कि फॉर्म 47 पर दिया गया नतीजा कंप्यूटर पर बदले गए नतीजे से अलग था.
बैरिस्टर गौहर ने कहा कि विपक्ष संसद और लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा बने रहना चाहता था, लेकिन उपचुनावों में कथित धांधली ने इसे मुश्किल बना दिया है. उन्होंने आगे कहा, "जहा तक मुझे पता है (इमरान खान) हमें अब संसद का हिस्सा नहीं बनने देंगे."
इमरान की बहन मुनीर पर जमकर बरसीं
इस बीच इमरान खान की बहन नोरीन नियाजी ने एनडीटीवी से एक्सक्लूसिव बात की और पाकिस्तान सरकार तथा जनरल मुनीर पर जमकर नाराजगी जताई. नोरीन नियाजी ने कहा कि ये पहली बार नहीं है, पिछले साल भी तीन हफ्तों तक उन्हें आइसोलेट कर दिया गया था. ये सरकार की सोची समझी साजिश है. बिना वजह के उन्हें कैद कर रखा है. वो चाहते हैं कि इमरान खान उनसे माफी मांगें, लेकिन इमरान ऐसा नहीं करेंगे. क्योंकि उन्होंने कोई जुर्म नहीं किया.
जेल के बाहर प्रदर्शन को लेकर इमरान खान की बहन ने कहा कि प्रशासन तो कोर्ट का आर्डर भी नहीं मानता है. ऐसे में हमारे पास कोई और रास्ता नहीं बचता है, सिवाए जनता के साथ प्रोटेस्ट के.
सनाउल्लाह का शर्तों के साथ मुलाकात का समर्थन
प्रधानमंत्री के राजनीतिक मामलों के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने शुक्रवार को जेल में बंद पीटीआई संस्थापक इमरान खान और उनके परिवार के सदस्यों के बीच कुछ शर्तों के साथ मुलाकातों का समर्थन किया है. जियो न्यूज के शो 'नया पाकिस्तान' में इस मामले पर बोलते हुए, सनाउल्लाह ने कहा, "मुलाकातों की अनुमति होनी चाहिए और वे जरूर होनी चाहिए, लेकिन एक घंटे की मुलाकात के बाद 90 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं हो सकती है, कोई भी कानून इसकी इजाजत नहीं देता है."
उन्होंने कहा कि इन बैठकों में राजनीतिक चर्चाएं भी नहीं हो सकतीं. उन्होंने कहा कि कोई भी कानून किसी कैदी को जेल से बाहर किसी आंदोलन का नेतृत्व, योजना और मार्गदर्शन करने की इजाजत नहीं देता है.
इससे पहले, बुधवार को रावलपिंडी के अदियाला जेल अधिकारियों ने कहा था कि पीटीआई संस्थापक को जेल से स्थानांतरित नहीं किया गया है और उनका स्वास्थ्य अच्छा है.
स्थानीय मीडिया ने शुक्रवार को बताया कि खान की बहन अलीमा ने इस्लामाबाद हाई कोर्ट के आदेश का पालन करने में विफल रहने पर अदियाला जेल अधीक्षक और अन्य के खिलाफ अदालत की अवमानना याचिका दायर की है, जिसमें पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक से सप्ताह में दो बार मुलाकात करने का निर्देश दिया गया था.













