- पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल सैयद आसिम मुनीर और शिया धर्मगुरुओं के बीच बंद कमरे में एकतरफा बातचीत हुई थी
- सेना प्रमुख ने कहा कि जिन्ना एक शिया थे और शिया समुदाय को ईरान छोड़ने की सलाह दी थी
- शिया विद्वानों ने जनरल आसिम मुनीर के अपमानजनक व्यवहार और संवाद न करने का आरोप लगाया
पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल सैयद आसिम मुनीर और शिया धर्मगुरुओं के बीच हुई कथित बातचीत ने पाकिस्तान में एक विवाद खड़ा कर दिया है. खबरों के मुताबिक एक बंद कमरे में हुई बैठक के बाद शिया विद्वानों ने सेना प्रमुख पर अपमानजनक व्यवहार का आरोप लगाया. जिन्ना की धार्मिक पहचान से लेकर ईरान के प्रति वफादारी तक, जनरल आसिम मुनीर के बयान ने पाकिस्तान के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है.
बंद कमरे में हुई बात, अकेले बोलते रहे मुनीर
रिपोर्ट्स के अनुसार, सेना प्रमुख और शिया उलेमा के सदस्यों के बीच एक बंद कमरे में बातचीत हुई थी. बैठक में मौजूद सूत्रों ने इस बातचीत को लगभग एक घंटे तक चलने वाला एकतरफा संबोधन बताया, जिसके दौरान धार्मिक विद्वानों को जवाब देने या अपनी चिंताएं उठाने का कोई अवसर नहीं दिया गया.
किस बयान पर बवाल?
यह विवाद बैठक के दौरान आसिम मुनीर के एक कथित बयान को लेकर है, जिसमें उन्होंने वहां मौजूद लोगों से कहा, 'मुझे बताया जाता है कि अगर आपको ईरान से इतनी मोहब्बत है, तो आप ईरान क्यों नहीं चले जाते? मैं आपको बता दूं कि जिन्ना एक शिया थे.' मिडिल ईस्ट में ईरान से जुड़े मौजूदा तनाव के बीच इस बयान पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं. बैठक में मौजूद लोगों ने आरोप लगाया कि सेना प्रमुख ने वरिष्ठ विद्वानों को अपमानजनक तरीके से संबोधित किया और बिना किसी संवाद की अनुमति दिए ही वहां से चले गए.
अन्य धार्मिक हस्तियों ने भी इसी तरह की चिंताएं जताईं. मौलाना हसनैन अब्बास गर्देजी ने सेना प्रमुख के बातचीत के लहजे की आलोचना करते हुए इसे एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए गलत बताया. बैठक में मौजूद अल्लामा नजीर अब्बास तकवी ने कहा कि उन्होंने चर्चा शुरू करने के लिए कई बार रोकने की कोशिश की, लेकिन वे ऐसा करने में असमर्थ रहे. बैठक में भाषण देने के बाद मुनीर बिना धार्मिक नेताओं की बात सुने वहां से चले गए.
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खामेनेई की मौत के बाद पाक में हुए प्रदर्शन
यह विवाद ऐसे समय में आया है जब हाल ही में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान के कई शहरों में भारी विरोध प्रदर्शन हुए थे. पाकिस्तान में शिया समुदाय द्वारा किए गए इन प्रदर्शनों में सुरक्षा बलों के साथ झड़पें हुईं, जिसमें कई लोगों के हताहत भी हुए. सेना प्रमुख की 'ईरान चले जाओ' वाला बयान इसी नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि सेना का मानना है कि ये प्रदर्शन पाकिस्तान की आंतरिक स्थिरता को नुकसान पहुंचा रहे हैं.
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