- पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सऊदी अरब, कतर और तुर्की के 4 दिनी दौरे पर रवाना हो गए हैं
- इस दौरे से ठीक पहले सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर की अतिरिक्त मदद देने का ऐलान किया
- अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि ईरान से दूसरे राउंड की शांति वार्ता इस्लामाबाद में हो सकती है
पाकिस्तान में एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच राउंड 2 की शांति वार्ता की तैयारियां चल रही हैं. खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को संकेत दिए कि अगले दो दिन में पाकिस्तान में वार्ता हो सकती है. एक तरफ पाकिस्तान में इतना बड़ा इवेंट होने जा रहा है और दूसरी तरफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पश्चिम एशिया के 4 दिनी दौरे पर रवाना हो गए हैं. सवाल ये है कि इतने महत्वपूर्ण इवेंट के बीच आखिर शहबाज विदेश दौरा क्यों कर रहे हैं?
4 दिनी दौरे पर गए हैं शहबाज शरीफ
पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ बुधवार को सऊदी अरब, कतर और तुर्किए के चार दिनी दौरे पर रवाना हो गए. उनके साथ डिप्टी पीएम और विदेश मंत्री इशहाक डार, सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार, विशेष सहयोगी सैयद तारिक फतेमी और अन्य अधिकारी भी जा रहे हैं. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने बताया कि सऊदी अरब और कतर की यात्रा द्विपक्षीय संदर्भ में हो रही है. इसके बाद शहबाज तुर्की में होने वाली अंताल्या डिप्लोमेसी फोरम की बैठक में हिस्सा लेने जाएंगे. इस बैठक के इतरह शहबाज शरीफ तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप एर्दोगन और अन्य नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे. बताया जा रहा है कि शहबाज इस दौरे में मिडिल ईस्ट संकट को लेकर भी बातचीत करेंगे.
फायदा उठाने में जुटा पाकिस्तान
अमेरिका-ईरान की शांति वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाला पाकिस्तान अब इसका भरपूर फायदा उठाने में जुट गया है. शहबाज का ये दौरा भी उसी की कड़ी माना जा रहा है. सऊदी अरब और कतर को अमेरिका का सहयोगी देश माना जाता है. पाकिस्तान इकलौता परमाणु संपन्न मुस्लिम देश है. ऐसे में वह अब इस्लामिक एकता की धुरी बनने का प्रयास कर रहा है. अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थता ने उसे अच्छा मौका दिया है. इसका तुरंत इनाम भी उसे मिल गया है. सऊदी अरब ने उसे बड़ी मदद देने का ऐलान कर दिया है.
तुर्किए में अमेरिका-ईरान संकट पर चर्चा?
अंताल्या डिप्लोमेसी फोरम के बारे में बताएं तो यह तुर्किए की तरफ से हर साल आयोजित किया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम है, जहां दुनिया भर के नेता, राजनयिक, शिक्षाविद और नीति निर्माता वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एकजुट होते हैं. आमतौर पर इसमें वैश्विक शांति, सुरक्षा, ऊर्जा संकट, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों जैसे मुद्दों पर चर्चा होती है. इस बार अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव पर भी विचार विमर्श हो सकता है.
यात्रा से पहले सऊदी अरब ने दी खुशखबरी
शहबाज शरीफ की यात्रा से ठीक पहले सऊदी अरब ने पाकिस्तान को बड़ी मदद दी. यूएई पाकिस्तान से 3.5 अरब डॉलर का कर्जा लौटाने का दबाव डाल रहा है. पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह इतनी बड़ी रकम लौटा पाए. ऐसे में सऊदी अरब उसकी मदद के लिए आगे आया है और पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर की अतिरिक्त सहायता देने का वादा किया है. इतना ही नहीं, सऊदी अरब ने 5 अरब डॉलर के मौजूदा कर्ज को भी तीन साल आगे बढ़ाने का वादा किया है. कर्ज में डूबे पाकिस्तान के लिए ये मदद डूबते को तिनके का सहारा जैसी है.
पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने हाल ही में ईरान से वार्ता के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की अगवानी की थी.
ट्रंप ने ठोकी मुनीर-शहबाज की पीठ
हाल ही में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में जब अमेरिका और ईरान के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के बीच सीधी वार्ता हुई थी, तब पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने ही मध्यस्थता की थी. 43 साल में ये पहला मौका था, जब अमेरिका और ईरान के नेता आमने-सामने बैठे थे. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ की अगुआई में हुई इस वार्ता में मिडिल ईस्ट संकट को लेकर हालांकि कोई ठोस नहीं निकला, लेकिन ट्रंप ने शहबाज और मुनीर की पीठ जरूर ठोकीं. ट्रंप ने दोनों को एक्स्ट्राऑर्डिनरी इंसान (असाधारण व्यक्ति) बताते बताया और कहा कि उनकी लीडरशिप बहुत काबिल है. उन्होंने क्षेत्रीय शांति और बातचीत को आगे बढ़ाने में काफी सकारात्मक योगदान दिया है.
ट्रंप ने अब मुनीर को बताया शानदार
इसमें कोई शक-शुबहा नहीं है कि ट्रंप शहबाज से ज्यादा आसिम मुनीर को ज्यादा तवज्जो देते हैं. यह कई मौकों पर साफ जाहिर हो चुका है. अब ईरान से दूसरे राउंड की बातचीत इस्लामाबाद में होने को लेकर साफ संकेत देते हुए भी ट्रंप ने मुनीर की तारीफ की. न्यूयॉर्क पोस्ट से ट्रंप ने कहा है कि अगले दो दिनों में वहां कुछ हो सकता है. हमारा झुकाव वहां जाने की तरफ ज्यादा है. जानते हैं क्यों, क्योंकि फील्ड मार्शल (मुनीर) बहुत अच्छा काम कर रहे हैं... वह शानदार हैं, इसलिए ज्यादा संभावना है कि हम वहीं जाएं. हम किसी ऐसे देश में क्यों जाएं, जिसका इससे कोई लेना-देना नहीं है. इस तरह ट्रंप ने जिनेवा और वियेना जैसे शहरों में राउंड 2 वार्ता की संभावना को खारिज कर दिया.
ये कोई छिपी बात नहीं है कि पाकिस्तान में सत्ता की असली चाबी किसके हाथ में है. आमतौर पर बड़े फैसले सेना प्रमुख ही लेते रहे हैं. दबी जुबान से ये भी कहा जा रहा है कि भले ही अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता के आधिकारिक मेजबान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ हों, लेकिन पर्दे के पीछे असली बिसात आसिम मुनीर ने ही बिछाई है. और अब अगर अमेरिका ईरान के बीच दूसरे राउंड की बातचीत में कोई समझौता होता है तो बहुत मुमकिन है, क्रेडिट भी उन्हीं को जाएगा.














