- ईरान का सर्वोच्च पद सुप्रीम लीडर है जो देश की सेना, विदेश नीति और सुरक्षा व्यवस्था का अंतिम निर्णय करता है.
- खामेनेई के बाद नए सुप्रीम लीडर का चुनाव असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स करती है जिसमें 88 शिया धर्मगुरु सदस्य होते हैं.
- चुनाव से पहले गार्डियन काउंसिल उम्मीदवारों की मंजूरी देती है. अंतरिम प्रशासन पेजेश्कियान और अन्य संभालते हैं.
पश्चिम एशिया के धधकते बारूद और इजरायल-अमेरिका के साथ जंग के बीच ईरान एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है. अयातुल्लाह अली खामेनेई के बाद कौन?. ये सवाल सिर्फ तेहरान की गलियों में नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में गूंज रहा है. एक तरफ मिसाइलों की गड़गड़ाहट है, तो दूसरी तरफ देश के भीतर सत्ता के सर्वोच्च शिखर को सुरक्षित रखने की जद्दोजहद. ईरान का पावर स्ट्रक्चर एक ऐसे संक्रमण काल से गुजर रहा है जहां एक ओर संवैधानिक मजबूरियां हैं और दूसरी ओर 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' के बंद कमरों में भविष्य की बिसात बिछाई जा रही है. क्या ईरान अपनी कट्टरपंथी नीतियों पर कायम रहेगा या नेतृत्व परिवर्तन के साथ पश्चिमी एशिया की भू-राजनीति की दिशा बदल जाएगी?
ईरान में सुप्रीम लीडर का पद राष्ट्रपति से भी ज्यादा शक्तिशाली माना जाता है . देश की सेना, विदेश नीति और सुरक्षा व्यवस्था पर अंतिम फैसला उसी का होता है.
फिलहाल किसके हाथ में जिम्मेदारी?
ईरानी कानून के अनुसार, नए सुप्रीम लीडर के चुनाव तक अंतरिम व्यवस्था लागू होती है. इस दौरान मसूद पेजेश्कियान, चीफ जस्टिस गुलाम-होसैन मोहसेनी-एजेई और ताकतवर संस्था गार्डियन काउंसिल का एक सदस्य मिलकर प्रशासन संभालेंगे. बताया जा रहा है कि मोहम्मद मोखबर संक्रमण काल की व्यवस्था को संभाल सकते हैं. वे पहले अंतरिम राष्ट्रपति की भूमिका भी निभा चुके हैं. ईरान में सुप्रीम लीडर का चुनाव सीधे जनता नहीं करती. यह जिम्मेदारी असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स नाम की संस्था के पास होती है. इस पैनल में 88 सदस्य होते हैं और ये सभी शिया धर्मगुरु होते हैं. इनका चुनाव हर आठ साल में जनता करती है. लेकिन चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को पहले गार्डियन काउंसिल की मंजूरी लेनी होती है.
सुप्रीम लीडर की ताकत कितनी बड़ी?
ईरान के पावर स्ट्रक्चर में सबसे ऊपर सुप्रीम लीडर होता है. 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद सिर्फ दो लोग इस पद पर रहे हैं...अयातुल्ला रूहोल्लाह खोमैनी और अली खामेनेई. सुप्रीम लीडर देश की रक्षा नीति तय करता है और वह सेना का कमांडर-इन-चीफ होता है. युद्ध या शांति का फैसला भी वही ले सकता है. उसे न्यायपालिका, सरकारी मीडिया और IRGC के शीर्ष अधिकारियों की नियुक्ति का अधिकार होता है.
2000 प्रतिनिधियों का नेटवर्क
सुप्रीम लीडर की ताकत सिर्फ पद तक सीमित नहीं होती. उसके करीब 2,000 प्रतिनिधि सरकार के अलग-अलग विभागों में तैनात रहते हैं. ये लोग सीधे सुप्रीम लीडर को रिपोर्ट करते हैं. कई मामलों में इनकी ताकत मंत्रियों से भी ज्यादा मानी जाती है.यही वजह है कि खामेनेई के बाद भी ईरान की सत्ता व्यवस्था पहले से तैयार मानी जा रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान में नेतृत्व बदलेगा, लेकिन सिस्टम अचानक नहीं
ईरान की सत्ता का ढांचा कुछ इस तरह बुना गया है कि व्यक्ति बदल सकता है, लेकिन 'सिस्टम' की जड़ें डिगना नामुमकिन सा लगता है... 2,000 प्रतिनिधियों का जाल और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की लोहे जैसी पकड़ ये सुनिश्चित करती है कि सुप्रीम लीडर की कुर्सी खाली होते ही तंत्र खुद को संभाल ले... हालांकि, मोहम्मद मोखबर जैसे चेहरों पर अंतरिम जिम्मेदारी भले ही हो, लेकिन असली चुनौती उस शख्सियत को तलाशने की है जो खामेनेई जैसा रसूख और धार्मिक स्वीकार्यता रखता हो...ईरान में नेतृत्व का बदलाव सिर्फ एक व्यक्ति का चुनाव नहीं, बल्कि उस विचारधारा की परीक्षा होगी जो 1979 की क्रांति के बाद से इस देश की पहचान रही है... दुनिया की नजरें अब ईरान के अगले नेता पर हैं












