NDTV Ground Report: ब्रिटेन में डॉक्टरी छोड़ चुनाव लड़ने ढाका की गलियों में क्यों उतरीं डॉ. तस्नीम जारा, जानें

ब्रिटेन में रहने वाली 31 वर्षीय डॉक्टर तस्नीम जारा बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव लाने के इरादे से लौटी हैं. वह नेशनल सिटीजन्स पार्टी में शामिल हुई थीं, लेकिन कट्टरपंथी संगठन से गठबंधन के बाद पार्टी छोड़ निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर आईं.

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  • डॉ. तस्नीम जारा ब्रिटेन से लौटकर बांग्लादेश की राजनीति में बदलाव लाने के इरादे से निर्दलीय चुनाव लड़ रही हैं
  • उन्होंने पहले नेशनल सिटिजंस पार्टी जॉइन की थी लेकिन इस्लामी संगठनों से गठबंधन के बाद पार्टी छोड़ दी
  • तस्नीम जारा ढाका-9 संसदीय क्षेत्र से चुनाव मैदान में हैं. उनका मुकाबला बीएनपी के हबीबुर राशिद से है
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बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनावों के बीच एक नाम खूब चर्चा में है- डॉ. तस्नीम जारा. ब्रिटेन में रहने वाली 31 वर्षीय डॉक्टर जारा बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव लाने के इरादे से लौटी हैं. पहले उन्होंने बांग्लादेश नेशनल सिटिजंस पार्टी (एनसीपी) जॉइन की थी, लेकिन इस्लामी संगठनों से उसके गठबंधन के बाद अलग हो गईं और निर्दलीय ही चुनाव मैदान में उतर आईं. 

ढाका में बीएनपी प्रत्याशी से मुकाबला

डॉ. तस्नीम जारा ढाका-9 सीट से चुनाव मैदान में हैं. उनका मुख्य मुकाबला बीएनपी उम्मीदवार हबीबुर राशिद से माना जा रहा है. 4.69 लाख वोटरों वाले इस क्षेत्र में 12 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. कुछ ही देर में साफ हो जाएगा कि तस्नीम की ये सियासी पहल कितना रंग लाती है.  शुरुआती रुझानों में तस्नीम बीएनपी उम्मीदवार से करीब 5 हजार वोटों से पीछे चल रही थीं.

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जुलाई क्रांति के बाद बांग्लादेश लौटीं

तस्नीम जारा ब्रिटेन में डॉक्टरी कर रही थीं. सोशल मीडिया के जरिए बांग्लादेश में युवाओं के बीच चर्चित थीं. जारा ने एनडीटीवी को बताया कि 2024 की जुलाई क्रांति ने उनके जैसे युवाओं के लिए बांग्लादेश की राजनीति में आने की खिड़की खोल दी.

एनसीपी छोड़ने की वजह बताई

तस्नीम जारा यूके से लौटकर छात्र आंदोलन से निकली नेशनल सिटीजन्स पार्टी (NCP) में शामिल हुई थीं. उन्हें पार्टी की सीनियर जॉइंट मेंबर सेक्रेटरी बनाया गया था. लेकिन जब एनसीपी ने जमात-ए-इस्लामी जैसे इस्लामी कट्टरपंथी समूहों के साथ चुनावी गठबंधन किया तो जारा ने तुरंत पार्टी को अलविदा कह दिया.

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चुनाव में क्यों उतरीं, खुद बताया

चुनावी राजनीति में कदम रखने के पीछे जारा दो मुख्य कारण बताती हैं. उनका कहना है कि एक डॉक्टर के तौर पर वह कई लोगों की मदद तो कर पाती हैं, लेकिन मौजूदा व्यवस्था को बदलना उनके बस में नहीं होता. इसलिए वह स्वास्थ्य, शिक्षा और शासन व्यवस्था में स्थायी सुधार लाना चाहती हैं. 

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भ्रष्टाचार खत्म करने का संकल्प

इसके अलावा उनका दूसरा बड़ा उद्देश्य उस राजनीतिक संस्कृति को चुनौती देना है जहां भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार का बोलबाला है. वह इसे पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ बदलना चाहती हैं. जारा का मानना है कि जनता के बीच एक अलग तरह की राजनीति को लेकर भारी उत्साह है, जो उनके जन-केंद्रित अभियान में साफ दिखाई देता है. 

न सभा, न पोस्टर, घर-घर प्रचार

जारा कहती हैं कि एक नई राजनीतिक संस्कृति बनाने का वादा करके बनी पार्टी अगर पुरानी कट्टरपंथी ताकतों से हाथ मिलाती है तो वह अपने मूल सिद्धांतों से भटक रही है. ऐसे में उन्होंने किसी भी गठबंधन का हिस्सा बनने के बजाय 'फुटबॉल' चुनाव चिह्न के साथ अकेले ही चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया.

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ढाका-9 सीट पर तस्नीम जारा ने प्रचार का अलग रास्ता चुना. पोस्टरबाजी और प्रचार के बजाय उन्होंने कोई बड़ी सभा नहीं की, न ही सड़कों को पोस्टरों से पाटा. लोगों से व्यक्तिगत जुड़ाव बनाते हुए जारा ने घर-घर जाकर लोगों से मुलाकात की. 

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घोषणापत्र में लोगों से जुड़े मुद्दे

उनका घोषणापत्र गैस की समस्या, जलभराव, आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं और भ्रष्टाचार मुक्त शासन जैसे सीधे जनता से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है. चुनाव में उनकी उम्मीद वो युवा और महिलाएं हैं जिन्होंने जुलाई क्रांति में कुर्बानियां दी थीं.

जारा का कहना है कि हमें अपने संस्थानों को इस तरह बनाना होगा कि भविष्य में किसी भी सरकार को हटाने के लिए लोगों को अपनी जान जोखिम में न डालनी पड़े. ये चुनाव केवल जीत-हार का नहीं बल्कि जवाबदेही और पारदर्शिता की शुरुआत का है.

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