- होर्मुज जलडमरूमध्य में करीब तीन हजार जहाज फंसे हुए हैं जिन पर लगभग बीस हजार नाविक सवार हैं
- नाविकों को राशन, पानी और जरूरी सामान की कमी हो रही है और वे अपने देश वापस जाने की मांग कर रहे हैं
- इन नाविकों के लिए उचित श्रम समझौते नहीं हैं, उपर से जंग की वजह से इनके वेतन और सुरक्षा की समस्या बढ़ती है
पिछले एक महीने से जारी मिडिल ईस्ट की जंग उन 3000 जहाजों के लिए काल बन गई है जो होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास फंसे हुए हैं. इन जहाजों पर 20 हजार नाविक सवार हैं और उनके सिर पर हर सेकेंड मौत की तलवार लटक रही है. ताजा खाना और पानी खत्म हो गया है या होने की कगार पर है. नाविकों की हेल्पलाइन चलाने वाली संस्थाओं का कहना है कि खाड़ी में फंसे जहाजों के नाविक उनसे लगातार संपर्क कर रहे हैं. वे अपने देश वापस भेजे जाने, मुआवजा मिलने और जहाज पर जरूरी सामान पहुंचाने की मांग कर रहे हैं. मदद की गुहार लगाते इतने ज्यादा संदेश आ रहे हैं कि हेल्पलाइन टीमें उन सबको संभालने में परेशान हो रही हैं.
इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट वर्कर्स एसोसिएशन (ITF) की अपनी नाविक सपोर्ट टीम है जो समंदर में सामान ले जााने-लाने वाले जहाजों के नाविकों को मदद देती है. इस टीम को एक नाविक ने आज से एक हफ्ते पहले ही, 24 मार्च को एक मेल भेजा था. इसमें लिखा था कि “आपको तुरंत जानकारी देने के लिए लिख रहा हूं कि हमारा जहाज इस समय राशन और एक क्रू सदस्य की सेहत को लेकर बहुत गंभीर स्थिति में है. क्रू को जिंदा रखने के लिए तुरंत खाना, पीने का पानी और जरूरी सामान भेजना जरूरी है.”
हमलों के वीडियो भेज रहे नाविक
न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार ITF से कुछ नाविक यह पूछ रहे हैं कि युद्ध वाले इलाके में जहाज चलाते समय उनके अधिकार क्या हैं. वहीं कुछ ने ऐसे वीडियो भेजे जिनमें उनके जहाज के पास बम गिरते हुए दिखाई दे रहे थे, और उन्होंने फेडरेशन से जहाज से उतरने में मदद मांगी. अरब दुनिया और ईरान के लिए ITF के नेटवर्क कोऑर्डिनेटर मोहम्मद अरराचेदी ने एएफपी को बताया कि स्थिति बहुत असामान्य है और हर तरफ डर का माहौल है.
अरराचेदी ने कहा, “मुझे रात के दो बजे, तीन बजे भी नाविकों के फोन आते हैं. जैसे ही उन्हें इंटरनेट मिलता है, वे तुरंत कॉल करते हैं. एक नाविक ने घबराकर फोन किया और कहा कि हम यहां बमबारी के बीच हैं. हम मरना नहीं चाहते. प्लीज हमारी मदद कीजिए, सर. हमें यहां से निकालिए.'”
संयुक्त राष्ट्र की समुद्री संस्था इंटरनेशनल मैरिटाइम ऑर्गेनाइजेशन (IMO) के अनुसार इस समय खाड़ी क्षेत्र में लगभग 20,000 नाविक फंसे हुए हैं. 28 फरवरी के बाद से इस इलाके में हुई घटनाओं में कम से कम आठ नाविक या बंदरगाह पर काम करने वाले मजदूरों की मौत हो चुकी है.
केवल 16 डॉलर रोज की कमाई
एक और बड़ी चिंता वेतन की है. ITF की सपोर्ट टीम ने एएफपी को बताया कि हमें जो ईमेल मिलते हैं उनमें से लगभग 50 प्रतिशत वेतन से जुड़े होते हैं.” उन्होंने कहा कि कई नाविक खतरनाक परिस्थितियों के बावजूद जहाज पर बने रहने का फैसला करते हैं क्योंकि वे जहाज छोड़ने का खर्च नहीं उठा सकते. एएफपी द्वारा देखे गए एक ईमेल में एक नाविक ने पूछा कि क्या उसकी रोज की तनख्वाह 16 डॉलर से बढ़कर 32 डॉलर हो जाएगी, क्योंकि वह अब घोषित युद्ध क्षेत्र में है. 16 डॉलर भारतीय करेंसी में 1500 रुपए के करीब होता है.
ITF का कहना है कि इतनी कम तनख्वाह इस बात का संकेत है कि जहाज मालिकों ने ऐसे श्रम समझौते (लेबर एग्रीमेंट) नहीं किए हैं जो नाविकों को उचित वेतन सुनिश्चित करते हैं. ऐसे एग्रीमेंट के काम करने वाले नाविक खास खतरे में होते हैं, क्योंकि उनके कॉन्ट्रैक्ट में अक्सर युद्ध क्षेत्र में काम करने का प्रावधान नहीं होता और जहाज मालिक ITF जैसी संस्थाओं के अनुरोधों का जवाब भी नहीं देते. ये नाविक फिलीपींस, भारत, बांग्लादेश, म्यांमार, इंडोनेशिया जैसे देशों से हैं.













