मां के इलाज पर खर्च हुए 1.75 करोड़, जंग ने तोड़ी भारतीय परिवार की कमर, दुबई में फंसे बेबस बेटे ने सुनाई कहानी

अस्‍पताल का बिल 1.75 करोड़ रुपये पहुंच गया है और रोजाना 5 लाख रुपये बढ़ रहा है. भारत आने के लिए एयर एंबुलेंस का खर्च लगभग 50 लाख रुपये है. दुबई में फंसे परिवार की ये कहानी आपको रुला देगी.

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  • दुबई में रहने वाले भारतीय परिवार की मां 40 दिनों से आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर गंभीर हालत में हैं
  • अस्पताल का बिल 1.75 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है और रोजाना पांच लाख रुपये की बढ़ोतरी हो रही है
  • ईरान-इजरायल युद्ध के कारण फ्लाइट रद्द होने से परिवार अपनी मां को भारत ले जाने में असमर्थ हो गया है
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दुबई:

दुबई में मां को बचाने के लिए एक परिवार के सामने सड़क पर आने की नौबत आ गई है. परिवार का अस्पताल बिल 1.75 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है और ईरान-इजरायल युद्ध ने सारी उम्मीदें तोड़ दी हैं. उनकी फ्लाइट रद्द हो गई और एयर एंबुलेंस का खर्च वहन करने में परिवार असमर्थ है. युद्ध संकट मध्य पूर्व में ऐसे ही तमाम परिवारों के जीवन को मुश्किल बना दिया है, जो भारत में सस्ती मेडिकल सेवाओं का लाभ ले सकते थे. दुबई में रहने वाला एक भारतीय दंपति 40 दिनों से आईसीयू में अपनी मां को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है. युद्ध के बाद अचानक फ्लाइट रद्द होने से परिवार फंस गया. युद्ध के बीच एयर एम्बुलेंस सेवा का खर्च 50 लाख रुपये है.अस्पताल बिल 1.75 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है, जो रोजाना 5 लाख रुपये बढ़ रहा है.

बेहतर जीवन की उम्मीद लेकर आए थे दुबई

खाड़ी देश में जारी संघर्ष ने इस क्षेत्र के कई परिवारों के लिए अप्रत्याशित कठिनाइयां खड़ी कर दी हैं. हवाई यात्रा में व्यवधान, बढ़ती महंगाई और अनिश्चितता ने पहले से ही आपात स्थितियों से जूझ रहे लोगों के लिए जीवन बेहद मुश्किल बना दिया है. एनडीटीवी ने दुबई में रहने वाले इस भारतीय दंपति की दास्तां सामने रखी है. तमिलनाडु के कोयंबटूर के मूल निवासी थिलक्कुमार जलथु अनिरुथराज और शामिनी रमेश 7 साल पहले अपने परिवार के लिए बेहतर जीवन की उम्मीद लेकर दुबई आए थे. लेकिन हेल्थ इमरजेंसी और बढ़ते आर्थिक दबाव के कारण परिवार की उम्मीदें चकनाचूर हो गईं.

40 दिन से ICU में वेंटिलेटर सपोर्ट पर

थिलक्कुमर की मां परिवार के साथ समय बिताने के लिए दुबई आई थीं. वहां रहने के दौरान उन्हें गंभीर वायरल संक्रमण हो गया और इसके बाद तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी. पिछले 40 दिनों से वे आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं और उन्हें लगातार निगरानी और उपचार की आवश्यकता है. डॉक्टरों ने पहले उन्हें 4 मार्च को निर्धारित वाणिज्यिक चिकित्सा एस्कॉर्ट उड़ान से भारत वापस जाने की अनुमति दे दी थी, ताकि वे वहां कम खर्च में अपना इलाज जारी रख सकें. क्षेत्र में तनाव बढ़ने के कारण युद्ध संबंधी व्यवधानों के चलते उड़ान रद्द कर दी गई. तब से उनकी हालत बिगड़ती जा रही है और डॉक्टरों का कहना है कि वे अब नियमित चिकित्सा एस्कॉर्ट उड़ान से यात्रा नहीं कर सकतीं. अब एकमात्र विकल्प विशेष आईसीयू एयर एम्बुलेंस है, जिसकी लागत लगभग 50 लाख रुपये है.

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अस्‍पताल का किया हर दिन 5 लाख रुपये 

इस बीच, दुबई में इलाज का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है. अस्पताल का बिल पहले ही 1.75 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है और प्रतिदिन लगभग 5 लाख रुपये बढ़ रहा है, जो परिवार के लिए असहनीय बोझ है. अस्पताल अधिकारियों ने परिवार को आश्वासन दिया है कि वे बिल में कुछ छूट देने का प्रयास करेंगे. हालांकि, संभावित मदद के बावजूद भी, यह राशि उनकी आर्थिक क्षमता से कहीं अधिक है. एनडीटीवी से बात करते हुए, दंपति ने कहा कि वे पहले से ही इमोशनल और फाइनेंशियल संकट से जूझ रहे हैं और चल रहे युद्ध ने उनकी स्थिति को और भी बदतर बना दिया है. उन्होंने कहा, "हमारे पास ज्यादा पैसा नहीं है. अब कुछ भी नहीं बचा है और थिलक्कुमार की मां को आगे के इलाज के लिए भारत वापस लाने के लिए भारतीय समुदाय से मदद की अपील की."

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