मणिपुर से इजरायल बसने पहुंचे 250 भारतीय, बाइबिल की एक खोई जाति के संघर्ष और 'घरवापसी' की कहानी

Manipur Bnei Menashe Community settling in Israel: बनेई मेनाशे समुदाय के 250 से ज्यादा मणिपुरी भारतीय 23 अप्रैल को इजरायल पहुंचे. ये सभी एक सरकारी योजना के तहत इजरायल लाए गए हैं और ऐसा आगे भी होगा.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
Manipur Bnei Menashe Community settling in Israel: बनेई मेनाशे समुदाय के 250 से ज्यादा मणिपुरी लोग इजरायल में बसने पहुंचे
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • भारत के मणिपुर राज्य से बनेई मेनाशे समुदाय के 250 लोग इजरायल की सरकारी योजना के तहत पहुंचे हैं
  • यह समुदाय खुद को बाइबिल के खोए हुए जनजाति मेनाशे का वंशज मानता है
  • इजरायल सरकार ने इस समुदाय के करीब चार हजार छह सौ लोगों को लाने के लिए आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया है
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

भारत से एक खास समुदाय के 250 लोग एक लंबे सफर के बाद इजरायल पहुंचे हैं. घूमने के लिए नहीं, हमेशा-हमेशा के लिए वहां बसने. ये लोग खुद को बहुत पुराने समय की एक खोई हुई ऐसी जाति का वंशज मानते हैं, जिसका जिक्र बाइबिल में आता है. जब ये लोग तेल अवीव एयरपोर्ट पहुंचे, तो उनका जोरदार स्वागत किया गया. उन्होंने खुद को गाना गाते, झंडा लहराते और खुशी में झूमते लोगों के बीच पाया. यह सिर्फ यात्रा नहीं है, बल्कि अपने इतिहास और पहचान से जुड़ने की कोशिश है. खास बात है कि खुद इजरायल सरकार ने इस पूरे समुदाय को धीरे-धीरे वहां बसाने की योजना बनाई है और इसी के पहले चरण में 250 लोगों का यह जत्था इजरायल पहुंचा है. यह घटना इतिहास, धर्म और इंसानी भावनाओं से जुड़ी एक खास कहानी है. चलिए आपको बताते हैं.

'मेनाशे के बेटे' पहुंचे इजरायल

गुरुवार, 23 अप्रैल को बनेई मेनाशे समुदाय के 250 से ज्यादा भारतीय तेल अवीव एयरपोर्ट पर पहुंचे. यह एक सरकारी योजना के तहत उन्हें इजरायल लाने का हिस्सा था. बनेई मेनाशे का मतलब है “मेनाशे के बेटे”. ये 250 लोग इस समुदाय के पहले लोग हैं, जो नवंबर में इजरायली सरकार के फैसले के बाद इजरायल पहुंचे हैं. इजरायली सरकार ने भारत के मणिपुर राज्य से इस समुदाय के करीब 4,600 लोगों को लाने के लिए पैसा देने का फैसला किया है. एयरपोर्ट पर उनका स्वागत नीले और सफेद रंग के गुब्बारों के गेट के नीचे किया गया, जो इजरायल के झंडे के रंग हैं. वहां मौजूद लोगों ने पारंपरिक यहूदी गीत गाकर उनका स्वागत किया.

यह समुदाय मानता है कि वे मेनाशे के वंशज हैं, जो बाइबिल के “खोए हुए जनजातियों” में से एक के पूर्वज थे. मेनाशे को 720 ईसा पूर्व में असीरियन हमलावरों ने देश से बाहर निकाल दिया था. एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार डागन जोलात पिछले 20 साल से इजरायल में रह रहे हैं और वे एयरपोर्ट पर इन 250 लोगों में से एक व्यक्ति से मिलने आए थे, जिसे वे अपना भाई बताते हैं. उन्होंने एएफपी से कहा, “हम अपने गांव में पड़ोसी थे और वहां के गिने-चुने यहूदियों में से थे.” डागन जोलात ने बताया कि उन्होंने अपने दोस्त को 9 साल से नहीं देखा था.

उन्होंने यह भी कहा, “जब मेरा बेटा छोटा था (भारत में), तो मेरा दोस्त उसे अक्सर अपनी गोद में उठाता था.”

भारत कैसे आया यह समुदाय?

शावेई इजरायल नाम की संस्था इन खोई हुई जातियों के वंशजों को खोजती है. उसने बताया कि 1990 के दशक से अब तक लगभग 4,000 बनेई मेनाशे इजरायल आ चुके हैं, जबकि करीब 7,000 लोग अभी भी भारत में रहते हैं. इस समुदाय की कहानी के अनुसार, उन्होंने कई सदियों तक फारस, अफगानिस्तान, तिब्बत और चीन से पलायन झेला है. लेकिन इस दौरान उन्होंने यहूदी धर्म की कुछ परंपराएं, जैसे खतना, जारी रखीं.

Advertisement

भारत में, 19वीं सदी के मिशनरियों ने उन्हें ईसाई धर्म में बदल दिया था.

अब इजरायल में धर्म बदलना होगा

गुरुवार को पहुंचे 250 बनेई मेनाशे लोगों को उत्तरी इजरायल में बसाया जाएगा, ऐसा इजरायल के इंटीग्रेशन मंत्रालय ने बताया है. इजरायल का नागरिक बनने के लिए उन्हें धर्म परिवर्तन करना होगा. इमिग्रेशन मंत्री ओफिर सोफेर ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया. सोफेर ने एएफपी से कहा कि इन 250 लोगों का आना एक “ऐतिहासिक पल” है.

उन्होंने कहा, “यह एक योजना की शुरुआत है, जिससे पूरे समुदाय को यहां लाया जाएगा, हर साल 1,200 लोग आएंगे.” अप्रैल 2025 से अब तक 18,000 से ज्यादा यहूदी इजरायल आ चुके हैं, जो पिछले साल के मुकाबले 18 प्रतिशत कम है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: इजरायल में कितनी है हिंदू और मुस्लिम आबादी? ताकतवर देश में रहते हैं महज इतने लाख लोग

Featured Video Of The Day
एक बटन से ईरान का खात्मा करने वाले थे ट्रंप, न्यूक्लियर कोड भी ले लिए थे... नई रिपोर्ट से हिली दुनिया
Topics mentioned in this article