- जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने 7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद संभावित भीषण भूकंप की चेतावनी जारी की है.
- इस शक्तिशाली भूकंप के बाद सुनामी की चेतावनी जारी की गई थी लेकिन बाद में इसे हटा लिया गया.
- भीषण भूकंप की चेतावनी होकाइडो से चिबा तक फैले 182 शहरों और कस्बों के लिए जारी की गई है.
जापान में सोमवार को आए शक्तिशाली भूकंप की तीव्रता 7.5 बताई गई थी, जिसे जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने बढ़ा कर 7.7 कर दिया है. जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (जेएमए) ने इवाते प्रांत और होकाइडो और ओमोरी प्रांतों के प्रशांत तटों के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की और 3 मीटर तक ऊंची सुनामी आने की आशंका जताई. सुनामी की लहरे इवाते, आमोरी और होकाइडो की तटों तक पहुंच भी गई हैं, हालांकि इनकी ऊंचाई बहुत नहीं रही और बाद में सुनामी की चेतावनी को हटा भी दिया गया.
जेएमए के मुताबिक भूकंप का केंद्र इवाते प्रांत के तट से करीब 100 किलोमीटर दूर 10 किलोमीटर की गहराई पर था जो जापान के समयानुसार शाम 4:53 बजे (1.23 IST) आया. अब सबसे बड़ा असर देश की हाई-स्पीड रेल सेवाओं पर दिखा.
जापान मौसम विभाग ने तीव्र भूकंप की आशंका जताया और आज आए भूकंप से सुनामी की चेतावनी को हटाया
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भूकंप के बाद सुनामी के अलर्ट के कारण पूर्वोत्तर जापान की कई बुलेट ट्रेन सेवाएं एहतियातन रोक दी गईं. यह फैसला सुरक्षा जांच पूरी होने तक लिया गया है ताकि किसी भी बड़े हादसे से बचा जा सके.
रेल ऑपरेटर्स के अनुसार तोहोकु शिनकानसेन, यामागाटा शिनकानसेन और अकिता शिनकानसेन (शिनकानसेन= बुलेट ट्रेन) पर सेवाएं रोकी गईं. ये तीनों लाइनें उत्तर-पूर्वी इलाकों को राजधानी टोक्यो से जोड़ती हैं, इसलिए हजारों की संख्या में यात्रियों की आवाजाही प्रभावित हुई.
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जापान का बुलेट ट्रेन सबसे सुरक्षित
जापान का शिंकानसेन (बुलेट ट्रेन) नेटवर्क दुनिया के सबसे सुरक्षित रेल सिस्टम्स में गिना जाता है. भूकंप के झटके लगते ही ऑटोमैटिक सिस्टम ट्रेनों को तुरंत रोक देता है. इसके बाद ट्रैक, पुल और इलेक्ट्रिकल सिस्टम की बारीकी से जांच की जाती है. जब तक पूरी तरह क्लियरेंस नहीं मिलती, ट्रेनें दोबारा नहीं चलाई जातीं.
क्यों तुरंत रुकती हैं बुलेट ट्रेनें
जापान दुनिया के सबसे अधिक भूकंप संभावित क्षेत्रों में से आता है. इसे देखते हुए यहां हाई-स्पीड ट्रेनों में अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाया गया है. जैसे ही भूकंप की शुरुआती तरंगें पकड़ में आती हैं, सिस्टम खुद ही ट्रेनों की स्पीड कम करके उन्हें रोक देता है. यही वजह है कि बड़े भूकंप के बावजूद रेल हादसे बहुत कम देखने को मिलते हैं.
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यात्रियों को झेलनी पड़ी परेशानी
कई स्टेशनों पर यात्री फंसे हुए हैं. कुछ ट्रेनों को बीच रास्ते में ही रोक दिया गया, जबकि कई को नजदीकी स्टेशनों तक लाकर खाली कराया गया. प्रशासन ने यात्रियों से धैर्य बनाए रखने और आधिकारिक अपडेट का इंतजार करने की अपील की.
पहले दी गई सुनामी की चेतावनी और फिर हटाई गईं
इससे पहले जापान मौसम एजेंसी ने भूकंप के बाद सुनामी की चेतावनी जारी की. इवाते प्रांत के कुजी बंदरगाह पर 80 सेंटीमीटर ऊंची लहरें आईं और पानी का स्तर भी बढ़ा. होकाइडो के उराकावा शहर और आमोरी प्रांत के हाचिनोहे बंदरगाह पर 40 सेंटीमीटर ऊंची लहरें दर्ज की गई है. जापान के अन्य तटीय इलाकों में 30 सेंटीमीटर से कम ऊंची की लहरे आईं.
मौसम एजेंसी ने होकाइडो और आमोरी प्रांतों के प्रशांत सागर तटों के लिए 3 मीटर तक ऊंची सुनामी आने की आशंका जताई थी. लेकिन कई तटीय इलाकों में शुरुआती कम ऊंचाई वाली लहरों के आने के बाद जब शाम साढ़े सात बजे तक और ऊंची लहरें नहीं आईं तो सुनामी की चेतावनी को मौसम एजेंसी ने वापस ले लिया. हालांकि लोगों से अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा गया है.
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बड़े झटकों की संभावना
इसी के साथ जापाना मौसम एजेंसी ने चेताया है कि अगले एक हफ्ते तक इसी तीव्रता के और भी झटके आ सकते हैं. यह भी कहा गया है कि आने वाले झटके सोमवार को आए झटकों से बड़े हो सकते हैं. अधिकारियों का कहना है कि प्रशांत महासागर में दो गहरी समुद्री खाइयों के किनारे भीषण भूकंप आने की संभावना बढ़ गई है. यह चेतावनी होकाइडो से चिबा तक फैले 182 शहरों और कस्बों के लिए जारी की गई है.
जापान के पूर्वोत्तर क्षेत्रों में अक्सर भूकंप आते रहते हैं. सोमवार को जिस सैनरिकु के तट पर यह भूकंप आया वो राजधानी टोक्यो से करीब 300 किलोमीटर दूर होंशू द्वीप के पास स्थित है, यहां अक्सर भूकंप की तीव्रता 7 से ऊपर रहती है.
जापान में कब कब आए विनाशकारी भूकंप
15 जून 1896 (मेजी-सानरिकु भूकंप): होंशू सानरिकु तट से 150 किलोमीटर दूर 8.5 तीव्रता का एक ज़ोरदार भूकंप आने के बाद, सानरिकु के तट पर विशाल सुनामी आ गई. इस सुनामी में 22,066 लोगों की जान गई.
1 सितंबर 1923 (ग्रेट कांटो भूकंप): यह जापान के इतिहास के सबसे विनाशकारी भूकंपों में से एक था, जिसकी तीव्रता 7.9 थी. इसने टोक्यो और योकोहामा में भयानक तबाही मचाई थी. इस भूकंप में न केवल बड़ी संख्या में आमजन, बल्कि सैन्य प्रतिष्ठान भी नष्ट हो गए थे. एक अनुमान के अनुसार, इसमें 140,000 से अधिक लोग मारे गए थे.
17 जनवरी, 1995 (कोबे भूकंप): ह्योगोकेन-नानबू भूकंप (तीव्रता 7.2) ने कोबे शहर में तबाही मचाई. इसमें 6,000 से अधिक लोग मारे गए थे.
2005 और 2006 (मियागी और कुरील द्वीप भूकंप): 2005 में मियागी प्रांत और 15 नवंबर, 2006 को कुरील द्वीप समूह में आए भूकंपों (8.3 तीव्रता तक) के कारण जापान के उत्तरी तट पर सुनामी की चेतावनी और तबाही देखी गई.
11 मार्च 2011 (तोहोकू सुनामी, होंशू भूकंप): 2011 में पूर्वोत्तर जापान के होंशू द्वीप के पास 9.0 तीव्रता का भूकंप आया. यह जापान के इतिहास का सबसे तीव्र भूकंप था. जिसमें बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था. खास कर तोहोकू के तटीय इलाके तबाह हो गए थे. भूकंप होंशू में आया था और आधिकारिक तौर पर करीब 18,500 लोग मारे गए या लापता हो गए थे, जिन्हें बाद में मृत मान लिया गया था. इस सूनामी ने लाखों की संख्या में लोगों को विस्थापित किया था. सुनामी की वजह से ही फुकुशिमा दाइची संयंत्र में एक बड़ा परमाणु हादसा हो गया था, जिसकी वजह से आसपास के इलाकों से हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा था.
1 जनवरी, 2024 (नोटो भूकंप): नए साल पर जापान के नोटो क्षेत्र में तेज भूकंप आया, जिससे सड़कों और घरों को भारी नुकसान पहुंचा और सुनामी की चेतावनी जारी की गई थी.













