- इजरायली प्रधानमंत्री ने हिज्बुल्लाह आतंकवादियों को निरस्त्र करने के लिए लेबनान से सीधी बातचीत को मंजूरी दी है
- वार्ता का संचालन अमेरिकी और इजरायली राजदूत करेंगे, लेबनान का प्रतिनिधित्व अभी स्पष्ट नहीं हुआ है
- ईरान और अमेरिका के बीच स्थायी युद्धविराम की उम्मीदें बढ़ी हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव कम हो सकता है
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह आतंकवादियों को निरस्त्र करने और पड़ोसी देशों के बीच संबंध स्थापित करने के उद्देश्य से लेबनान के साथ "जितनी जल्दी हो सके" सीधी बातचीत को मंजूरी दे दी है. 1948 में इजरायल की स्थापना के बाद से दोनों देश तकनीकी रूप से युद्ध की स्थिति में हैं. लेबनानी अधिकारियों की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई, लेकिन योजनाओं से परिचित एक व्यक्ति के अनुसार, इजरायल-लेबनान वार्ता अगले सप्ताह वाशिंगटन स्थित विदेश विभाग में शुरू होने की उम्मीद है.
ईरान-अमेरिका युद्धविराम पर उठने लगे थे सवाल
एपी की रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत की संभावना से ईरान युद्ध में अस्थायी युद्धविराम को मजबूती मिलती दिख रही है, जो इजरायल के बेरूत पर बमबारी और तेहरान की तरफ से होर्मुज जलडमरूमध्य पर निरंतर नियंत्रण और प्रस्तावित शांति वार्ता में आम सहमति बन पाने की अनिश्चितता के कारण लड़खड़ा गया था. नेतन्याहू की घोषणा ऐसे समय में आई जब इस बात पर असहमति थी कि क्या युद्धविराम समझौते में इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच लड़ाई में विराम शामिल है? यही कारण है कि आज ही लेबनान के प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से बात की और इस बात पर जोर दिया कि ईरान-अमेरिका युद्धविराम वार्ता में उन्हें भी शामिल किया जाए.
कहां होगी लेबनान-इजरायल की बैठक
स्थिति की संवेदनशीलता के कारण नाम न छापने की शर्त पर जानकारी देने वाले व्यक्ति के अनुसार, वाशिंगटन में होने वाली वार्ता का संचालन अमेरिकी पक्ष से लेबनान में अमेरिकी राजदूत मिशेल इस्सा और इजरायली पक्ष से अमेरिका में इजरायली राजदूत येचिएल लीटर द्वारा किए जाने की उम्मीद . यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो पाया कि लेबनान का प्रतिनिधित्व कौन करेगा. एक्सियोस ने सबसे पहले वार्ता के समय और स्थान की जानकारी दी थी.
अमेरिका-ईरान में स्थायी युद्धविराम की उम्मदें बढ़ीं
फिलहाल, युद्धविराम की घोषणा के साथ जीत का ऐलान करने के बाद, ईरान और अमेरिका दोनों एक-दूसरे पर दबाव बनाने में जुट गए है. ईरान की अर्धसरकारी समाचार एजेंसियों ने बताया कि सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछा दी हैं, जो तेल के लिए एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है और जिसे तेहरान ने बंद कर दिया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान समझौते का पालन नहीं करता है तो अमेरिकी सेना पहले से भी ज्यादा कठोर कार्रवाई करेगी. वहीं ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि अभी भी उनकी उंगलियां ट्रिगर पर हैं. ईरान के गुस्से का कारण लेबनान पर इजरायली हमले थे. अब जब इजरायल खुद लेबनान से बातचीत के लिए राजी हो गया है तो पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान के बीच स्थायी युद्धविराम को लेकर होने वाली बैठक से उम्मीदें बढ़ गईं हैं.
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