कौन हैं कुर्द, जिनके कंधे पर रखी अमेरिकी बंदूक कराएगी ईरान में गृहयुद्ध?

कुर्द समूह में हजारों की संख्या में लड़ाके हैं. अगर बात ईरान में कुर्द आबादी की करें तो वो लगभग 80 लाख के करीब है. कुर्द समूह में मुख्य रूप से सुन्नी मुसलमान हैं. ऐसे में अगर कुर्द लड़ाके इस युद्ध में उतरते हैं तो ईरान के अंदर गृहयुद्ध जैसे हालात हो जाएंगे.

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CIA के इशारे पर कुर्द विद्रोही बढ़ाएंगे ईरान की मुश्किलें
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  • इजरायल और अमेरिका का ईरान के खिलाफ युद्ध पांचवें दिन में प्रवेश कर चुका है और मिसाइल हमले जारी हैं
  • कुर्द विद्रोही ईरानी शासन के खिलाफ लंबे समय से सक्रिय हैं और उनकी संख्या हजारों में है
  • अमेरिका कुर्द समूहों को हथियार देने और विद्रोह भड़काने की योजना पर सक्रिय चर्चा कर रहा है
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इजयराल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध और भी भयानक स्थिति की तरफ बढ़ता दिख रहा है.ईरान की ओर से मिसाइलों की बौछार जारी है. उधर इजरायल और अमेरिका ने भी हमले तेज कर दिए लेकिन अब इस जंग में कुर्द विद्रोहियों की एंट्री होती दिख रही है. अगर ऐसा हुआ तो ईरान की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं. आपको बता दें कुर्द विद्रोही शुरू से ईरानी शासन के खिलाफ काम करने वाला समूह रहा है. कुर्द समूह में हजारों की संख्या में लड़ाके हैं. अगर बात ईरान में कुर्द आबादी की करें तो वो लगभग 80 लाख के करीब है. कुर्द समूह में मुख्य रूप से सुन्नी मुसलमान हैं. अगर कुर्द लड़ाके इस युद्ध में उतरते हैं तो ईरान के अंदर गृहयुद्ध जैसे हालात हो जाएंगे. ऐसा माना जा रहा है कि हाल ही में अमेरिका और कुर्द समूह के बीच बातचीत भी हुई है. ईरानी शासन को अस्थिर करने के लिए अमेरिका एक खास रणनीति के तहत काम कर रहा है. 

CIA कुर्द विद्रोहियों के संपर्क में, ईरान को हर तरफ से घेरने की है तैयारी

अमेरिका और इज़राइल का ईरान के खिलाफ चल रहा युद्ध अब पांचवें दिन प्रवेश कर चुका है. कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका ईरान में विपक्षी कुर्द बलों को हथियार देने और विद्रोह भड़काने के उद्देश्य से उनसे लगातार संपर्क में है. कुर्द और अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन विपक्षी कुर्द समूहों को हथियार देने की संभावना पर सक्रिय रूप से चर्चा कर रहा है. हालांकि, बुधवार तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया था कि कोई समझौता हुआ है या नहीं. कुर्द विद्रोही कई वर्षों से तेहरान का विरोध करते आ रहे हैं और उन्होंने ईरान के कुर्दिस्तान प्रांत के साथ-साथ अन्य पश्चिमी प्रांतों में भी कई हमले किए हैं. वे इराक-ईरान सीमा पर सक्रिय हैं, और ईरान और इराक के कुर्द अल्पसंख्यकों के बीच घनिष्ठ संबंध हैं.अमेरिकी जासूसी एजेंसी (CIA) का पड़ोसी देश इराक में कुर्द समूहों के साथ काम करने का लंबा इतिहास रहा है.

वॉशिंगटन ने सीरिया में पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के खिलाफ कुर्द लड़ाकों को वित्तीय सहायता, हथियार और प्रशिक्षण भी दिया था. खास बात ये है कि सीआईए ने पिछले कई दशकों में कई देशों में विद्रोहियों और सशस्त्र समूहों को वित्त पोषित किया है ताकि अमेरिकी विदेश नीति की आलोचना करने वाली सरकारों को अस्थिर किया जा सके.मौजूदा युद्ध के बीच, जब ईरान पड़ोसी खाड़ी देशों में अमेरिकी संपत्तियों और कर्मियों पर हमले कर रहा है, तब ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने पश्चिम में कुर्द ठिकानों को भी निशाना बनाया है.

ब्रिटेन स्थित थिंक टैंक चैथम हाउस के विश्लेषक नील क्विलियम ने इस योजना के बारे में कहा है कि सहज रूप से, यह एक गलत कदम लगता है, और चेतावनी दी कि इससे ईरान में और अधिक आंतरिक संघर्ष भड़क सकता है.उन्होंने कहा कि यह बाद में सोचा गया कदम है और किसी व्यापक अंतिम परिणाम के समर्थन में किसी बड़ी योजना में शामिल नहीं था. इससे पता चलता है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका-ईरान युद्ध की योजना ठीक से नहीं बनाई गई है.

आइये आपको बताते हैं कि आखिर ये कुर्द विद्रोही हैं कौन...

अगर बाद कुर्द फोर्स की करें तो ये वो लोग हैं जो एक जातीय समूह का हिस्सा हैं. इनकी आबादी का मुख्य हिस्सा पश्चिम एशिया के चार देशों जिनमें तुर्किये, इराक, ईरान और सीरिया में पाई जाती है. कुर्द की जनसंख्या की बात करें तो उसके बारे में कोई सटिक आंकड़ा तो उपलब्ध नहीं है लेकिन एक अनुमान के अनुसार कुर्द की कुल आबादी 4 से साढ़े चार करोड़ के आसपास है. इन लोगों को अपनी भाषा है जिसे कुर्दिश कहते हैं. इनकी संस्कृति और परंपराएं भी अलग हैं. 

आखिर किस बात के लिए लड़ रहे हैं ये कुर्द

कुर्दों की लड़ाई अपने उस सपने के लिए है जो 20वीं शताब्दी की शुरुआत में ही देखा गया था. इस समुदाय के लोग अपने लिए अलग से स्वतंत्र राष्ट्र कुर्दिस्तान चाहते हैं. इसकी मांग सबसे पहले 20वीं शताब्दी की शुरुआत में पहले विश्व युद्ध के ठीक बाद शुरू हुई थी. पहली बार स्वतंत्र राष्ट्र का प्रस्ताव सन् 1920 में रखा गया था. सेव्रेस संधि में भी कुर्दों के लिए स्वतंत्र राष्ट्र की बात कही गई थी.इसके बाद ही कुर्दों को उन देशों में विभाजित कर दिया गया. जहां वे अब रहते हैं. आपको बता दें कि तुर्किये में विशेष रूप से कुर्दों के साथ राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अन्याय होते रहे हैं. इसी बात से वो शुरू से ही असंतुष्ट थे. कुर्दों में आत्म-निर्णय और स्वतंत्रता की भावना उस समय मजबूत हुई जब तुर्किये ने उनकी पहचान और उनकी भाषा के सार्वजनिक उपयोग को प्रतिबंधित कर दिया था. 

एक्शन में आए कुर्द तो क्या होगा? 

अब बड़ा सवाल ये है कि अगर अमेरिका के इशारे पर कुर्द विद्रोही ईरान के खिलाफ उतरते हैं तो इससे ईरान की मुश्किलें कैसे बढ़ सकती हैं. जानकार मानते हैं कि अगर ऐसा हुआ तो कुर्द विद्रोही ईरानी सुरक्षा बलों को घेर सकते हैं. साथ ही साथ ईरान के कई हिस्सों में गड़बड़ी फैला सकते हैं. ये अगर अपनी पूरी क्षमता के साथ ईरान के खिलाफ मैदान में उतरे तो इससे ईरानी सैन्य संसाधनों को कम कर सकते हैं. चुकि कुर्दिश लोगों को अमेरिका का समर्थन प्राप्त होगा तो ऐसे में ईरानी सेना को उत्तरी इलाके से खदेड़कर वहां अपना कब्जा भी कर सकते हैं. अगर हालात इस तरह के होते हैं तो ईरान के अंदर गृहयुद्ध छिड़ जाएगा जिससे इजरायल और अमेरिका को फायदा होगा. और इसका सीधा फायदा अमेरिका को होगा क्योंकि उसका सीधा मकसद ही ईरानी सत्ता को हर तरफ और हर तरह से नुकसान पहुंचाने का है. 

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