- मिडिल ईस्ट के युद्ध के कारण ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है
- ईरान ने कहा है कि वह इस जलमार्ग को कई सालों तक बंद रख सकता है
- ट्रंप ने सोशल मीडिया पर संकेत दिए हैं कि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलकर तेल व्यापार बढ़ाया जा सकता है
मिडिल ईस्ट में चल रही जंग ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है. जब से ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच भीषण जंग शुरू हुई है, तभी से होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है. यहां ईरान का कंट्रोल है. ईरान केवल अपने मित्र देशों को ही यहां से निकलने दे रहा है. इस समुद्री रास्ते से दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल का आवागमन होता है. ऐसे में पूरी दुनिया में तेल के दाम आसमान छू रहे हैं. इस बीच ईरान ने ऐलान किया है कि वह होर्मुज स्ट्रेट को कई सालों तक बंद कर सकता है. अगर ऐसा हुआ तो यह युद्ध पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरी चोट कर सकता है.
'होर्मुज को कई सालों तक बंद कर सकते हैं'
ईरानी मीडिया ने एक अधिकारी के हवाले से दावा किया है कि ईरान के पास होर्मुज पर ऐसी नाकाबंदी कई सालों करने की ताकत है. उन्होंने जोर देकर कहा कि इस रणनीतिक जलमार्ग को अमेरिकी और उनके सहयोगी देशों के जहाजों के लिए प्रभावी रूप से बंद कर दिया गया है ताकि इस क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और छावनियों को समुद्र के रास्ते मिलने वाली लॉजिस्टिक आपूर्ति को पूरी तरह रोका जा सके. अधिकारी के अनुसार, ईरान का मानना है कि यदि उसने इस जलमार्ग पर पहले ही नियंत्रण कर लिया होता, तो दुश्मन की सैन्य और रसद क्षमताएं काफी हद तक कमजोर हो गई होतीं और अब ईरान ऐसी किसी भी गतिविधि को जारी रखने की अनुमति नहीं देगा.
ट्रंप ने होर्मुज खुलने का दिया था संकेत
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया था कि तेल से लाभ कमाने के लिए होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जा सकता है और इसे भारी मुनाफा कमाने का अवसर बताया, क्योंकि समुद्री यातायात में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं. ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "थोड़ा और समय मिलने पर हम आसानी से होर्मुज स्ट्रेट खोल सकते हैं, तेल ले सकते हैं और बड़ा मुनाफा कमा सकते हैं. यह दुनिया के लिए ‘गशर' साबित होगा.”
होर्मुज से कितने जहाज गुजर रहे?
मैरीटाइम इंटेलिजेंस फर्म विंडवर्ड के अनुसार, एक अप्रैल को 16 जहाज इस स्ट्रेट से गुजरे, जो गंभीर व्यवधान के बाद लगातार तीसरा दिन था जब आवाजाही दर्ज की गई. एक अलग आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार को 16 मालवाहक जहाज यहां से गुजरे, जो एक दिन पहले 11 थे. यह धीरे-धीरे सुधार का संकेत है, हालांकि यह अभी भी संघर्ष से पहले के स्तर से काफी कम है. यह व्यवधान मार्च के मध्य में शुरू हुआ था, जब ईरान ने अनिवार्य नेविगेशन कॉरिडोर लागू किया, जिसकी निगरानी आईआरजीसी कर रहा था. इसके चलते जहाजों को अपने मार्ग बदलने पड़े और ईरानी निगरानी में संचालन करना पड़ा.
विंडवर्ड के अनुसार, दो अप्रैल तक अरब की खाड़ी में लगभग 656 जहाज मौजूद थे, जिनमें 55 प्रतिशत मालवाहक जहाज और 45 प्रतिशत टैंकर थे. यातायात असंतुलित बना हुआ है, जहां केवल एक जहाज अंदर आया जबकि आठ बाहर गए. इनमें कंटेनर कार्गो और तेल टैंकरों का दबदबा रहा. ओमान के नियंत्रण वाले तीन जहाज ईरान नियंत्रित कॉरिडोर को दरकिनार करते हुए अंतरराष्ट्रीय मार्गों से जलसंधि से बाहर निकले. इनमें से एक एलएनजी टैंकर सोहार मस्कट के पास पहुंचा, जो संघर्ष बढ़ने के बाद स्ट्रेट से गुजरने वाला पहला एलएनजी जहाज बना.
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