ईरानी जहाज के इंजन रूम में छेद और कब्जा करने का ट्रंप का दावा, ईरान की सख्ती, तेल में भूचाल- समझिए पूरा मामला

अमेरिका ने एक ईरानी झंडा लगे एक कार्गो जहाज को रोककर अपने कब्जे में लेने का दावा किया है. इस ताजा घटनाक्रम से पूरी दुनिया में एक बार फिर चिंता बढ़ गई है. क्या है पूरी कहानी?

विज्ञापन
Read Time: 7 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • ट्रंप ने दावा किया कि ईरानी झंडे वाले एक जहाज के इंजन रूम में छेद करके अमेरिकी मरीन ने उसे कब्जे में लिया है.
  • ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने हमले की पुष्टि करने के साथ ड्रोन से अमेरिकी जहाज पर हमला करने का दावा किया.
  • इस खबर से तेल की कीमतें फिर बढ़ गईं और युद्ध समाप्त करने के लिए चल रही बातचीत पर ग्रहण लगा दिया.
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी से जारी टकराव के बाद 7-8 अप्रैल को दो हफ्ते का सीजफायर हुआ. दोनों पक्षों के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता से इस टकराव को खत्म करने की बातचीत चल ही रही थी कि अमेरिका ने बीते दिन एक ईरानी झंडा लगे कार्गो जहाज को रोककर अपने कब्जे में लेने का दावा किया.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ये घटना ओमान की खाड़ी में हुई जहां अमेरिकी नौसेना पहले से ही ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी को लागू कर रही है. ट्रंप के मुताबिक, जिस जहाज TOUSKA को रोका गया, वह अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद इस नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहा था.

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी देते हुए एक पोस्ट किया, "आज, ईरान के झंडे वाले एक मालवाहक जहाज तौस्का (TOUSKA), जो करीब 900 फीट लंबा और एक विमानवाहक पोत के बराबर भारी है, हमारी नौसैनिक नाकाबंदी को पार करने की कोशिश की, लेकिन नाकाम साबित हुआ. अमेरिकी नौसेना के गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर यूएसएस स्प्रूएंस (USS SPRUANCE) ने ओमान की खाड़ी में TOUSKA को रुकने की चेतावनी दी. ईरानी चालक दल ने बात नहीं मानी तो हमारे नौसेना के जहाज ने उसके इंजन रूम में छेद करके उन्हें वहीं रोक दिया. फिलहाल, अमेरिकी मरीन ने जहाज को अपने कब्जे में ले लिया है. TOUSKA पर अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने प्रतिबंध लगा रखे हैं क्योंकि पहले भी वह अवैध गतिविधियों में शामिल रहा है. जहाज पूरी तरह से हमारे कब्जे में है और हम जहाज पर मौजूद हर चीज की जांच कर रहे हैं."

ट्रंप ने बताया कि ईरानी जहाज को स्पष्ट चेतावनी दी गई. यह चेतावनी अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के तहत दी जाती है, जिसमें जहाज को रुकने और जांच के लिए तैयार रहने को कहा जाता है. लेकिन ट्रंप के अनुसार, जब ईरानी क्रू ने इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया तो अमेरिकी नौसेना ने TOUSKA के इंजन रूम को निशाना बनाया. 

Advertisement

इसका मतलब साफ है कि जहाज को आगे बढ़ने से रोकने के लिए सीधे सैन्य बल का इस्तेमाल किया गया.

ये भी पढ़ें: हॉर्मुज से हिल गई LPG सप्लाई लेकिन पाइप गैस पर क्यों ज्यादा आंच नहीं आई, समझिए LPG vs LNG का पूरा गणित

ईरान का सख्त रुख

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चीन से लौट रहे एक जहाज पर अमेरिकी सेना के हमले की पुष्टि करने के साथ ही जल्द कार्रवाई की बात कही है. इसके कुछ देर बाद ही ईरान ने ओमान की खाड़ी में अमेरिकी जहाज पर ड्रोन से हमला किया. ईरान की अर्ध-सरकारी न्यूज एजेंसी तसनीम ने इसकी जानकारी दी.

Advertisement

ईरान की सरकारी मीडिया ने यह भी रिपोर्ट किया है कि तेहरान फिलहाल अमेरिका के साथ बातचीत में शामिल नहीं होगा. इसकी वजह समुद्र में चल रही अमेरिकी नाकेबंदी, अमेरिका के बार-बार बदलते रुख और सीजफायर के लिए अमेरिका की बड़ी शर्तों को बताया गया है.

ईरानी मीडिया और अधिकारियों के हालिया बयानों से यह संकेत भी मिलता है कि स्थिति बेहद तनावपूर्ण है. ईरान पहले भी अमेरिका की समुद्री नाकाबंदी को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बता चुका है.

ये भी पढ़ें: 'काला सोना' बना ढाल, मिडिल ईस्ट संकट में भी नहीं डगमगाएगी भारत में बिजली व्यवस्था

नाकाबंदी बनाम कूटनीति: दोहरा खेल?

एक तरफ जहां अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह कूटनीतिक रास्ते से बात भी करना चाह रहा है. ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान जाएगा, जहां ईरान के साथ बातचीत की कोशिश की जाएगी. बताया गया है कि इस टीम की अगुवाई अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे. उनके साथ ट्रंप के करीबी सहयोगी और कूटनीतिक प्रतिनिधि भी होंगे. लेकिन इस बातचीत पर भी अनिश्चितता बनी हुई है. 

ईरान की सरकारी मीडिया ने इन रिपोर्ट्स को झूठ बताया है. यानी एक तरफ अमेरिका बातचीत की बात कह रहा है, वहीं ईरान इस प्रक्रिया पर भरोसा नहीं जता रहा.

Advertisement

पाकिस्तान ने जरूर मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश की है और वहां सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान इस बैठक में हिस्सा लेगा या नहीं.

ट्रंप की चेतावनी

इस पूरे घटनाक्रम के बीच ट्रंप का रुख और सख्त होता जा रहा है. उन्होंने साफ लहजों में कहा है कि अगर ईरान के साथ कोई समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स और पुलों को निशाना बना सकता है.

Advertisement

यह बयान बेहद गंभीर है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत नागरिक ढांचे जैसे बिजलीघर और पुलों पर हमला करना युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकता है. हालांकि, अमेरिकी पक्ष का कहना है कि अगर इन ढांचों का इस्तेमाल सैन्य गतिविधियों के लिए हो रहा है, तो वे वैध लक्ष्य हो सकते हैं.

होर्मुज पर खतरा

इस पूरे संकट का सबसे अहम केंद्र होर्मुज स्ट्रेट है. यह दुनिया का वह सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है, जहां से बड़ी मात्रा में (करीब 20 फीसद) तेल और गैस का निर्यात होता है.

हाल के दिनों में इस जलमार्ग पर जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है. कई जहाजों को वापस लौटना पड़ा है. कई वहां आसपास के बंदरगाहों पर फंसे हैं, जबकि कुछ को हमलों का सामना करना पड़ा.

ईरान ने यहां तक कहा है कि वह इस जलमार्ग को नियंत्रित करता है और जरूरत पड़ने पर इसे बंद भी कर सकता है. दूसरी तरफ अमेरिका इसे खुला रखने के लिए हर संभव कदम उठाने की बात कर रहा है.

Photo Credit: AFP

ईरान का रुख: दबाव में बातचीत नहीं

ईरान ने अमेरिका की नीति को दोहरे मापदंड वाला बताया है. पाकिस्तान में ईरानी राजदूत ने कहा कि एक तरफ नाकेबंदी और धमकियां, दूसरी तरफ बातचीत- यह संभव नहीं है.

ईरान की संसद में एक प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है, जिसमें यह तय किया जाएगा कि किन देशों को इस जलमार्ग से गुजरने की अनुमति दी जाएगी. इस प्रस्ताव के तहत शत्रु देशों पर कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं.

Photo Credit: AFP

क्या बढ़ेगा संघर्ष?

जानकारों का मानना है कि मौजूदा स्थिति बेहद खतरनाक है. अगर दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े रहते हैं, तो यह टकराव बड़े सैन्य संघर्ष में बदल सकता है.

इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा. वैश्विक तेल सप्लाई, व्यापार मार्ग और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा.

Photo Credit: AI Generated Image

दुनिया के सामने बड़ा संकट

समंदर में हुई इस एक कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि अब हालात बेहद गंभीर हो चुके हैं. एक तरफ अमेरिका की सख्ती, दूसरी तरफ ईरान की चेतावनी. दोनों मिलकर एक ऐसे टकराव की ओर इशारा कर रहे हैं, जो कभी भी विस्फोटक रूप ले सकता है. जहाज पर कब्जा करना, उसके इंजन पर हमला करना, बातचीत को लेकर अनिश्चितता और लगातार दी जा रही धमकियां- सभी संकेत नकारात्मक हैं, पर क्या कूटनीति इस संकट को टाल पाएगी? 

इस बीच नए तनाव का सीधा असर तेल बाजार पर भी तुरंत देखने को मिला. ब्रेंट क्रूड करीब 4.7% उछलकर 94 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि WTI भी 5.6% चढ़ गया. कुछ ही हफ्तों में तेल की कीमतें 60 डॉलर से बढ़कर 120 डॉलर के करीब तक जा चुकी हैं, जो इस संकट की गंभीरता को दिखाता है.

ये भी पढ़ें: Stock Market Today: मिडिल ईस्ट युद्ध से फिर सहमा बाजार, खुलते ही 200 अंक लुढ़का सेंसेक्स, निफ्टी भी 24,300 से फिसला

Featured Video Of The Day
50 दिन की जंग में नया मोड़, अमेरिकी युद्धपोतों पर ईरान का बड़ा ड्रोन अटैक