- US-इजरायल के भीषण हवाई हमले में शीर्ष नेता सहित कई सैन्य कमांडरों की मौत के बाद ईरान जोरदार जवाब दे रहा है.
- ईरान के इस तगड़े पलटवार के पीछे मोजैक डिफेंस नीति को सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है.
- जिसे IRGC के पूर्व कमांडर मोहम्मद अली जाफरी ने विकसित किया था. आइए जानते हैं क्या है ये नीति?
Iran US-Israel War: 26 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने जब ईरान पर हमला किया, तब डोनाल्ड ट्रंप को वेनेजुएला जैसी सत्ता परिवर्तन की उम्मीद थी. क्योंकि 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत किए हमले की शुरुआत में ही ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का तेहरान स्थित अतिसुरक्षित ठिकाना तबाह हो चुका था. इस हमले में खामेनेई सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रियों की जान गई. ईरान पर हमले से शुरू हुए जंग का आज 14वां दिन है. इस जंग में हजारों लोगों की मौत हो चुकी हैं, लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं. ईरान के साथ-साथ अमेरिका के भी कई सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा है.
शीर्ष नेतृत्व को कई चोट पहुंचने के बाद ईरान कैसे दे रहा करारा जवाब?
इस जंग की सबसे खास बात यह है कि ईरान का इस्लामी शासन अपने शीर्ष नेतृत्व को कई नुकसान पहुंचने के बाद भी पलटवार कर रहा है. एक्सपर्ट का मानना है कि इस्लामी गणराज्य की लड़ाई जारी रखने की क्षमता उसकी सेना के 'मोजैक डिफेंस' (Mosaic Defence) सिद्धांत से उपजी है, जिसे वर्षों पहले ईरानी रणनीतिकार मोहम्मद अली जाफरी (Mohammad Ali Jafari) ने तैयार किया था.
2007-2019 तक IRGC के कमांडर इन चीफ रहे मोहम्मद अली जाफरी
'मोजैक डिफेंस नीति' के सूत्रधार के रूप में जाने जाने वाले मेजर जनरल मोहम्मद अली जाफरी एक पूर्व सैन्य अधिकारी हैं, जो 2007 से 2019 तक इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर-इन-चीफ रहे. ईरान में इस्लामी क्रांति आने के बाद मोहम्मद अली जाफरी ने कुर्दिस्तान प्रांत में कार्यरत एक खुफिया इकाई से अपने सैन्य सफर की शुरुआत की थी.
रिपोर्ट के अनुसार जाफरी ने 1979 से 1989 तक चले ईरान-इराक युद्ध में भाग लिया. IRGC में लगातार उच्च पदों पर आसीन होते गए. 1992 में उन्होंने गार्ड्स की जमीनी सेना के कमांडर का पदभार संभाला और उन्हें आईआरजीसी की एक विशिष्ट इकाई, सरल्लाह का नेतृत्व करने का भी दायित्व सौंपा गया.
सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज का निदेशक बनने पर जाफरी ने बनाया मोजैक सिद्धांत
2005 में जाफरी को IRGC के सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज का निदेशक नियुक्त किया गया. तब उन्होंने अपने पद का उपयोग ईरान के मोजैक सिद्धांत को बनाने के लिए किया. जिसमें ईरान-इराक युद्ध और 2003 में अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन द्वारा इराक पर आक्रमण से मिले सबक शामिल थे. यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस की एक रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है.
इसके बाद 2007 में जाफरी को IRGC का कमांडर-इन-चीफ बनाया गया और उन्होंने अपने कार्यकाल का उपयोग मोज़ेक रक्षा सिद्धांत को लागू करने के लिए किया, जिसे अभी तक अमेरिकी और इजरायली सेनाएं भेद नहीं पाई हैं.
ईरान की मोजैक रक्षा प्रणाली क्या है?
मोजैक रक्षा प्रणाली ईरान की एक सैन्य अवधारणा है, जिसके तहत डिफेंस की कमान एक जगह केंद्रित होने के बदले कई क्षेत्रीय और स्तरों में संगठित होती है. इस मॉडल में IRGC, बासिज, रेगुलर आर्मी यूनिट, मिसाइल फोर्स, नौसेना संसाधन और स्थानीय कमान संरचनाएँ एक वितरित प्रणाली के हिस्से हैं. किसी हमले में यदि एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो अन्य काम करते रहते हैं, और यदि वरिष्ठ नेता मारे जाते हैं, तो भी डिफेंस की यह सीरीज तबाह नहीं होती.
मोजैक डिफेंस नीति के तहत इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के लिए 31 स्वतंत्र कमांड बनाईं. हर कमान एक आत्मनिर्भर इकाई थी, जो पहले से तय योजना के आधार पर काम करने में सक्षम है. इसके पास अपने मिसाइल और ड्रोन बेड़े रखे गए. यह किसी निर्णायक जीत की योजना नहीं, बल्कि ऐसी रणनीति है जो हार को असंभव बना देती है.
सबसे खास बात यह कि यदि शीर्ष नेतृत्व से संपर्क टूट जाता है तो मोजैक डिफेंस नीति के तहत सेना की ये टुकड़ियां अपने दम पर कार्रवाई करने का अधिकार और क्षमता रखती हैं.
यह भी पढ़ें - ईरान जंग में अमेरिकी सेना का चौथा प्लेन तबाह! क्रैश हुआ KC-135, 4 की मौत
यह भी पढ़ें - Iran-Israel-US War: अली खामेनेई को मारकर भी ईरान से हार गए ट्रंप? दिल की चाहत रह गई अधूरी













