- ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में मौत
- अमेरिका और इजरायल ने महीनों की योजना और खुफिया जानकारी के आधार पर ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया
- इजरायल के विमानों ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को पहले हमले में पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया
ईरान में इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमले में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है. ईरान के सरकारी मीडिया ने इसकी पुष्टि कर दी है.तख्तापलट की ऐसी पटकथा शायद ही किसी ने सोची होगी. सिर्फ एक रात में ईरान का नक्शा और तकदीर दोनों बदल गए. जो ईरान खुद को अभेद्य मानता था, इस किले को अमेरिका और इजरायल ने अपने घातक और ताबड़तोड़ हमलों ने नेस्तनाबूद कर दिया. खामेनेई की मौत के बाद ईरान में 40 दिनों के शोक की घोषणा की गई है. रिपोर्ट में यह भी बताया है कि खामेनई की मौत शनिवार सुबह ही उनके दफ्तर में हो गई थी. आखिर अमेरिका और इजरायल के हमलों के सामने ईरान कैसे इतना बेबस हो गया? इसकी पूरी कहानी समझिए.
कैसे बेबस हो गया ईरान?
अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर पूरी योजना और खुफिया रिसर्च के बाद हमला किया था. इस हमले की योजना कई महीनों से बनाई जा रही थी. अमेरिका और इजरायल के पास खामेनेई की सटीक लोकेशन की जानकारी थी. दोनों देशों ने खामेनई के अलावा ईरान के टॉप कमांडर और सैन्य ठिकानों को ही निशाना बनाया. अपनी इंटेलिजेंस के दम पर इजरायल और अमेरिका ईरान के सुरक्षा घेरे को भेदने में सफल हो पाए.
हवाई सुरक्षा को कर दिया ध्वस्त
इजरायल और अमेरिका ने हमले बेहद तेजी से किए, जिससे ईरान को संभलने तक का मौका नहीं मिल पाया. इजरायली विमानों ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को शुरुआत में ही पंगु बना दिया, जिससे ईरानी आसमान पूरी तरह से सुरक्षित नहीं रह सका.
एक साथ कई शहरों पर हमला
इजरायल और अमेरिका ने ईरान के कई शहरों पर एक साथ हमला किया.ईरान पर आसमान के साथ-साथ समंदर से भी अटैक किया गया. तेहरान के अलावा इस्फहान, कोम, कारज और केरमंशाह जैसे शहरों पर एक साथ बमबारी की गई, जिससे ईरान की जवाबी क्षमता जवाब दे गई.
ईरान की जनता भी नहीं थी खामेनई के साथ
एक ओर ईरान पर हमला हो रहा था वहीं दूसरी और वहां की जनता भी सुप्रीम लीडर खामेनेई के खिलाफ थी. ईरान के आम लोगों ने न केवल सरकार का साथ देने से दूरी बनाई, बल्कि कई जगहों पर अयातुल्ला खामेनेई की मौत की खबर का जश्न भी मनाया. यह बेबसी सिर्फ सैन्य स्तर पर नहीं, बल्कि सामाजिक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर भी साफ दिखी. तेहरान, इस्फहान और कारज जैसे शहरों से ऐसी वीडियो सामने आए हैं जहां लोग सड़कों पर उतरकर खुशियां मना रहे थे, तालियां बजा रहे थे और अपनी कारों के हॉर्न बजाकर जीत का इजहार कर रहे थे. कई इलाकों में आतिशबाजी भी देखी गई.
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