- ईरान में महंगाई और आर्थिक संकट के कारण पूरे देश के 111 शहरों में विरोध प्रदर्शन फैल गए हैं और हिंसा जारी है
- अब तक विरोध प्रदर्शन में कम से कम 36 प्रदर्शनकारी और 4 सुरक्षाकर्मी मारे गए. 2200 प्रदर्शनकारी गिरफ्तार हैं
- ईरान के चार प्रमुख विपक्षी समूहों में शाही परिवार और उनके समर्थक, पीपुल्स मुजाहिदीन संगठन भी शामिल है
ईरान में महंगाई से त्रस्त जनता का विरोध-प्रदर्शन रुकने का नाम नहीं ले रहा है. देश के आर्थिक संकट से उत्पन्न अशांति की लहर 11वें दिन भी जारी रही. बुधवार, 7 जनवरी को ईरान में कई स्थानों पर सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें हुईं और इसके वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. सवाल है कि क्या ईरान में कोई ऐसा विपक्ष इस समय मौजूद है जो वहां के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की सरकार का तख्तापलट कर सके? ईरान के विपक्ष में मौजूद 4 ताकतों के बारे में जानने से पहले आपको ईरान के मौजूदा आंदोलन के कुछ अपडेट बताते हैं.
ईरान में क्या हो रहा?
- अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी (HRANA) के अनुसार, विरोध अब तक ईरान के सभी 31 प्रांतों के 111 शहरों और कस्बों में फैल गया है. अशांति के दौरान कम से कम 34 प्रदर्शनकारी और चार सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं और 2,200 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है. ईरान की अर्ध-सरकारी फार्स न्यूज एजेंसी ने दावा किया है ईरान के दक्षिण-पश्चिमी शहर लॉर्डेगन में हथियारबंद व्यक्तियों ने दो पुलिसकर्मियों की गोली मारकर हत्या कर दी.
- निर्वासन में रह रहे ईरान के पूर्व क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने पूरे देश में फैले विरोध प्रदर्शन की सराहना की है और इसे एक निर्णायक संकेत बताया है कि ईरान की यह आंदोलन अगले चरण के लिए तैयार हैं.
- इराक स्थित कई ईरानी कुर्द विपक्षी दलों ने भी इस विरोध प्रदर्शन के समर्थन में गुरुवार को ईरान में आम हड़ताल का आह्वान किया है.
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरानी सेना नागरिक प्रदर्शनकारियों को दबाती है तो अमेरिका हस्तक्षेप करने के लिए "लॉक एंड रेडी" है. यानी अमेरिकी मिसाइल तैयार हैं. ऐसे में ईरानी सेना के प्रमुख मेजर जनरल अमीर हातमी ने ऐसे बयानों को ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा को सीधा खतरा बताया है. उन्होंने कहा, "ईरान के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी तेज होने पर प्रतिक्रिया के बिना नहीं छोड़ा जाएगा."
ईरान के बंटे हुए विपक्ष की 4 ताकतें
1- शाही परिवार और उनके समर्थक गुट
ईरान के अंतिम शाह, मोहम्मद रजा पहलवी, 1979 में इस्लामी क्रांति के जोर पकड़ते ही भाग गए थे. 1980 में मिस्र में उनकी मृत्यु हो गई. जब राजवंश को ईरान से बाहर कर दिया गया था तब उनके बेटे रेजा पहलवी मयूर सिंहासन के उत्तराधिकारी थे. रेजा पहलवी अब अमेरिका में निर्वासन की जिंदगी काट रहे हैं. उन्होंने अहिंसक, निरंतर विरोध प्रदर्शन और एक नई सरकार पर जनमत संग्रह के माध्यम से शासन परिवर्तन का आह्वान किया है.
भले पहलवी के ईरानी प्रवासियों में बहुत सारे फैन हैं जो ईरान में राजशाही की वापसी का समर्थन करते हैं, लेकिन यह अनिश्चित है कि यह विचार देश के अंदर कितना लोकप्रिय हो सकता है. ईरान के अधिकांश लोग इतने बूढ़े नहीं हैं कि उन्हें याद हो कि क्रांति से पहले ईरान में जीवन कैसा दिखता था. पहलवी के पिता 47 साल पहले जिस ईरान से भाग गए थे, आज वह ईरान उससे बहुत अलग दिखता है.
2- पीपुल्स मुजाहिदीन संगठन
ईरान में मुजाहिदीन एक शक्तिशाली वामपंथी समूह था जिसने 1970 के दशक में शाह की सरकार और अमेरिकी ठिकानों के खिलाफ बमबारी अभियान चलाया था, लेकिन अंततः अन्य गुटों से अलग हो गया. इस समूह को अक्सर इसके फारसी नाम, मुजाहिदीन-ए खल्क संगठन, या MEK या MKO के संक्षिप्त नाम से जाना जाता है. इस्लामिक गणराज्य के कई कट्टर दुश्मन भी 1980-88 के युद्ध के दौरान ईरान के खिलाफ इराक का पक्ष लेने के लिए इसे माफ नहीं कर पाए हैं.
इसके नेता मसूद राजावी निर्वासन में हैं और उन्हें 20 वर्षों से अधिक समय से नहीं देखा गया है. समूह को उनकी पत्नी मरियम राजावी ने नियंत्रण ले लिया है. मानवाधिकार समूहों ने कल्ट की तरह व्यवहार करने और अपने फॉलोअर्स के साथ दुर्व्यवहार के लिए इसकी आलोचना की है, जिसे समूह अस्वीकार करता है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार यह समूह मरियम राजावी के नेतृत्व वाली ईरान की राष्ट्रीय प्रतिरोध परिषद (National Council of Resistance of Iran) के पीछे मुख्य शक्ति है, जिसकी कई पश्चिमी देशों में सक्रिय उपस्थिति है.
3- जातीय रूप से अल्पसंख्यक समूह
ईरान के ज्यादातर सुन्नी मुस्लिम कुर्द और बलूच अल्पसंख्यक अक्सर तेहरान में फारसी भाषी, शिया मुस्लिम सरकार के शासन के खिलाफ नाराज रहते हैं. कई कुर्द समूहों ने लंबे समय से देश के पश्चिमी हिस्सों में इस्लामिक गणराज्य का विरोध किया है, जहां वे बहुमत में हैं, और सरकारी बलों के खिलाफ सक्रिय विद्रोह के दौर भी आए हैं. ईरान की पूर्वी सीमा पर पाकिस्तान के बलूचिस्तान में तेहरान विरोधी बलूच मौजूद हैं. वे ईरान के भीतर अपने बलूच जनजाति के लोगों के लिए अधिक हक की मांग करते हैं. इसके अलावा यहां बॉर्डर इलाके में अल कायदा से जुड़े सशस्त्र जिहादी भी तेहरान विरोधी हैं.
4- ईरान में समय समय पर होने वाले आंदोलन
पिछले एक दशक से लगातार कई स्थानों पर सैकड़ों-हजारों ईरानी सड़कों पर उतरकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. 2009 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद, प्रदर्शनकारियों ने तेहरान और अन्य शहरों में वोट में धांधली करने का आरोप लगाया था. 2022 में ईरान में फिर से महिला अधिकारों पर केंद्रित बड़े विरोध प्रदर्शन हुए. नारी, जीवन, स्वतंत्रता का प्रदर्शन महीनों तक जारी रहा लेकिन कोई संगठन या नेतृत्व नहीं बन पाया और कई प्रदर्शनकारियों को अंततः गिरफ्तार कर लिया गया और जेल में डाल दिया गया. अब इस बार का आंदोलन आर्थिक संकट के मुद्दे पर हो रहा है.
(रॉयटर्स के इनपुट के साथ)














