ईरान में जारी हिंसक प्रदर्शनों के बीच बड़ा खुलासा हुआ है. ईरान प्रशासन के एक सीनियर अधिकारी ने पहली बार माना है कि देशव्यापी हिंसा में अब तक 2 हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं. इनमें बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं. ये पहली बार है जब ईरान ने दो हफ्ते से जारी प्रदर्शनों के दौरान इतनी बड़ी संख्या में हुई मौतों को आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है. हालांकि ये स्पष्ट नहीं किया कि मरने वालों में कितने आम नागरिक हैं और कितने सुरक्षा बल के जवान हैं.
मौतों के लिए आतंकी तत्वों को जिम्मेदार ठहराया
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी अधिकारी ने हालांकि इन मौतों के लिए आतंकवादी तत्वों को जिम्मेदार ठहराया. ईरान में बदहाल आर्थिक स्थिति और महंगाई के खिलाफ करीब दो हफ्ते पहले प्रदर्शन शुरू हुए थे. लेकिन देखते ही देखते ये प्रदर्शन देश के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई और उनके शासन के खिलाफ एक बड़े विद्रोह में बदल गए. ईरानी शासन के लिए 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से यह अब तक की सबसे बड़ी आंतरिक चुनौती बन गई है.
सरकार का अमेरिका-इजरायल पर आरोप
खामेनेई सरकार इस प्रदर्शन को भड़काने के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहरा रही है. सरकार का कहना है कि आम लोगों के विरोध प्रदर्शन को आतंकी तत्वों ने हाईजैक कर लिया है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने विदेशी डिप्लोमैट्स के साथ एक मीटिंग में दावा किया कि उनके पास ऐसे कई सबूत हैं जो दिखाते हैं कि देश में अशांति के पीछे अमेरिका और इजरायल का बड़ा हाथ है.
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सभी 31 प्रांतों में हो रहे विरोध प्रदर्शन
इंटरनेट और फोन पर बैन के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही स्थिति बयां कर रही है. सोशल मीडिया और मानवाधिकार संगठनों के जरिए आ रही खबरें ईरान में भीषण हिंसा की तरफ इशारा कर रही हैं. मानवाधिकार समूहों और निगरानी संगठनों का दावा है कि ये विरोध प्रदर्शन ईरान के सभी 31 प्रांतों के लगभग 185 शहरों और 585 जगहों तक फैल चुका है. अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी का दावा है कि अब तक 10 हजार से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
हालात छिपाने को लगाया इंटरनेट बैन
खबरों को बाहर जाने से रोकने के लिए खामेनेई सरकार ने इंटरनेट पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है और फोन सेवाएं भी सीमित कर दी हैं, जिससे वास्तविक स्थिति का पता लगाना मुश्किल हो रहा है. इसके बावजूद कुछ वीडियो सामने आए हैं, जिनमें रात के समय सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच गोलियां चलने और आगजनी की खौफनाक तस्वीरें दिख रही हैं.
प्रत्यक्षदर्शियों ने बयां किए हालात
इंटरनेट बैन के बावजूद ईरान के कुछ लोग मंगलवार को विदेश फोन करने में कामयाब हो पाए. तेहरान में एपी न्यूज एजेंसी को फोन करके कई लोगों ने अपने शहरों के हाल बताए. बताया कि किस तरह हेलमेट और कवच पहने दंगा रोधी पुलिस शॉटगन और आंसू गैस के गोलों से प्रदर्शनों को दबाने में जुटे हैं. कई प्रत्यक्षदर्शियों ने रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के बासिज फोर्स के मेंबर्स को भी देखा जो हथियार और लाठियां लेकर घूम रहे थे.
बैंक-दफ्तर फूंके, लोग परेशान
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कई बैंक और सरकारी दफ्तर जला दिए गए हैं. एटीएम तोड़ दिए गए और इंटरनेट के बिना कई बैंकों में कामकाज ठप पड़ गया है. राजधानी तेहरान में दुकानें खुली हैं, लेकिन आवाजाही न के बराबर है. सरकार जबरन दुकानें खुलवा रही है. अधिकारी सैटलाइट इंटरनेट सुविधा देने वाली स्टारलिंक के डिवाइस की तलाश में छापेमारी कर रहे हैं.














