ईरान के ग्रैंड अयातुल्लाह नासेर शिराजी ने अमेरिका-इजरायल के खिलाफ छेड़ा जिहाद, दुनियाभर के मुसलमानों से अपील

अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की पुष्टि ईरानी राज्य मीडिया ने कर दी.

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ग्रैंड अयातुल्लाह नासेर मकारम शिराजी ईरान के सबसे प्रभावशाली शिया धार्मिक नेताओं में से एक (एआई फोटो)
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  • अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की ईरान ने पुष्टि की है
  • ईरान के प्रमुख शिया मरजा नासेर मकारम शिराजी ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जिहाद का धार्मिक आह्वान किया है
  • नासेर मकारम शिराजी ने कहा कि खामेनेई की हत्या का बदला लेना विश्व के मुसलमानों का धार्मिक फर्ज है
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अमेरिका-इजरायल के हमले (Iran Israel-US War) में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो चुकी है. खामनेई की मौत की पुष्टि ईरान भी कर चुका है. खामेनेई की मौत के बाद ईरान के प्रमुख शिया मरजा (Grand Ayatollah) नासेर मकारम शिराजी ने रविवार को एक बयान में अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जिहाद का आह्वान कर दिया. उन्होंने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की हत्या का बदला लेना दुनिया भर के मुसलमानों का धार्मिक फर्ज है. उन्होंने कहा कि कुर्बानी देने वाले नेता के खून का बदला लेना दुनिया भर के मुसलमानों का फर्ज है.

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कौन होता हैं ग्रैंड आयतुल्लाह, कौन हैं नासेर मकारम शिराजी

ग्रैंड अयातुल्लाह नासेर मकारम शिराजी ईरान के सबसे प्रभावशाली शिया धार्मिक नेताओं में से एक हैं, जिनकी राजनीतिक और धार्मिक दोनों ही क्षेत्रों में काफी गहरी पकड़ मानी जाती है. शिया इस्लाम में दिया जाने वाला सबसे ऊंचा धार्मिक दर्जा ग्रैंड अयातुल्लाह होता है. यह वह आलिम यानि धार्मिक विद्वान होता है जो मर्ज़ा‑ए‑तक़लीद भी कहलाता है. यानी दुनिया भर के शिया मुसलमान उससे धार्मिक मुद्दों राय ले सकते हैं, जिसे मानना पड़ता है.

ये खुद इस्लामी कानून बना सकते हैं, उसकी लिखी किताबें, फ़तवे और राय शिया दुनिया में सबसे प्रामाणिक मानी जाती हैं. ग्रैंड अयातुल्लाह की संख्या बहुत सीमित होती है और पूरे विश्व में केवल कुछ चुने हुए विद्वान ही इस रैंक तक पहुंचते हैं. कम से कम 40 साल तक पढ़ाई करने के बाद ही इस दर्जे तक पहुंचा जाता है.

ग्रैंड अयातुल्लाह नासेर मकारम शिराजी से जुड़ी खास बातें

  • 1927 में जन्म हुआ, 18 साल में ही कुम में इस्लामिक शिक्षा ली.
  • 1950 में ईराक के नजफ चले गए थे और अयातुल्लाह खुई के शिष्य भी रहें.
  • 24 साल में ही पूर्ण इज्तेहाद (मौलाना) का दर्जा मिल गया था.
  • पहली इस्लामिक मैगजीन मक़तब ए इस्लाम के एडिटोरियल बोर्ड सदस्स भी रहें.
  • 100 से ज्यादा किताबें लिखी हैं.
  • 1979 से पहले वे शाह रजा पहलेवी के शासन के खिलाफ आवाज उठाने वाले रहे.
  • कई बार उनके भाषण की वजह से उन्हें गिरफ्तार तक किया गया है.
  • 1979 में Assembly of Experts for Constitution के सदस्य भी चुने गए.
  • ये नए संविधान के निर्माण और संरचना करता है.

वो तब भी सुर्खियों में आए थे जब 29 जून को उन्होंने एक विवादित फतवा जारी किया था, जिसकी दुनियाभर में खूब चर्चा हुई थी. जिसमें उन्होंने दुनिया भर के मुसलमानों से अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को निशाना बनाने की अपील की थी. उनका यह फतवा शिराजी के कार्यालय द्वारा जारी किया गया और इसे ISNA, फ़ार्स न्यूज और तस्नीम जैसे ईरान के राज्य और आईआरजीसी‑समर्थित मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स ने प्रकाशित किया. तब भी फतवे के मूल टेक्स्ट में ट्रंप और “जायोनिस्ट शासन के नेताओं” पर ईरान के सुप्रीम लीडर अली ख़ामेनेई और अन्य धार्मिक नेताओं की हत्या की साज़िश रचने का आरोप लगाया था.

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ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत

अमेरिका-इजरायल के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई से मध्य पूर्व के कई हिस्सों में तनाव और बढ़ गया है. इधर इस हमले के विरोध में रविवार को पाकिस्तान के कराची स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के पास हिंसक प्रदर्शन हुए. लगभग 3 दशक से अधिक समय से ईरान की सत्ता और राजनीति पर मजबूत पकड़ बनाए रखने वाले सर्वोच्च नेता खामेनेई अब इतिहास बन चुके हैं.  अमेरिकी और इजराइली हवाई हमलों में उनकी मौत की खबर ने न केवल पश्चिम एशिया की राजनीति में भूचाल ला दिया है, बल्कि उस नेता के विवादित शासन पर भी नयी बहस छेड़ दी है जिसने 36 वर्षों तक ईरान पर कठोर नियंत्रण बनाए रखा. ईरान के सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले नेताओं में शामिल खामेनेई ईरानी समाज में लगभग उतने ही प्रभावशाली थे जितने उनके पूर्ववर्ती अयातुल्ला रूहोल्ला खोमैनी थे, जिन्होंने 1979 में इस्लामी गणराज्य ईरान की स्थापना की थी.

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