ईरान-इजरायल-पाकिस्तान-सऊदी बन सकते हैं दोस्त, ट्रंप ने अब्राहम समझौते को लेकर की बड़ी बात

अमेरिका और ईरान 60 दिनों के फिर से सीजफायर पर बात कर रहे हैं. साथ ही स्थायी समझौते को लेकर भी दोनों में बात हो रही है. इसी बीच ट्रंप अब्राहम समझौते को आगे बढ़ाने लगे हैं. उनका मानना है कि इसी से खाड़ी में असली शांति आ सकती है.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वैंस और रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने 25 मई, 2026 को वर्जीनिया के आर्लिंगटन में एक साथ दिखे.
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  • डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत अच्छी तरह से आगे बढ़ रही है और क्षेत्रीय तनाव कम करने पर जोर दिया
  • ट्रंप ने सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान सहित कई देशों से अब्राहम समझौते में शामिल होने का आह्वान किया है
  • ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ये देश समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करते तो उनकी बुरी मंशा सामने आ जाएगी
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान के साथ बातचीत "अच्छी तरह से आगे बढ़ रही है" और उन्होंने सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान सहित कई मध्य पूर्वी देशों से क्षेत्र में तनाव को कम करने के लिए अब्राहम अकॉर्ड समझौते में शामिल होने का आह्वान किया. ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में, ट्रंप ने कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ बातचीत का नतीजा या तो "सभी के लिए एक शानदार समझौता" होगा या फिर नए सिरे से संघर्ष का खतरा पैदा होगा.

ट्रंप ने लिखा, "यह या तो सभी के लिए एक शानदार समझौता होगा या कोई समझौता नहीं होगा - फिर से युद्ध का मैदान और गोलीबारी शुरू हो जाएगी, लेकिन पहले से कहीं अधिक बड़ी और शक्तिशाली - और कोई भी ऐसा नहीं चाहता!"

ट्रंप ने इन देशों से बात की

ये टिप्पणियां ट्रंप के सप्ताहांत में यह घोषणा करने के बाद आईं कि ईरान और मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया के कई देशों को शामिल करने वाला एक बड़ा क्षेत्रीय समझौता अंतिम रूप देने के करीब है. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने इस मामले पर सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी, पाकिस्तान सेना के प्रमुख फील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर अहमद शाह, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी, जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय और बहरीन के राजा हमद बिन ईसा अल खलीफा सहित अन्य लोगों से चर्चा की.

ट्रंप के अनुसार, उन्होंने नेताओं से कहा कि वार्ता में भाग लेने वाले देशों को अब्राहम समझौते पर भी हस्ताक्षर करने चाहिए, जो अमेरिका की मध्यस्थता से तैयार किया गया एक ढांचा है. इस समझौते का उद्देश्य इजरायल के साथ अरब देशों के संबंधों को सामान्य बनाना है. उन्होंने लिखा, “मैंने कहा कि अमेरिका की तरफ से इस बेहद जटिल पहेली को सुलझाने के लिए किए गए सभी प्रयासों के बाद, यह अनिवार्य होना चाहिए कि ये सभी देश कम से कम एक साथ अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करें.”

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अमेरिकी राष्ट्रपति धमका भी दिया

अमेरिकी राष्ट्रपति ने विशेष रूप से सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और जॉर्डन का नाम लिया और कहा कि वह चाहते हैं कि ये देश समझौते में शामिल हों. उन्होंने बताया कि संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन पहले से ही सदस्य हैं. ट्रंप ने कहा, "इसकी शुरुआत सऊदी अरब और कतर की तरफ से तुरंत हस्ताक्षर करने से होनी चाहिए, और बाकी सभी को भी ऐसा ही करना चाहिए. अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उन्हें इस समझौते का हिस्सा नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे उनकी बुरी मंशा का पता चलता है."

ईरान को लेकर कही ये बात

ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अगर वाशिंगटन के साथ अंतिम परमाणु और क्षेत्रीय समझौता हो जाता है, तो ईरान भी अंततः अब्राहम समझौते का हिस्सा बन सकता है. उन्होंने लिखा, “ऊपर उल्लिखित कई महान नेताओं से बात करने पर उन्होंने पाया कि हमारे समझौते पर हस्ताक्षर होते ही वे इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान को अब्राहम समझौते का हिस्सा बनाकर सम्मानित महसूस करेंगे. वाह, यह तो वाकई कुछ खास होगा!” 

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अमेरिकी राष्ट्रपति ने अब्राहम समझौते को एक बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि इसमें शामिल देशों ने “वित्तीय, आर्थिक और सामाजिक उछाल” देखा है. उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, मोरक्को, सूडान और कजाकिस्तान को इस समझौते से लाभान्वित होने वाले सदस्य देशों के रूप में गिनाया.

अब्राहम समझौते के फायदे भी बताए

ट्रंप ने तर्क दिया कि ईरान और अरब देशों को शामिल करते हुए एक व्यापक समझौता इस क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है. उन्होंने लिखा, “मध्य पूर्व एकजुट, शक्तिशाली और आर्थिक रूप से इतना मजबूत होगा, जितना शायद दुनिया में कहीं और नहीं होगा!” उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अमेरिकी प्रतिनिधियों को समझौतों का विस्तार करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है. ट्रंप ने कहा, “इस ट्रूथ की प्रति के माध्यम से, मैं अपने प्रतिनिधियों से इन देशों को पहले से ही ऐतिहासिक अब्राहम समझौतों में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू करने और सफलतापूर्वक पूरा करने का अनुरोध करता हूं.”

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