ईरान के विदेश मंत्री ने रूसी राष्ट्रपति से मुलाकात की, पुतिन बोले, 'रूस हर संभव मदद को तैयार'

ईरान के विदेश मंत्री इस्लामाबाद की अपनी संक्षिप्त यात्रा के बाद रूस पहुंचे.अराघची ने कहा कि हालिया युद्ध के दौरान दुनिया ने अमेरिका का मुकाबला करने में ईरान की ताकत देखी और इस्लामी गणराज्य एक ‘‘स्थिर और शक्तिशाली व्यवस्था’’ है.

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पुतिन से मिलकर ईरान के विदेश मंत्री बेहद उत्साहित नजर आए.
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  • अराघची ने बताया कि ईरान ने अमेरिका का साहसिक मुकाबला किया और रूस के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत बनी रहेगी
  • अराघची ने पाकिस्तान की यात्रा को सार्थक बताया और वहां सेना प्रमुख के साथ शांति वार्ता की दिशा पर चर्चा की
  • अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का पहला दौर विफल रहा, दूसरा दौर प्रगति के साथ जारी है
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ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की. इससे पहले उन्होंने विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से बात की.  पुतिन ने अपनी संप्रभुता के लिए बहादुरी और वीरता से लड़ने को लेकर ईरानियों की सराहना की. पुतिन ने यह भी कहा कि मॉस्को पश्चिम एशिया में जल्द से जल्द शांति लाने में मदद करने के लिए हर संभव प्रयास करने को तैयार है. रूस की सरकारी समाचार एजेंसी ‘तास' की रिपोर्ट के अनुसार, मॉस्को पहुंचने से पहले अराघची ने ओमान और पाकिस्तान के नेतृत्व से बातचीत की. ईरानी विदेश मंत्री ने सेंट पीटर्सबर्ग में पुतिन से मुलाकात की और ईरान को समर्थन देने के लिए धन्यवाद दिया.

पुतिन क्या बोले

पुतिन ने अराघची के साथ अपनी मुलाकात के दौरान कहा, ‘‘रूस पश्चिम एशिया में जल्द से जल्द शांति सुनिश्चित करने के लिए अपनी ओर से हर संभव प्रयास करने को तैयार है.'' इस मुलाकात में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी मौजूद थे. पुतिन ने बताया कि उन्हें पिछले सप्ताह ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई का संदेश मिला था. उन्होंने इस संदेश के लिए अराघची को उनकी ओर से आभार व्यक्त करने और उनके अच्छे स्वास्थ्य एवं सकुशल होने के लिए शुभकामनाएं देने को कहा. ईरान के सरकारी समाचार चैनल ‘प्रेस टीवी' के अनुसार, पुतिन ने अपनी संप्रभुता के लिए ‘‘वीरता और साहस'' से लड़ने के लिए ईरानी अवाम की सराहना की.

पुतिन ने कहा, ‘‘हम आशा करते हैं कि स्वतंत्रता के लिए साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर, नये नेता के मार्गदर्शन में ईरानी अवाम इस कठिन दौर से निकल जाएगी और शांति स्थापित होगी.''

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ईरान के विदेश मंत्री क्या बोले

अराघची ने कहा कि हालिया युद्ध के दौरान दुनिया ने अमेरिका का मुकाबला करने में ईरान की ताकत देखी और इस्लामी गणराज्य एक ‘‘स्थिर और शक्तिशाली व्यवस्था'' है.  उन्होंने कहा, ‘‘ईरानी अवाम ने अपने साहस से अमेरिकी आक्रमण का सफलतापूर्वक सामना किया है....'' उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट हो गया है कि ईरान के पास रूस जैसे ‘‘महान मित्र और सहयोगी'' हैं और उन्होंने सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की ओर से रूसी नेतृत्व को ‘‘हार्दिक शुभकामनाएं'' दीं. अराघची ने कहा कि मॉस्को और तेहरान के बीच संबंध ‘‘उच्चतम स्तर की रणनीतिक साझेदारी'' का प्रतिनिधित्व करते हैं और ‘‘परिस्थितियों की परवाह किए बिना'' विकसित होते रहेंगे. उन्होंने कहा, ‘‘इस्लामी गणराज्य ईरान के समर्थन में आपके ठोस और मजबूत रुख के लिए हम आपके आभारी हैं.''

पाकिस्तान पर क्या बोले

ईरान के विदेश मंत्री इस्लामाबाद की अपनी संक्षिप्त यात्रा के बाद रूस पहुंचे, जो उनके अनुसार ‘‘बहुत ही सार्थक'' रही और इसमें पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ ‘‘अच्छी बातचीत'' शामिल थी. यह घटनाक्रम, पश्चिम एशिया युद्ध का समाधान करने के लिए शांति वार्ता के दूसरे दौर को लेकर अनिश्चितता के बीच हुआ. सेंट पीटर्सबर्ग पहुंचने पर अराघची ने अपने टेलीग्राम चैनल पर पोस्ट किये एक वीडियो में कहा, ‘‘हमने पाकिस्तान में अपने मित्रों के साथ सार्थक बातचीत की. यह यात्रा सफल रही. हमने अपनी हालिया बैठकों के परिणामों का आकलन किया और चर्चा की कि बातचीत किस दिशा में और किन परिस्थितियों में आगे बढ़ सकती है.''

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अमेरिका-ईरान शांति वार्ता पर

पश्चिम एशिया युद्ध के समाधान के लिए अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता के दूसरे दौर का जिक्र करते हुए अराघची ने कहा, ‘‘वार्ता में प्रगति हुई है.''ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी ‘इरना' के अनुसार, ‘‘पहले दौर में कुछ प्रगति होने के बावजूद, अमेरिकियों के रवैये, उनकी अत्यधिक मांगों और उनके द्वारा अपनाए गए गलत तरीकों के कारण वार्ता अपने उद्देश्यों तक नहीं पहुंच सकी. इसलिए, नवीनतम स्थिति की समीक्षा करने के लिए पाकिस्तान में हमारे मित्रों से परामर्श करना आवश्यक था.''अराघची सोमवार तड़के सेंट पीटर्सबर्ग के पुलकोवो हवाई अड्डे पर पहुंचे, जहां रूसी अधिकारियों और रूस में ईरान के राजदूत काजिम जलाली ने उनका स्वागत किया.  ईरान और अमेरिका के बीच 11 और 12 अप्रैल को हुई शांति वार्ता का पहला दौर संघर्ष में शामिल पक्षों के लिए वांछित परिणाम लाने में विफल रहा था.

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