- ईरान की सेना ने फारस की खाड़ी, इराक और अजरबैजान की सीमाओं पर गनफायर ड्रिल्स शुरू कर दी हैं
- इसका उद्देश्य अमेरिकी हमले की स्थिति में अहम ठिकानों की सुरक्षा और जवाबी हमले की तैयारी माना जा रहा है
- ईरान ने अहम ठिकानों को नो फ्लाई जोन घोषित करके पायलटों को 17 हजार फीट से नीचे उड़ान न भरने की चेतावनी दी है
ईरान में भीषण विरोध प्रदर्शनों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड के बीच तेहरान ने अपनी रक्षा के लिए 'वर्चुअल दीवार' खड़ी कर दी है. ईरान की सेना ने फारस की खाड़ी के तटीय इलाकों के अलावा इराक और अजरबैजान की सीमाओं से लगे इलाकों में असली गोला बारूद के साथ शक्ति प्रदर्शन करते हुए गनफायर ड्रिल्स शुरू कर दी हैं.
गनफायर ड्रिल में विमानभेदी तोपों का इस्तेमाल
रक्षा विश्लेषकों के मुताबिक, इस सैन्य अभ्यास का असल मकसद अमेरिकी हमले की स्थिति में अपने महत्वपूर्ण ठिकानों की रक्षा और जवाबी हमले की तैयारी माना जा रहा है. इस अभ्यास में ईरान मुख्य रूप से अपनी उन विमान भेदी तोपों का इस्तेमाल कर रहा है, जिन्हें दुश्मन के विमानों को मार गिराने के लिए डिजाइन किया गया है.
अहम ठिकानों को नो फ्लाई जोन में बदला
ईरान ने अपने अहम ठिकानों को नो फ्लाई जोन में बदल दिया है. पिछले एक हफ्ते के अंदर ईरान की एविएशन अथॉरिटी की तरफ से कम से कम 20 NOTAM (नोटिस टू एयरमेन) जारी किए जा चुके हैं. अधिकतर NOTAM में पायलटों को 17 हजार फीट से नीचे विमान न उड़ाने की चेतावनी दी गई है. यह सीधे तौर पर उन अमेरिकी फाइटर जेट्स को संदेश माना जा रहा है जो ईरान के दक्षिणी तट और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों को निशाना बना सकते हैं.
बहरीन, कतर के सामने रक्षात्मक दीवार
NDTV की ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) टीम के विश्लेषण से पता चला है कि ईरान ने अपनी दक्षिणी तटरेखा के पास एक तरह से वर्चुअल रक्षात्मक दीवार खड़ी कर दी है. इस सैन्य अभ्यास की जगह भी बेहद रणनीतिक है. जहां ये ड्रिल हो रही है, उसके ठीक सामने बहरीन और कतर हैं, जहां अमेरिका के प्रमुख सैन्य अड्डे मौजूद हैं.
ईरान के इन ठिकानों की रक्षा करेगी 'दीवार'
- फार्स गैस फील्ड
- असालूयेह पर्शियन गल्फ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास एयरबेस
- लावन द्वीप, जहां तेल और गैस के प्रमुख केंद्र हैं
- चाबहार के आसपास के इलाके और कम से कम दो छोटे बंदरगाह
ये स्थान ईरान के ऊर्जा संसाधनों और सामरिक महत्व की वजह से बेहद संवेदनशील माने जाते हैं. अभ्यास का मकसद इन ठिकानों की सुरक्षा और जवाबी प्रतिक्रिया की क्षमता को परखना माना जा रहा है.
अमेरिका को बदलनी पड़ सकती है रणनीति
भारतीय सेना के पूर्व महानिदेशक (इन्फैंट्री) लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) संजय कुलकर्णी का कहना है कि ईरान की तोपें बहुत अधिक ऊंचाई पर उड़ने वाले लड़ाकू विमानों को निशाना बनाने में सक्षम नहीं हैं. हालांकि इनकी वजह से विमानों को ज्यादा ऊंचाई पर उड़ने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है. और अगर वो ऐसा करते हैं तो ईरान की रडार के लिए उन्हें पकड़ना आसान हो सकता है.
फारस की खाड़ी पर बढ़ेगा दबाव
भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड ग्रुप कैप्टन डॉ. डी.के. पांडेय ईरान की इस गनफायर ड्रिल को अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगी देशों से अपनी रक्षा का कदम मानते हैं. उनका कहना है कि इस सैन्य गतिविधि से नागरिक उड़ानें प्रभावित नहीं होंगी क्योंकि वो आमतौर पर 30 से 40 हजार फीट पर उड़ती हैं, लेकिन इससे फारस की खाड़ी के व्यापारिक मार्ग पर दबाव जरूर बढ़ेगा.
ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई की दी है सीधी चेतावनी
ये सैन्य अभ्यास इस मायने में अहम है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को सैन्य कार्रवाई की सीधी धमकी दे दी है. उन्होंने कहा है कि अगर प्रदर्शनकारियों की हत्याओं का सिलसिला जारी रहा तो अमेरिका बेहद कड़ी सैन्य कार्रवाई करेगा. ट्रंप ने एक दिन पहले प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए सोशल मीडिया पर संदेश भी दिया था कि उनके लिए मदद रास्ते में है.














