अमेरिकी दूतावास में घुसा ईरानी ड्रोन-Video

बगदाद में अमेरिकी दूतावास के ऊपर ईरानी ड्रोन मंडराता दिखा. रडार सिस्टम के खराब होने का फायदा उठाकर सस्ते ईरानी ड्रोन ने दूतावास की दो मिनट तक बेखौफ वीडियो रिकॉर्डिंग की.

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  • ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे युद्ध में मिसाइलों के साथ ड्रोन हमलों का व्यापक उपयोग हो रहा है
  • ईरान का ड्रोन इराक के बगदाद में अमेरिकी दूतावास के ऊपर दो मिनट तक मंडराता रहा और फुटेज रिकॉर्ड की
  • अमेरिकी दूतावास का रडार एक आत्मघाती हमले में नष्ट हो गया था जिससे सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हो गई थी
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ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है. इस जंग के शुरू दो हफ्ते से ज्यादा वक्त हो गया है. लेकिन दोनों ओर से हमले थमने का नाम नहीं ले रहे. इस जंग में मिसाइलों के साथ हमलों के लिए ड्रोन्स का काफी इस्तेमाल किया जा रहा है. ईरान इजरायल के साथ-साथ उन पड़ोसी मुल्कों को भी टारगेट कर रहा है, जहां अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं. हाल ही में ईरान का एक ड्रोन इराक के बगदाद के सुरक्षित इलाकों तक पहुंच गया. यह ड्रोन बगदाद में अमेरिकी दूतावास के ऊपर मंडराता रहा. इसका वीडियो भी सामने आया है.

अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था में लगाई सेंध

दरअसल कुछ दिन पहले हुए एक आत्मघाती हमले में अमेरिकी दूतावास का रडार नष्ट हो गया था, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से बेअसर हो गई. इसका फायदा उठाकर, ईरान-समर्थित एक सस्ता ड्रोन दो मिनट तक दूतावास परिसर के ऊपर मंडराता रहा और उसने वहां की फुटेज भी रिकॉर्ड कर ली. इस घटना ने अमेरिकी दूतावास के ऊपर दो मिनट तक मंडराकर सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर सेंध लगाई. ये 'कॉस्ट एसिमेट्री' का एक बड़ा उदाहरण है.

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इधर जंग के बीच इजरायली सेन ने बड़ा दावा किया है. आईडीएफ ने दावा किया है कि ईरान में रात में हुए हमले में बासिज पैरामिलिट्री फोर्स के कमांडर घोलमरेजा सुलेमानी की मौत हो गई. सुलेमानी को उस समय निशाना बनाया गया, जब वे हाल ही में बासिज द्वारा बनाए गए एक टेंट कैंप में थे. आईडीएफ के अनुसार, बासिज ने यह कैंप तब लगाया था, जब इजरायली सेना ने पैरामिलिट्री फोर्स के कई हेडक्वार्टर पर हमला किया था. इसके अलावा, आईडीएफ का कहना है कि हमले में बासिज के डिप्टी कमांडर और पैरामिलिट्री फोर्स के दूसरे बड़े अधिकारी भी मारे गए.

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बासिज को सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों को हिंसक तरीके से दबाने में अपनी भूमिका के लिए जाना जाता है और माना जाता है कि वह ईरानी नागरिकों की अनगिनत मौतों के लिए जिम्मेदार है. आईडीएफ की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, बासिज पिछले छह सालों से 'बासिज यूनिट' का कमांडर रहा है. उसने बासिज यूनिट का नेतृत्व किया और सरकार के दमन के मुख्य हथियार के तौर पर काम किया. उसने ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसक दमन में अहम भूमिका निभाई। वे ब्रिगेडियर जनरल के बराबर सर-टिप रैंक के कमांडर थे.

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