- अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़ा हमला किया, जिसका नाम ऑपरेशन एपिक फ्यूरी रखा गया है
- डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की जनता से इस्लामिक नेतृत्व के खिलाफ उठने और अपनी किस्मत खुद बनाने का आह्वान किया
- US सेंट्रल कमांड ने इस ऑपरेशन में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के कमांड सेंटर, एयर डिफेंस साइट्स को निशाना बनाया
मिडिल ईस्ट में एक बार फिर जंग शुरू हो गई है. अमेरिका और इजरायल ने शनिवार, 28 फरवरी को ईरान पर बड़ा हमला किया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की जनता से कहा कि वे 1979 से देश पर शासन कर रहे इस्लामिक नेतृत्व के खिलाफ उठ खड़े हों और “अपनी किस्मत का नियंत्रण अपने हाथ में लें.” इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर मिसाइलें और ड्रोन दागे. अमेरिका ने जिस कदर ईरान पर आसमान से कहर बरपाया है, उसमें सबसे अहम रोल यूएस. सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) का रहा, जो अमेरिकी रक्षा विभाग की 11 संयुक्त लड़ाकू कमानों में से एक है.
अब US सेंटकॉम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो जारी करके बताया है कि कैसे उसने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर 28 फरवरी को ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू किया. इसने बताया कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सेनाओं ने रात 1:15 बजे (ET) ईरानी शासन की सुरक्षा व्यवस्था को खत्म करने के लिए हमले शुरू किए. "सबसे पहले उन जगहों को निशाना बनाया गया, जो तुरंत खतरा पैदा कर रही थीं. निशानों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांड और कंट्रोल सेंटर, ईरान की एयर डिफेंस व्यवस्था, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च करने वाली जगहें, और सैन्य हवाई अड्डे शामिल थे.
US सेंटकॉम के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा, “राष्ट्रपति ने साहसी कार्रवाई का आदेश दिया है, और हमारे बहादुर सैनिक, नाविक, वायुसेना के जवान, मरीन, गार्जियन और कोस्ट गार्ड के सदस्य इस आदेश का पालन कर रहे हैं.”
आगे बताया गया है, "अमेरिका और उसके सहयोगियों के पहले हमले के बाद, सेंटकॉम की सेनाओं ने ईरान की सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन हमलों से सफलतापूर्वक बचाव किया. अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने या लड़ाई में घायल होने की कोई खबर नहीं है. अमेरिकी ठिकानों को बहुत कम नुकसान हुआ है और कामकाज पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है. ऑपरेशन के पहले घंटों में हवा, जमीन और समुद्र से सटीक हथियारों का इस्तेमाल किया गया. इसके अलावा, सेंटकॉम की टास्क फोर्स “स्कॉर्पियन स्ट्राइक” ने पहली बार युद्ध में कम लागत वाले एकतरफा (वन-वे) अटैक ड्रोन का इस्तेमाल किया. ऑपरेशन एपिक फ्यूरी में इस पीढ़ी में पहली बार इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ताकत की सबसे बड़ी तैनाती शामिल है."














