ट्रंप का 'गुड लक' और उड़ चले 100 से ज्यादा एयरक्राफ्ट... अमेरिका ने ऐसे तैयार किया खामेनेई का 'डेथ वारंट'

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर एकसाथ हमला बोला. इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई. इस पूरे ऑपरेशन को कैसे तैयार किया गया? अब इसकी डिटेल आ गई है.

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  • अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को मिलकर ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य ऑपरेशन किया था
  • इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हुई और कई ठिकानों को निशाना बनाया गया
  • ऑपरेशन एपिक फ्यूरी में अमेरिकी सेना की सभी ब्रांचेज़ ने इजरायली फोर्सेस के साथ समन्वित हमला किया था
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वॉशिंगटन डीसी:

अमेरिका और इजरायल ने मिलकर 28 फरवरी को जो हमला किया था, वह ईरान के लिए सबसे खतरनाक साबित हुआ. इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई मारे गए. अमेरिका के जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने कहा कि अमेरिका और इजरायल ने पहले कभी इतने बड़े पैमाने पर इतना बड़ा ऑपरेशन साथ में नहीं किया था. 

जनरल डैन केन ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि 27 फरवरी को राष्ट्रपति ट्रंप ने इस ऑपरेशन को मंजूरी दी और अगले दिन 28 फरवरी की सुबह पूरी अमेरिकी सेना दुश्मन के पास पहुंच गई. 

ट्रंप ने कहा- ऑपरेशन एपिक फ्यूर अप्रूव, गुड लक

उन्होने बताया कि 27 फरवरी की दोपहर 3 बजकर 38 मिनट पर सेंट्रल कमांड को प्रेसिडेंट ट्रंप का आखिरी ऑर्डर मिला. प्रेसिडेंट ने कहा- 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी को अप्रूव करता हूं. मिशन अबॉर्ट नहीं होगा. गुड लक.'

जनरल डैन केन ने बताया, 'अप्रूवल मिलने के बाद 100 से ज्यादा एयरक्राफ्ट ने उड़ान भरी. फाइटर्स, टैंकर्स, एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग और इलेक्ट्रॉनिक अटैक एयरक्राफ्ट, बॉम्बर्स.'

उन्होंने बताया '28 फरवरी को तेहरान में जब सुबह के 9:45 बज रहे थे, तब अमेरिकी नेवी के एडमिरल ब्रैड कूपर की कमांड में सेंट्रल कमांड ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू किया. 28 फरवरी को अमेरिका की पूरी आर्म्ड फोर्स दुश्मन के खिलाफ एक साथ आई. आर्मी, नेवी, मरीन कॉर्प्स, एयरफोर्स, स्पेस फोर्स, कोस्ट गार्ड और हमारे रिजर्व हिस्सों ने इजरायली आर्म्ड फोर्स के साथ मिलकर एक कोऑर्डिनेटेड ऑपरेशन शुरू किया.'

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सबसे पहले क्या हुआ?

उन्होंने बताया कि अमेरिकी इंटेलिजेंस और इजरायल से मिले इनपुट पर पूरा ऑपरेशन दिन के उजाले में किया गया. उन्होंने बताया कि समंदर से पहला हमला किया गया. उन्होंने कहा, 'समुद्र से पहले अमेरिकी नेवी ने TOMHAWK मिसाइलें छोड़ीं. वो ईरान के दक्षिणी हिस्से में हमले करने लगे.'

जनरल केन ने बताया कि जमीन पर अमेरिकी फोर्सेस ने सटीक हथियार दागे जो जानलेवा थे. यह जबरदस्त हमला था. पहले 24 घंटों में हजार से ज्यादा टारगेट पर हमला किया गया.

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उन्होंने बताया, 'हमारा फोकस ईरानी कमांड और कंट्रोल इंफ्रास्ट्रक्चर, नेवी बैलिस्टिक मिसाइल साइट्स और इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को सिस्टमैटिक तरीके से टारगेट करने पर रहा है.'

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उन्होंने कहा कि कोऑर्डिनेटेट स्पेस और साइबर ऑपरेशंस ने कम्युनिकेशन और सेंसर नेटवर्क को बेअसर कर दिया, जिससे दुश्मन के पास जवाब देने की काबिलियत नहीं रही. 

B-2 बॉम्बर्स ने गिराए बम

एक दिन पहले अमेरिकी रक्षा विभाग के एक अधिकारी ने पुष्टि की थी कि ईरान पर हमले के लिए B-2 बॉम्बर को उतारा गया था. इस बॉम्बर के जरिए ईरान के ठिकानों पर 2 हजार किलो वजनी बम गिराए गए थे.

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प्रेस कॉन्फ्रेंस में जनरल डैन केन ने बताया कि पिछले साल जून में हुए ऑपरेशन हैमर की तरह ही इस बार भी B-2 बॉम्बर्स का इस्तेमाल किया. उन्होंने बताया कि B-2 बॉम्बर्स ने नॉनस्टॉप 37 घंटे की राउंड ट्रिप उड़ान भरी और ईरान के अंडरग्राउंड ठिकानों पर सटीक भेदने वाले बम गिराए. 

जून 2025 में जब अमेरिका ने ईरान की तीन न्यूक्लियर साइट्स पर हमला किया था, तब भी B-2 बॉम्बर्स से ही बंकर बम गिराए गए थे, जो जमीन में कई किलोमीटर नीचे जाकर टारगेट को तबाह कर देते हैं. इस बार भी B-2 बॉम्बर्स का इस्तेमाल किया गया.

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