- ट्रंप के भाषण में नो इन्फ्लेशन और कमजोर अर्थव्यवस्था के दावे आंकड़ों से मेल नहीं खाते.
- ईरान में शासन परिवर्तन और मौतों के आंकड़े को लेकर दावे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए.
- मिडिल-ईस्ट के तेल और अमेरिका में निवेश को लेकर भी की गई बातें भ्रामक या अधूरी.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जब राष्ट्र के नाम संबोधन करने आए तो यह बहुत उम्मीद थी कि वो ईरान के साथ चल रहे युद्ध को खत्म करने का एलान करेंगे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. उन्होंने कहा कि युद्ध खत्म होने के करीब है, पर उनके भाषण के बाद अमेरिकी मीडिया और एक्सपर्ट्स ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं. इसमें सबसे अहम तो यह है कि ट्रंप ने इस युद्ध को लेकर आगे की रणनीति और लड़ाई कैसे खत्म होगी, इस पर कोई ठोस जवाब नहीं दिया है. ट्रंप ने यह जरूर कहा कि यह लड़ाई दो-तीन हफ्ते और चलेगी, पर यह नहीं बताया कि उसके बाद क्या होगा. न तो उन्होंने इसे लेकर किसी कूटनीतिक समाधान के बारे में बताया और न ही यह कि अमेरिका इससे बाहर कैसे निकलेगा. यह स्थिति भ्रामक है. इतना ही नहीं इस दौरान उन्होंने कई बातें इतनी बढ़ा-चढ़ा कर कहीं जो या तो भ्रामक हैं या पूरी तरह निराधार. चलिए करते हैं ऐसे ही कुछ दावों की पड़ताल.
अर्थव्यवस्था पर दावा और सच्चाई
ट्रंप ने कहा कि पिछली सरकार के समय अमेरिका मरा हुआ और पंगु देश था और उन्होंने इसे दुनिया की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था बना दिया, जहां अब कोई महंगाई नहीं है. लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां करते हैं. पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल के आखिरी साल 2024 में अमेरिकी अर्थव्यवस्था 2.8% की दर से बढ़ी, जो स्पेन को छोड़कर सभी बड़े देशों से ज्यादा थी. 2021 से 2023 के दौरान भी ग्रोथ मजबूत रही.
वहीं बात अगर ट्रंप के दौर की करें तो अब ग्रोथ घटकर 2.1% रह गई है. हालांकि इसकी एक बड़ी वजह 43 दिनों तक चला शटडाउन भी है. वहीं महंगाई की बात करें तो फरवरी में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स 2.4 फीसद रहा, जो फेडरल रिजर्व (भारतीय रिजर्व बैंक की तरह अमेरिका का केंद्रीय बैंक) के 2% लक्ष्य से ज्यादा है. यानी महंगाई खत्म होने का दावा गलत है.
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ईरान में सत्ता परिवर्तन करने का दावा
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका का मकसद ईरान में शासन बदलना नहीं था. लेकिन शासन बदल गया. पुराने नेता मारे गए. नई सरकार पहले की तुलना में कम कट्टर है. पर असलियत इससे अलग है. 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध के पहले दिन ही इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी. इसके बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को सत्ता में लाया गया, जिन्हें और ज्यादा कट्टर माना जाता है. ट्रंप और इजरायल ने यह संकेत भी दिए थे कि वे ईरानी जनता को सरकार के खिलाफ खड़ा होने के लिए कहेंगे, लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं.
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अमेरिका को मिडिल ईस्ट से तेल की जरूरत नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अमेरिका को मिडिल ईस्ट के तेल की जरूरत नहीं है. सच तो यह है कि अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक जरूर है पर पिछले साल ही उसने फारस की खाड़ी से 8.5% तेल आयात किए हैं. ईरान युद्ध के साथ तेल की कीमतों में करीब-करीब 50 फीसद की वृद्धि हो चुकी है. अमेरिका में भी तेल के कीमतों की तपिश देखने को मिली है. वहां पेट्रोल 4 डॉलर प्रति गैलन के पार पहुंच गया है. ऐसे में ये कहना कि उसे मिडिल ईस्ट के तेल की जरूरत नहीं है, यह पूरी तरह भ्रामक है.
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अमेरिका में निवेश के दावे के सबूत नहीं
डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान अमेरिका में रिकॉर्ड 18 ट्रिलियन डॉलर का निवेश हुआ है. खुद व्हाइट हाउस की वेबसाइट पर यह आंकड़ा 10.5 ट्रिलियन डॉलर का है. उसमें भी कुछ जो बाइडन के कार्यकाल के दौरान का है. इसके अलावा इसी साल जनवरी में एक स्टडी आई थी जिसमें ये कहा गया था कि 5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक के निवेश के वादे शायद ही पूरे हो सकते हैं. यानी ट्रंप ने जो 18 ट्रिलियन का आंकड़ा दिया है वो तो बहुत दूर है. कुल मिलाकर ट्रंप का दावा यहां भी गलत है.
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